बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को जहां कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दागी जनप्रतिनिधियों का बचाव करने वाले विवादास्पद अध्यादेश पर दिए गए बयान का समर्थन किया था, वहीं शनिवार को उन्होंने यह कह कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राहत देने की कोशिश की कि गलत फैसला वापस लेने से प्रतिष्ठा नहीं घटती। पटना में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया जाना चाहिए।" मुख्यमंत्री ने कहा, "अगर कोई सचेत होकर अनुचित कार्य को रोक देता है तो ऐसी चीजों को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए।" मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को दागी जनप्रतिनिधियों का बचाव करने वाले विवादास्पद अध्यादेश पर राहुल के बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि ऐसे किसी अध्यादेश पर संसद में चर्चा के बाद ही फैसला लिया जाना चाहिए।ऐसे प्रस्तावों पर संसद में बहस कराई जानी चाहिए और फिर सभी दलों की राय जानने के बाद विधेयक पारित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सजायाफ्ता या दागी जनप्रतिनिधियों को 'बैक डोर' से समर्थन नहीं किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि राहुल ने शुक्रवार को सीधे तौर पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि उनके विचार से दागी जनप्रतिनिधियों की सदस्यता बचाने के लिए लाए गए अध्यादेश को फाड़कर फेंक देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि सरकार ने जो कुछ भी किया है वह गलत किया है।राहुल के बयान के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफे की मांग की है। राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजे गए इस विवादास्पद अध्यादेश को अब वापस लिए जाने की संभावना जाहिर की जा रही है।