प्रदेश कांग्रेस द्वारा ड्रग रैकेट की सी.बी.आई जांच की मांग हेतु दबाव बनाने के लिए शुरू की गई भूख हड़ताल आज तीसरे दिन में प्रवेश कर गई। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि उनको न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए बाजवा ने कहा कि उनकी कौंसिल माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट में २९ जनवरी को अपील सी.डब्ल्यू.पी. २०३५९ की सुनवाई में हिस्सा लेगी, जिसके लिए माननीय हाइकोर्ट ने इजाजत दे दी है। बाजवा ने बार्डर स्टेट होने कारण पंजाब को विशेष औद्योगिक पैकेज देने की मांग को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह व उद्योग मंत्री ने उनको तय समय समाप्त होने के बाद पहाड़ी राज्यों को पैकेज न देने का भरोसा दिया था। वह एक बार फिर केन्द्र में पंजाब के मंत्रियों व पार्टी सांसदों के साथ पंजाब के लिए विशेष पैकेज की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को मिलेंगे। यदि ऐसा नही हो सकता, तो केन्द्र को पंजाब के छह बार्डर जिलों को समान पैकेज देना चाहिए, ताकि उद्योगों के पास बार्डर इलाके में स्थापित होने का विकल्प रहे, जहां सस्ती भूमि, लेबर व पानी उपलब्ध है।
बाजवा ने कहा कि जब २००३ में केन्द्र सरकार ने तीन पहाड़ी राज्यों को विशेष पैकेज जारी किया था, अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींडसा कैमिकल व फर्टीलाइजर मंत्री थे। परंतु ढींडसा ने इस फैसले का कोई विरोध न किया। यहां तक कि उद्योग राज्य मंत्री रहे सुखबीर बादल भी इस पर चुप रहे थे। उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा को पहाड़ी राज्यों को विशेष पैकेज देने के खिलाफ भाजपा के दिल्ली दफ्तर के बाहर धरना देना चाहिए। इस मुद्दे पर राज्यपाल के घर के बाहर धरना देने का अकाली-भाजपा के पास कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने अकाली दल व भाजपा से संबंधित बदमाशों द्वारा केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के घर के बाहर की गई गुंडागर्दी की निंदा की। उन्होने कहा कि इस दौरान घर की खिलाडिय़ों के शीशे भी तोड़ दिए गए, जो सत्ताधारी पार्टी के अपराधिक चरित्र को दर्शाता है। बाद में भूख हड़ताल पर बैठे पार्टी वर्करों को संबोधित करते हुए बाजवा ने कहा कि नशों के खिलाफ आंदोलन चलाने के पीछे कांग्रेस की कोई सियासी सोच नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग से संबंधित युवा नशों का शिकार हो रहे हैं।