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'स्टेम सेल थेरेपी' से काइली जेनर को मिला आराम, जानें क्या है इसके फायदे और नुकसान

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 07 Dec 2025

Last updated on: Dec 08, 2025, 18:11 IST

किम कार्दशियन को कौन नहीं जानता? वे एक मशहूर अमेरिकी सेलिब्रिटी हैं। इनके परिवार की हर छोटी-बड़ी बात पर फैन्स की नजर रहती है। इनकी छोटी बहन काइली जेनर ने हाल ही में एक कहानी साझा की जिसमें उस दर्द का जिक्र था जिससे इन्हें बरसों बाद राहत मिली। दुनिया की सबसे मशहूर रियलिटी टीवी स्टार, बिजनेसवुमन और सोशल मीडिया आइकॉन में से एक काइली जेनर हैं। 

उन्हें ‘कीपिंग अप विद द कार्दशियन्स’ टीवी शो के जरिए अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और उन्होंने अपने ब्यूटी ब्रांड और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाई। इसके साथ ही, काइली अक्सर अपने व्यक्तिगत जीवन, फैशन और स्वास्थ्य के अनुभवों को भी साझा करती रहती हैं। 4 दिसंबर 2025 को उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें पिछले कई सालों से पुरानी पीठ दर्द का सामना करना पड़ रहा था, जो पहले बेटे के जन्म के बाद बढ़ गया था। 

उन्होंने कई पारंपरिक इलाज आजमाए, लेकिन राहत नहीं मिली। अंत में उन्होंने स्टेम सेल थेरेपी का विकल्प चुना और इसके लिए उन्हें मेक्सिको तक यात्रा करनी पड़ी। इसकी प्रेरणा 45 साल की सेलिब्रिटी बहन किम कार्दशियन ही हैं, जिन्होंने इसी साल अगस्त में इस थेरेपी यात्रा की जानकारी साझा की थी। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स को बताया था कि 2023 में वेटलिफ्टिंग करते समय कंधे में चोट लगने के बाद वह “बहुत ज्यादा दर्द” में थीं। 

उन्होंने बहुत कुछ आजमाया, फिर मेक्सिको पहुंचकर स्टेम सेल थेरेपी कराई और दर्द से निजात पाई। आखिर ये थेरेपी है क्या? स्टेम सेल थेरेपी आधुनिक चिकित्सा का एक तरीका है, जिसमें शरीर की क्षतिग्रस्त या कमजोर कोशिकाओं की मरम्मत के लिए विशेष प्रकार की कोशिकाओं (स्टेम सेल्स यानी खास तरह की कोशिकाएं होती हैं जिनमें खुद को दोहराने और शरीर की किसी भी अन्य कोशिका में बदलने की अद्भुत क्षमता होती है) का उपयोग किया जाता है। 

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ये शरीर के बिल्डिंग ब्लॉक्स हैं, जो कई अलग-अलग टिशू में पाए जाते हैं। स्टेम सेल कई सोर्स से आते हैं, जिनमें भ्रूण और एडल्ट टिशू (इसकी तादाद कम) शामिल हैं। एडल्ट स्टेम सेल में एंब्रियो स्टेम सेल की तुलना में अलग होने की क्षमता कम होती है, लेकिन वे शरीर के नेचुरल टिशू रिपेयर में अहम भूमिका निभाते हैं।

ये स्टेम सेल्स शरीर में ऐसे भागों में डाले जाते हैं जहां ऊतक (टिशू) या मांसपेशियों को पुनर्जीवन या मरम्मत की आवश्यकता होती है। स्टेम सेल्स की खासियत यह है कि वे विभाजित होकर नई कोशिकाओं का निर्माण कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी भी विशेष प्रकार की कोशिका में बदल सकते हैं, जैसे हड्डी, मांसपेशी या रक्त कोशिका। 

जब इन्हें पीठ या अन्य प्रभावित हिस्से में इंजेक्ट किया जाता है, तो यह क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत, सूजन कम करने और दर्द में राहत देने में मदद करते हैं। हालांकि, स्टेम सेल थेरेपी अभी पूरी तरह से हर देश में स्वीकृत नहीं है। अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में इसके सुरक्षित और प्रमाणित उपयोग के लिए नियामक संस्थाओं (एफडीए जैसी) की मंजूरी जरूरी है। 

कई बार लोग इसे “स्टेम सेल टूरिज्म” के लिए विदेशों में करवाते हैं, लेकिन इस तरह की थेरेपी में जोखिम भी होते हैं, जैसे संक्रमण, अपेक्षित लाभ न मिलना या कभी-कभी गंभीर जटिलताएं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस तरह का इलाज केवल प्रमाणित और अनुभवी डॉक्टर के तहत ही करवाना चाहिए। 

काइली जेनर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें दर्द में जल्दी राहत मिली और अब वह सामान्य गतिविधियों में सक्षम हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर किसी का शरीर अलग होता है और यह उपचार हर किसी के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं हो सकता। स्टेम सेल थेरेपी का उद्देश्य केवल दर्द दबाना नहीं है, बल्कि शरीर को स्वयं ठीक होने का मौका देना है। यह तरीका पारंपरिक दवाओं या सर्जरी से अलग है क्योंकि यह शरीर की अपनी मरम्मत प्रक्रिया को सक्रिय करता है।

 

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