प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि 64 साल के योजना आयोग ने अपनी उपयोगिता खो दी है, इसलिए इसके स्थान पर जल्द नए संस्थान का गठन किया जाएगा। देश के 68वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, "बहुत जल्द हम एक नए संस्थान का गठन करेंगे जो योजना आयोग की जगह काम करेगा।"मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए योजना आयोग के सामने आर्थिक मदद के लिए दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे की महत्ता बढ़ रही है और इस संस्था को इस वास्तविकता पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह अच्छी बात है कि हम इसे मजबूत कर रहे हैं। योजना आयोग के गठन के बाद से युग बदल चुका है।"भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने योजना आयोग के अंतर्गत पंचवर्षीय योजना की शुरुआत की थी।
भारत सरकार के प्रस्ताव के तहत 15 मार्च 1950 को गठित आयोग ने 1951 से पंचवर्षीय योजना की शुरुआत की थी। मौजूदा समय में 2012-17 समयावधि के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना प्रभावी है। नेहरू इसके पहले अध्यक्ष और गुलजारी लाल नंदा उपाध्यक्ष थे। वी.टी.कृष्णामचारी, चिंतामन देशमुख, जी.एल.मेहता और आर.के.पाटिल इसके सदस्य थे। अधिकारियों के अनुसार, मोदी के मन में आयोग के लिए कभी ज्यादा सम्मान नहीं रहा और वह इसे नियंत्रित अर्थव्यवस्था का अवशेष मानते हैं, जिसका अनुकरण भारत सोवियत काल से कर रहा है। हाल ही में योजना आयोग को लेकर जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार, "यह साफ है कि योजना आयोग का मौजूदा रूप और इसकी कार्य प्रणाली अड़चनें पैदा कर रही है और देश के विकास में योगदान नहीं दे रही।"इस रिपोर्ट ने काफी विवाद पैदा किया था। इसके मुताबिक, "इतने व्यापक संस्था में सुधार आसान नहीं। इसके लिए इसे किसी अन्य संस्था के रूप में बदलने की जरूरत है, ताकि यह राज्यों को सलाह, दीर्घ अवधि के विचार दे सके।"संयोगवश यह रिपोर्ट मोदी के शपथ ग्रहण करने के तीन दिन बाद 29 मई को पेश की गई थी।