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बागपत : अजित सिंह के समक्ष चुनौती बने पूर्व सहयोगी

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5 Dariya News

बागपत (उत्तर प्रदेश) , 10 Feb 2017

Last updated on: Feb 10, 2017, 00:00 IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री व राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया अजित सिह के लिए बागपत कभी उनका दुर्ग हुआ करता था। अब वह बात नहीं रह गई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस सीट पर इस बार अजित सिंह के पूर्व सहयोगी उनकी प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि खुद उनकी पार्टी ने एक बाहरी को यहां से चुनाव मैदान में उतारा है।अजित सिंह बागपत से लगातार छह बार सांसद चुने गए थे। उनके पिता चौधरी चरण सिंह तीन बार यहां से सांसद चुने गए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अजित सिह को भाजपा प्रत्याशी व मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त सत्यपाल सिंह ने हराया था।प्रतिष्ठा दांव पर है, इसलिए अजित सिह इस सीट पर पार्टी की जीत के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और उनकी इन कोशिशों की राह में खड़े हैं उनके ही दो पूर्व सहयोगी।
अजित सिंह ने बागपत सीट पर गुज्जर समाज से संबंध रखने वाले करतार सिह भड़ाना को उतारा है। भड़ाना खतौली से विधायक रह चुके हैं। बसपा के अहमद हमीद और भाजपा के योगेश धामा से उनका कड़ा मुकाबला है।हमीद पूर्व मंत्री नवाब कोकब हमीद खान के बेटे हैं जो बागपत का पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 1985 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। इसके बाद दो चुनाव में वह हारे। 1993 में वह फिर जीते। 1996 में उन्होंने अजित सिंह की भारतीय किसान कामगार पार्टी की सदस्यता ली और चुनाव जीता। 2002 और 2007 में उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
हमीद मुस्लिम-दलित मतों और अपने पिता की छवि के बल पर चुनाव में जीत की उम्मीद लगाए हुए हैं।भाजपा के धामा जाट समुदाय से हैं और उनका ध्यान अपने पक्ष में युवा जाटों और अन्य को करने पर है। एक जमाने में धामा, अजित सिह के विश्वासपात्र हुआ करते थे। जब उन्हें रालोद का टिकट नहीं मिला तो वह भाजपा में शामिल हो गए।रालोद प्रत्याशी भड़ाना की कोशिश गुज्जर-मुस्लिम-जाट मतदाताओं को अपने पाले में करने की रही है। हेलीकाप्टर से प्रचार ने भी लोगों का ध्यान उनकी तरफ खींचा है।समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने यहां से कुलदीप उज्जवल को मैदान में उतारा है। उन्हें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है। उनका जोर मुस्लिम-जाट एवं अन्य मतों को अपने पाले में करने पर है। उज्जवल जाट हैं और कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।बागपत के तीन लाख मतदाताओं में 65,000 मुस्लिम, 50,000 हजार जाट और करीब 45,000 गुज्जर हैं। दलितों और राजपूतों की भी अच्छी संख्या है।
वाहनों के पुर्जे बेचने वाली दुकान के मालिक मोहम्मद अली (51) ने कहा कि बागपत में बसपा, भाजपा व रालोद के बीच चुनावी जंग है।उन्होंने कहा, "नवाब साहब की अच्छी छवि रही है, धर्म और जाति से परे रही है। वह सभी को स्वीकार्य हैं। उनके बेटे अहमद हमीद को इसका लाभ मिलेगा। अगर उन्हें मुसलमानों के 60 फीसदी वोट भी मिल गए तो फिर उनके जीतने की संभावनाएं बहुत अधिक होंगी।"रोजगार की तलाश में लगे सादिक हुसैन (27) ने कहा कि अधिकांश मुस्लिम युवा सपा-कांग्रेस गठबंधन को वोट देंगे क्योंकि अखिलेश ने बतौर मुख्यमंत्री अच्छा काम किया है। लेकिन, उन्होंने कहा कि यह संभव है कि भाजपा को हराने के लिए मुसलमान हमीद का समर्थन कर दें।जयवीर दयानंद (67) की सोच इससे अलग दिखी। उन्होंने कहा, "दो की लड़ाई में तीसरा जीत सकता है।"
 किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा, "पैसा बोलता है।"जयवीर के पास बैठे सबचरण कालू (46) ने कहा कि पैसा उसके पास है जो हेलीकाप्टर से प्रचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रत्याशी ने इससे पहले पास की एक सीट पर पैसे के बल पर जीत हासिल की थी।कालू ने कहा, "मुकाबला कड़ा है। अगर मुसलमानों का वोट 50:50 बंटा तो इससे भाजपा व रालोद को लाभ होगा। इसी तरह अगर इसी अनुपात में जाट वोट बंटा तो बसपा व सपा को लाभ होगा। कोई नहीं बता सकता कि कौन जीतेगा।"जाट समुदाय से संबंध रखने वाले राजीव कुमार (34) ने कहा, "सभी चार प्रत्याशी मजबूत हैं। बसपा की संभावनाएं अधिक हैं क्योंकि जाट वोट रालोद, भाजपा और सपा में बंट सकता है। अगर दलित और मुस्लिम मतदाता एकसाथ रहे तो फिर हमीद साहब की जीत की संभावना अधिक है।"



 

Tags: Ajit Singh

 

 

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