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सीएम मोहन चरण माझी ने बैठक में आपदा जोखिम कम करने पर ब्रिक्‍स के बीच सहयोग की अपील की

Mohan Charan Majhi, BJP Odisha, Chief Minister of Odisha, Odisha, Bhubaneswar
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5 Dariya News

भुवनेश्वर , 04 Jun 2026

Last updated on: Jun 04, 2026, 16:09 IST

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को पवित्र शहर पुरी में ब्रिक्‍स आपदा जोखिम कम करने वाले कार्य समूह (डीआरआरडी) की तकनीकी बैठक का उद्घाटन किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से पैदा हो रही बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की अपील की।

मुख्यमंत्री माझी ने ब्रिक्‍स देशों के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और मेहमानों का स्वागत करते हुए इस बैठक को वैश्विक स्तर पर आपदा जोखिम कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने बताया कि इस बैठक का विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' है। यह विषय अधिक सहयोग के माध्यम से लोगों की जान, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तात्कालिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

सीएम माझी ने सत्र को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आपदा जोखिम कम करना अब केवल एक अलग क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सतत विकास, आर्थिक स्थिरता और मानवीय सुरक्षा का एक मुख्य आधार बन गया है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, तेज़ी से हो रहा शहरीकरण और पर्यावरण का क्षरण दुनिया भर में आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता, दोनों को बढ़ा रहे हैं, जिसके लिए मजबूत तैयारी और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।

उन्होंने ओडिशा के विश्व स्तर पर प्रशंसित आपदा प्रबंधन मॉडल पर भी प्रकाश डाला, जो 'जीरो कैजुअल्टी' के मार्गदर्शक सिद्धांत पर आधारित है। सीएम माझी ने कहा कि राज्य ने साक्ष्य-आधारित योजना, उन्नत प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, लचीले बुनियादी ढांचे, संस्थागत क्षमता निर्माण और समावेशी शासन तंत्र के माध्यम से अपनी आपदा तैयारियों को लगातार मजबूत किया है।

चक्रवात, लू, बिजली गिरने, तटीय क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण शहरों में पैदा हो रहे नए जोखिमों के प्रति ओडिशा की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने लचीलापन बढ़ाने वाले उपायों में निरंतर नवाचार और निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। सीएम माझी ने कहा, "ओडिशा की यात्रा यह साबित करती है कि तैयारी, मजबूत संस्थाएं और सामुदायिक भागीदारी आपदाओं के प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

हालांकि, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए और भी अधिक प्रयासों, मजबूत साझेदारियों और उन्नत तकनीकी क्षमताओं की आवश्यकता होगी।" उन्होंने बढ़ते तापमान, मौसम की चरम घटनाओं और तेजी से हो रहे शहरीकरण के खिलाफ शहरों के लचीलेपन को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन, भूमि का सतत उपयोग और लू से बचाव के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने लू, बिजली गिरने और तटीय क्षरण से बढ़ते खतरों से निपटने के लिए उन्नत वैज्ञानिक हस्तक्षेपों, जन जागरूकता अभियानों और निवारक उपायों को बढ़ाने की भी अपील की। मुख्यमंत्री ने आपदा जोखिम कम करने, जलवायु अनुकूलन, लचीले बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में बिक्‍स मंच के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने भाग लेने वाले देशों और विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे केवल चर्चाओं तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी बातचीत को ठोस साझेदारियों और ऐसे व्यावहारिक परिणामों में बदलें, जिनसे दुनिया भर की कमजोर आबादी को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा, "बिक्‍स , पूर्व चेतावनी प्रणालियों, मजबूत बुनियादी ढांचे, जलवायु अनुकूलन और संस्थागत क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।

आज की जरूरत यह है कि बातचीत को ठोस कार्रवाई में बदला जाए।" बैठक के परिणामों पर विश्वास व्यक्त करते हुए, सीएम माझी ने कहा कि "पुरी चर्चाएँ" वैश्विक आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रयासों में एक मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा, "पुरी में आयोजित इस ऐतिहासिक सम्मेलन से जो रूपरेखा सामने आएगी, वह वैश्विक सुरक्षा की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर सकती है और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को एक नई परिभाषा दे सकती है।" गौरतलब है कि 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह' की बिक्‍स तकनीकी बैठक 3 से 5 जून तक पुरी में आयोजित की जा रही है।

 

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