National Herald Case In Hindi: आज़ादी से पहले नेहरू की एक अख़बार पर क्यों शुरू हुई क़ानूनी लड़ाई? यहाँ जानिए नेशनल हेराल्ड केस की पूरी ABCD

Thursday, 04 June 2026

 

 

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National Herald Case In Hindi: आज़ादी से पहले नेहरू की एक अख़बार पर क्यों शुरू हुई क़ानूनी लड़ाई? यहाँ जानिए नेशनल हेराल्ड केस की पूरी ABCD

National Herald case In Hindi : हाल ही में राहुल गाँधी का फिर आमना-सामना हुआ ED के सवालों से ये पूरा मामला आज़ादी से पहले एक नेहरू की अख़बार से जुड़ा है।

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नई दिल्ली , 13 Jun 2022

Last updated on: Jun 13, 2022, 00:00 IST

National Herald case In Hindi:  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का समाना हुआ  नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से। आपको बता दें की ED कि ये पूछताछ दिल्ली में स्थित एक दफ़्तर में चल रही है। जहाँ राहुल के समर्थन में अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता ईडी के दफ्तर में मौजूद हैं। हलांकि यहां राहुल के साथ सोनिया गाँधी (Soniya Gandhi) को भी पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन इस समय सोनिया कोरोना पॉजिटिव है जिसकी वजह से वे हॉस्पिटल में एडमिट है।

सूत्रों के मुताबिक, ED की इस पूछताछ में राहुल गाँधी से यंग इंडियन कंपनी (young india company) में डायरेक्टर बनने से लेकर विदेशी बैंक एकाउंट तक से सबंधित पुरे 55 होंगे जिसमें सोनिया कि भी इस कंपनी में 38-38% हिसेदारी है। ईडी राहुल गांधी से 3 चरणों में पूछताछ कर रही है जिसमें एक चरण खत्म हो चुकी है और दूसरा चरण शुरू हो गया है इस पूछताछ में उन्होंने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। 

कसी भी मामले पर टिप्पणी करने से पहले आइए जानते हैं कि कांग्रेस से जुड़ा यह पूरा नेशनल हेराल्ड मामला क्या है?

नेशनल हेराल्ड है क्या? (What is National Herald case In Hindi)

जवाहरलाल नेहरू द्वारा नेशनल हेराल्ड 1938 में स्थापित किया गया एक समाचार पत्र था। इस अख़बार में नेहरू के साथ 5 हजार सवतंत्रता सेनानीयों के शेयर शामिल थे। इसके अलावा अख़बार में कुछ भी छापने का जिम्मा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड एक कंपनी के हाथ में था इस समाचार पत्र के जरिए सवतंत्रता सेनानी किसी भी चिंता या परेशानी पर अपनी आवाज़ उठाते थे और यही चीज़ उस समय अंग्रेजों को पसंद नहीं थी। बाद में धीरे-धीरे ये अख़बार अंग्रेजों कि आँखों में चुबने लग पढ़ा और कुछ समय बाद अंग्रेजों ने नेशनल हेराल्ड नाम से प्रकाशित किया गया अख़बार 1942 में बेन कर दिया गया। 

कांग्रेस द्वारा बनाई गई नीतियों को जनता तक पहुंचता था ये अख़बार 

1945 में इस अख़बार को फिर से शुरू किया गया था जिसके बाद 1947 में जवाहर लाल नेहरू ने अख़बार के बोर्ड अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया। उस समय ये अख़बार कांग्रेस नीतियों को जनता तक पहुंचाने का एक साधन बन चूका था। 

इसके बाद एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने 2 और समाचार पत्र जारी किए। लेकिन 2008 में, पेपर 90 करोड़ रुपये से भी अधिक के कर्ज के डूब चूका था जिसकी वजह से वे बंद हो गया। बताया जाता है कि कंपनी अख्बार निकालती थी इसलिए इसे कई जगहों पर सरकार ने बहुत ही सस्ती कीमत में जमीन दी थी। 

National Herald Case: 3 भाषाओं में प्रकाशित किया गया था इस अख़बार को 

आपको बता दे की यह कंपनी विशेष रूप से किसी व्यक्ति से संबंधित नहीं थी। 2010 में तो कंपनी के 1,057 शेयरधारक भी थे। फिर 2010 इसे घाटा हुआ और 2011 में इसकी होल्डिंग यंग इंडिया को को दे दी। AJAL ने 2008 तक इस पेपर को 3 भाषाओं में प्रकाशित किया जो इन- इन भाषाओं में था..... 

  1. अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड अखबार,

  2. उर्दू में कौमी आवाज 

  3. हिंदी में नवजीवन

लेकिन कुछ सालों बाद 21 जनवरी 2016 को, एजेएल ने इन 3 दैनिक समाचार पत्रों को फिर से शुरू करने का विचार किया।

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National Herald Case: यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना

2010 में यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना की गई थी, इसमें उस वक्त के कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी 1 डॉयरेक्टर के रूप में शामिल हुए। वहीँ सोनिया (Soniya Gandhi) के पास कंपनी के 76 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि बाकी के 24 फीसदी कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के पास हैं। जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।

अख़बार को लेकर राहुल और सोनिया गाँधी क्यों आए सामने?

आरोप ये है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मिलकर एक ऐसी कंपनी बनाई, जिसका उद्देश्य बिजनेस करना नहीं, बल्कि अपनी बनाई कंपनी के  जरिए (AJL) को खरीदकर उसकी 2 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को अपने नाम करना था। 

- यंग इंडिया कंपनी ने एसोसिएट जर्नल लिमिटेड (AJL) की 90 करोड़ की देनदारियों का जिम्मा अपने उपर ले लिया। मतलब एक तरह से उसका लोन चुकाने की जिम्मेदारी ले ली। 

-  बाद में एजेएल के 10-10 रुपए के नौ करोड़ शेयर 'यंग इंडियन' को दे दिए गए और इसके बदले यंग इंडिया को कांग्रेस का लोन चुकाना था। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को इस कंपनी के 99% शेयर मिल गए। बाद में कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ का लोन माफ कर दिया। इस तरह राहुल-सोनिया गांधी की कंपनी 'यंग इंडिया' को मुफ्त में (AJL) का स्वामित्व मिल गया था।  

अब देखना ये है की कांग्रेस पर लगे इन सब आरोपों पर आज ED अपनी पूछताछ से किस नतीजे तक पहुंचती है।

 

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