सूखा और पलायन का पर्याय बन चुके बुंदेलखंड की वास्तविकता से वाकिफ होने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता और स्वराज अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव गुरुवार को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में पहुंचे। उन्होंने गांव वालों से उनकी समस्याएं सुनीं। यादव पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड का दौरा कर चुके हैं और उन्होंने जो तथ्य उजागर किए थे, उससे देश में उबाल आ गया था।
गुरुवार को वह मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के मस्तापुर और कोड़िया गांव गए। यहां ग्रामीणों ने उनके सामने अपना हाल का बयां किया। यादव ने आईएएनएस से कहा कि उन्हें लगता था कि मध्य प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के हालात बेहतर होंगे, मगर यहां की स्थितियां देखकर वे सिहर गए। उन्हें खेत वीरान नजर आए और हरियाली का कहीं नामोनिशान नहीं मिला।
उन्होंने कहा, "लोगों के पास रोजगार नहीं है, यहां आकर लगता है जैसे व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है।" यादव ने मस्तापुर और कोड़िया में गांव वालों की चौपाल लगाई और एक-एक व्यक्ति से उसकी समस्याएं पूछी। साथ ही कहा कि वह न तो कोई नेता हैं और न ही अधिकारी, वह तो ग्रामीणों की बात सुनने आए हैं और उसे सरकार तक पहुंचाएंगे। सरकार ने अगर नहीं सुना तो वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।