काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (सीओए) इंडिया और चितकारा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के संयुक्त सहयोग से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘शेप 2026: सस्टेनेबल हैबिटैट्स एंड आर्किटेक्चर फॉर द पीपल एंड द अर्थ’’ का चितकारा यूनिवर्सिटी के पंजाब कैंपस में सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और विद्यार्थियों ने भाग लेकर पर्यावरण अनुकूल और लोगों के हित में शहरों के निर्माण पर विचार साँझा किए।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 41 विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, जर्मनी और अमेरिका सहित कई देशों से भी विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन में पांच विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए और श्रेष्ठ शोध पत्रों को सम्मानित भी किया गया।
सम्मेलन में तीन मुख्य वक्ताओं और दस विशेष वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सत्रों में जलवायु के अनुकूल भवन निर्माण, पर्यावरण हितैषी शहरी विकास, कम प्रभाव वाले निर्माण सामग्री के उपयोग और समुदाय आधारित डिजाइन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान जिम्मेदार वास्तुकला से ही संभव है।
अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से आए प्रो. प्रो. अली ए. अलराउफ ने आधुनिक शहरों में हो रहे बदलाव और टिकाऊ विकास की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य के शहरों को मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना समय की मांग है।
काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के अध्यक्ष डॉ. अभय पुरोहित ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वास्तुकला शिक्षा और पेशेवर कार्य में सतत विकास को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने युवा वास्तुविदों से समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
सम्मेलन की संयोजक और सीओए–टीआरसी पुणे की निदेशक आर्किटेक्ट जयश्री देशपांडे ने शोध आधारित शिक्षा को आवश्यक बताया। सीओए के रजिस्ट्रार आर. के. ओबरॉय भी उपस्थित रहे। सतत विकास और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग के प्रति यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए चितकारा यूनिवर्सिटी की प्रो-चांसलर डॉ. मधु चितकारा ने कहा, “चितकारा यूनिवर्सिटी में हमारा मानना है कि सतत आवास केवल इमारतों का निर्माण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
‘शेप 2026’ की मेजबानी हमारे इस संकल्प को दिखाती है कि हम सतत वास्तुकला शिक्षा को आगे बढ़ाएं, अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करें और ऐसे नए डिजाइन तैयार करें जो लोगों और धरती दोनों के हित में हों।”चितकारा यूनिवर्सिटी, पंजाब परिसर में आयोजित ‘शेप 2026’ भारत में वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन साबित हुआ।
आयोजकों ने बताया कि यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा और इससे हरित व सुरक्षित शहरों के निर्माण को नई दिशा मिलेगी।साथ ही चितकारा यूनिवर्सिटी ने शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत की।