माननीय प्रशासक की सलाहकार परिषद की पर्यावरण स्थायी समिति (ESC) की दूसरी बैठक आज पर्यावरण भवन, सेक्टर 19-बी, चंडीगढ़ में Gian Chand Gupta, पूर्व अध्यक्ष, हरियाणा विधानसभा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के दौरान दिनांक 04.08.2025 को आयोजित पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत कार्यवाही प्रतिवेदनों (Action Taken Reports) पर विस्तृत चर्चा की गई।
निदेशक पर्यावरण, Saurabh Kumar, आईएफएस, ने समिति को यूटी चंडीगढ़ में ई-वेस्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। अपने विचार व्यक्त करते हुए उर्वशी गुलाटी, सेवानिवृत्त आईएएस (पूर्व मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार) ने ई-वेस्ट प्रबंधन के संबंध में जन-जागरूकता एवं क्षमता निर्माण गतिविधियों पर विशेष बल देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि जिम्मेदार निस्तारण सुनिश्चित हो सके तथा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जा सके।
अपने संबोधन में श्री जियान चंद गुप्ता ने प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान हेतु एक व्यापक एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेष रूप से ई-वेस्ट प्रबंधन, तृतीयक उपचारित जल के उपयोग, पॉलिथीन/प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन तथा यूटी चंडीगढ़ में हरित एवं खुले क्षेत्रों के संरक्षण एवं संवर्धन पर ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने सुझाव दिया कि कबाड़ीवालों (स्क्रैप डीलरों) का औपचारिक पंजीकरण किया जाए तथा उन्हें अपशिष्ट संग्रहण एवं पुनर्चक्रण गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने हेतु निर्धारित स्थान उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही बाजारों में रिवर्स वेंडिंग मशीनें स्थापित करने तथा कपड़े के थैलों को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की, ताकि प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके।
अध्यक्ष ने संबंधित विभागों को ई-वेस्ट एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने तथा पार्कों एवं उद्यानों में तृतीयक उपचारित जल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी रणनीतियां तैयार करने के निर्देश दिए। समिति को प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रवाह एवं प्रसार को नियंत्रित करने के लिए सभी संबंधित पहलुओं की समग्र समीक्षा कर तकनीकी सुझाव प्रस्तुत करने की सलाह दी गई।
अपने समापन संबोधन में श्री गुप्ता ने चंडीगढ़ के समक्ष उपस्थित पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रभावी समाधान हेतु सभी हितधारकों के बीच समन्वित एवं सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।