ट्रेड यूनियनों की हड़ताल के समर्थन में व्यापारियों ने आज दिल्ली में दिया धरना
मजदूर अर्थव्यवस्था में नींव का पत्थर - खंडेलवाल
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5 दरिया न्यूज (विजयेन्दर शर्मा)
नई दिल्ली , 21 Feb 2013
Last updated on: Feb 21, 2013, 00:00 IST
देश की 11 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा की गई दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल में व्यापारियों ने अपना समर्थन देते हुए कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के बैनर तले आज नई दिल्ली के जंतर मंतर पर एक धरना दिया! कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने धरने को संबोधित करते हुए कहा की मजदूर राष्ट्रीय अर्थ्वावस्था की नींव का पत्थर है और इस दृष्टि से मजदूर यूनियनों के मांग पत्र में उठाये गए मुद्दों पर सरकार को तुरंत ध्यान देते हुए एक संयुक्त कार्य दल का गठन करना चाहिए जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एवं मजदूर यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल करना चाहिए! कार्य दल को एक निश्चित समय सीमा में उक्त सभी मुद्दों पर विचार करते हुए एक ऐसा रास्ता तलाश करना चाहिए जिसमें मजदूरों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो !
धरने में कैट के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री सतीश गर्ग, कैट के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेन्द्र मदान, प्रमुख राष्ट्रीय किसान नेता श्री नरेश सिरोही, मजदूर नेता श्री पवन कुमार सहित अनेक महतवपूर्ण नेता शामिल थे ! धरने में बड़ी संख्यां में मजदूर एवं व्यापारियों ने भाग लिया ! वरिष्ठ सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी भी विशेष रूप से धरने में मौजूद थे !
वरिष्ठ किसान नेता श्री नरेश सिरोही ने मजदूरों का समर्थन करते हुए कहा की ट्रेड यूनियनों द्वारा चलाये जा रहे किसी भी आन्दोलन का अन्तरंग हिस्सा है! वास्तव में किसान, मजदूर,व्यापारी, लघु उद्योग और हाकर्स किसी भी आन्दोलन में यदि संयुक्त रूप से जुड़ जाएँ तो यह इतिहास है ! उन्होंने कहा की सरकार की नीतियां जिस प्रकार से कॉर्पोरेट वर्ग को लाभ देने के लिए बनाई जा रही हैं वह आम आदमी के लिए घातक है और सरकार बिना कोई विलम्ब किये अब मजदूरों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए !
वरिष्ठ सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने धरने पर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए कहा की सरकार न जाने किस मजबूरी में एक एक कर रिटेल व्यापार से जुड़े सभी वर्गों के लिए हर दिन एक नयी मुसीबत कड़ी करती जा रही है! बड़े पूंजीपतियों को लाभ देने हेतु नीतियां बनाना सरकार का एक फैशन बन गया है ! सरकार यह भूल गयी है की देश की प्राकर्तिक दौलत प्रचुर मात्र में बड़े कॉर्पोरेट घरानों को दी गयी जिसका उन्होंने ने भरपूर दोहन भी किया लेकिन फिर भी अनेक प्रकार के घोटालों में उनका नाम आया है !उन्होंने अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा की आज राष्ट्रपति द्वारा संसद को दिए गए संबोधन में एक भी शब्द मजदूरों और रिटेल व्यापार के लिए नहीं बोला गया जबकि ठीक इसके विपरीत सरकार के रिटेल व्यापार में ऍफ़ डी आई की नीति की सराहना की गयी जबकि उक्त नीति अभी भी संसद के विचाराधीन है और उच्चतम न्यायालय ने इस नीति पर बड़ा अहम् सवाल खड़ा किया हुआ है ! उन्होंने कहा की मजदूरों के संघर्ष में वह उनके साथ है और संसद के चालू सत्र में वह इस मुद्दे को संसद में जोर शोर से उठायेंगे !