इनेलो विधायक दल के उपनेता एवं पूर्व मंत्री जसविंद्र सिंह संधू ने कुवि पैंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के शिष्टमंडल को आश्वासन दिया कि वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीएड व इंजीनियरिंग कालेजों को निकालकर प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालयों से संबद्ध करने का मामला विधानसभा में उठाएंगे और किसी भी कीमत पर कुरुक्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार नहीं होने दिया जाएगा। एसोसिएशन के प्रधान मदनगोपाल शर्मा के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने संघू को ज्ञापन सौंपकर बताया कि हरियाणा सरकार ने कुवि के बीएड कालेजों को चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के अधीन कर दिया था और अब सभी इंजीनियरिंग कालेजों को भी कुवि से छीनकर दीनबंधु छोटूराम विश्वविद्यालय मुरथल से संबद्ध करने का फैसला लिया है। इससे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को लगभग 25 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का घाटा होगा। शिष्टमंडल ने कहा कि ऐसा लगता है कि हरियाणा सरकार कुवि को बंद करने पर तुली हुई है। शिष्टमंडल ने यह भी बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने बी फार्मेसी कोर्स को कुवि से छीनकर पंडित भगवददयाल मेडिकल विश्वविद्यालय रोहतक को दे दिया था और अब भाजपा सरकार भी इसी नीति पर चल रही है। शिष्टमंडल ने संधू के साथ साथ इनेलो प्रदेशाध्यक्ष को भी ज्ञापन सौंपकर कुवि का अस्तित्व बचाने की मांग की। शिष्टमंडल में मुरारी लाल शर्मा, जेके जैन, राजरिखी, होशियार सिंह, एडी चावला, यशपाल, पृथ्वी सिंह, भीम मोहन, रामस्वरूप सहित अनेक पूर्व कर्मचारी नेता शामिल थे।
इनेलो नेता जसविंदर संधू तथा अशोक अरोड़ा ने शिष्टमंडल को आश्वासन दिया कि यह मुद्दा हरियाणा विधानसभा में उठाने के साथ साथ इनेलो विधानसभा से बाहर भी सडक़ों पर उतर कर कुवि का अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष करेगी। इनेलो नेताओं ने कहा कि सरकार के इस फैसले से यहां के छात्रों को अपने छोटे छोटे कामों के लिए जींद और मुरथल जाना पड़ेगा और जिन विद्यार्थियों ने कुवि से डिग्री प्राप्त करने के लिए दाखिला लिया था, उन्हें अब नई यूनिवर्सिटियों की डिग्री मिलेगी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सभी पुरानी यूनिवर्सिटीज की जननी है। दोनों नेताओं ने शिष्टमंडल को आश्वासन दिया कि इस मामले को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह कुरुक्षेत्र की जनता के साथ सरासर अन्याय है। प्रदेश में जो भी यूनिवर्सिटीज बनी हुई हैं, वे पहले सभी कुवि का रीजनल सेंटर होती थी। हरियाणा सरकार के इस कदम से इन विश्वविद्यालयों की जननी कुवि का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, लेकिन इनेलो किसी भी कीमत पर यह सब नहीं होने देगी। शिष्टमंडल ने दोनों नेताओं को बताया कि दो साल से कुवि को पूर्व सरकार की तरह बहुत कम ही ग्रांट दी गई है। कर्मचारियों का वेतन और पेंशन भी विश्वविद्यालय अपने संसाधनों से दे रहा है। 1995 से पहले कुवि को 88 प्रतिशत अनुदान राशि मिलती थी, लेकिन अब 28 प्रतिशत ही मिल रही है। इससे तो कर्मचारियों का वेतन भी पूरा नहीं होता, पेंशन देना तो दूर की बात है। दूसरी ओर हरियाणा के एडिड कालेजों को सरकार द्वारा 95 प्रतिशत अनुदान राशि दी जा रही है।
शिष्टमंडल ने इनेलो नेताओं को सौंपे ज्ञापन में कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार से उम्मीद थी कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आर्थिक संकट को दूर किया जाएगा और इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाएगा, लेकिन भाजपा सरकार तो इस विश्वविद्यालय का अस्तित्व खत्म करने पर तुली हुई है। ज्ञापन में कहा गया कि वे अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिल चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। ज्ञापन में कहा गया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पहले ही 70 करोड़ रुपये सालाना घाटे में चल रहा है और अब बीएड व इंजीनियरिंग कालेजों के निकाले जाने से यह घाटा बढक़र लगभग 95 करोड़ रुपये हो जाएगा। कर्मचारियों के छठे वेतन आयोग का एरियर लगभग 117 करोड़ रुपये आज तक नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के कारण ही कुवि ने आउटसोर्सिंग के अंतर्गत सेवारत कर्मचारियों की संख्या 1400 से घटाकर 800 कर दी थी, जिस कारण 600 कर्मचारी सडक़ों पर धक्के खा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं। ज्ञापन में मांग की गई कि कुवि के आर्थिक संकट को दूर किया जाए। शिक्षकों, कर्मचारियों व पेंशनर्स की सेलरी व पेंशन का पूरा भुगतान हरियाणा सरकार वहन करे, कुवि की स्वायत्ता बहाल की जाए, शिक्षकों व गैर शिक्षकों के खाली पद भरे जाएं ताकि विद्यार्थियों की शिक्षा, परीक्षा और परिणाम समय पर निकल सके, कुवि को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाए तथा उसका जो ए गे्रड पहले विश्वविद्यालय को दिया हुआ था, उसे फिर दोबारा ए गे्रड दिया जाए।