प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सिखों के सर्वाधिक पवित्र धर्मस्थल हरमिंदर साहिब में सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच मत्था टेका और प्रार्थना की। इसे स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। स्वर्ण मंदिर के बाद मोदी जलियांवाला बाग पहुंचे, जहां पर उन्होंने 13 अप्रैल 1919 को ब्रिटिश सेना द्वारा मारे गए सैकड़ों निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पिछले साल मई में प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वर्ण मंदिर का मोदी का यह पहला दौरा है।जिस समय मोदी गुरुद्वारा पहुंचे उस समय वहां सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे। हालांकि मोदी के वहां पहुंचने के दौरान भी श्रद्धालुओं को प्रवेश से रोका नहीं गया। लोगों को वहां पर मोदी की झलक पाने के कोशिश करते हुए देखा जा सकता था। जिस दौरान मोदी पवित्र सरोवर की परिक्रमा कर रहे थे उस समय कई श्रद्धालु मोदी के पीछे-पीछे चल रहे थे। इस दौरान कई लोगों को मोदी का वीडियो बनाते और उनकी तस्वीर लेते देखा गया।वहां पर मौजूद लोगों ने मोदी की ओर हाथ हिलाया जिसके प्रतिउत्तर में प्रधानमंत्री मोदी ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया।
मोदी शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फिरोजपुर जिला स्थित हुसैनीवाला स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद स्वर्ण मंदिर पहुंचे।लाल धारी वाले कपड़े से सर ढंके मोदी ने दर्शनी देवरी से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश किया और हाथ जोड़कर पवित्र सरोवर की परिक्रमा की। इस दौरान उनके साथ पंजाब के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और विजय सांपला भी थे। गर्भगृह के भीतर मोदी ने सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेका। वह गर्भगृह में कुछ मिनटों के लिए रुके भी। गुरुद्वारा के ग्रंथी (पुजारी) ने उन्हें सिरोपा (सम्मान में दी गई पोशाक) उपहार स्वरूप भेंट किया। विशेष सुरक्षा दल (एसपीजी) के जवानों, सादी वर्दी में मौजूद पंजाब पुलिस के जवानों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के कार्यकर्ताओं के सुरक्षा घेरे में मोदी गुरुद्वारा से बाहर आए। प्रधानमंत्री ने हरमिंदर साहिब में तकरीबन 40 मिनट का समय बिताया। गुरुद्वारा परिसर से निकलने से पहले मोदी ने एसजीपीसी के पदाधिकारियों से मुलाकात की जिन्होंने सिख धर्म से संबंधित विभिन्न मांगों को लेकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।इसके बाद प्रधानमंत्री जलियांबाला बाग परिसर पहुंचे और वहां पर देश की आजादी की लड़ाई के दौरान अपनी जान कुर्बान करने वालों को श्रद्धांजिल अर्पित की। इसके बाद मोदी हिंदुओं के प्रसिद्ध दुर्गियाना मंदिर गए। वहां पर उन्होंने प्रार्थना की और फिर नई दिल्ली के लिए रवाना हुए।