जिलाधीश राकेश कंवर ने कहा है कि वैश्वीकरण के इस दौर में हमें अपनी भाषा और लोक संस्कृति को बचाना भी एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। शनिवार को देव सदन में हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय जनजातीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए राकेश कंवर ने ये विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति, भाषा और विभिन्न परंपराएं युवा पीढ़ी तक अवश्य पहुंचनी चाहिए। तभी इनका संरक्षण हो पाएगा और हमारी सांस्कृतिक पहचान बनी रहेगी। जिलाधीश ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में कई भाषाएं, लोक संस्कृति तथा जातीय समूह बड़ी तेजी से अपनी पहचान खो रहे हैं। वैश्वीकरण ने कई भाषाओं और जातीय समूहों की संस्कृति को निगल लिया है। इसे रोकने के लिए आधुनिकता और पारंपरिकता में संतुलन बनाए जाने की आवश्यकता है।
जनजातीय सम्मेलन के आयोजन के लिए भाषा अकादमी को बधाई देते हुए कंवर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर कई विद्वानों ने सराहनीय शोध किए हैं। इस सम्मेलन के माध्यम से विद्वानों के ये शोध आम लोगों के सामने आएंगे। इससे पहले जिलाधीश ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ किया।इस अवसर पर भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक एवं भाषा अकादमी के सचिव अरुण कुमार शर्मा ने जिलाधीश का स्वागत किया तथा सम्मेलन की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में जनजातीय संस्कृति पर कई शोधपत्र पढ़े जाएंगे। उदघाटन सत्र में प्रसिद्ध साहित्यकार एमआर ठाकुर, छेरिंग दोरजे और टशी पलजोर ने भी अपने विचार रखे। इस मौक्े पर जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया, मीनाक्षी कंवर, पूर्व जिला भाषा अधिकारी सीता राम ठाकुर, विद्या शर्मा, डा. सूरत सिंह ठाकुर, तोबदन और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।