मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला मणिपुर से सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपी) हटाने में मदद के लिए भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना चाहती हैं। यह जानकारी उनके एक वकील ने दी। शर्मिला 13 वर्षो से अनशन कर रही हैं। वकील खैदम मणि ने आईएएनएस से कहा, "शर्मिला ने मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में एएफएसपीए के लागू होने से लोगों को हो रही दिक्कतों पर प्रकाश डालने के लिए भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा जाहिर की है।"उन्होंने कहा, "हम प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगेंगे। हमें उम्मीद है कि वह शर्मिला का पक्ष सुनने के लिए थोड़ा वक्त निकालेंगे। शर्मिला इस बात को लेकर आशावादी हैं कि नई सरकार उनकी बात सुनेगी और मणिपुर से एएफएसपीए हटाएगी।"'मणिपुर की लौह महिला' के नाम से चर्चित शर्मिला एएफएसपीए को हटाने की मांग को लेकर दो नवंबर, 2000 से अनिश्चिकालीन अनशन कर रही हैं। यह कदम उन्होंने उनके घर के नजदीक एक बस स्टॉप पर 10 लोगों की हत्या हो जाने के बाद उठाया था।एएफएसपीए 1990 में लागू हुआ था, जिसके तहत जम्मू एवं कश्मीर व मणिपुर में सेना को विशेष शक्तियां दी गई थीं। दोनों राज्यों को आतंकवाद व उग्रवाद की वजह से समस्याग्रस्त घोषित किया गया था। शर्मिला 27 मई को दिल्ली आएंगी और अगले दिन महानगर दंडाधिकारी के सामने पेश होंगी। उनके साथ एक चिकित्सक, दो नर्स, महिला पुलिस की एक टीम और दो जेल अधिकारी मौजूद रहेंगे।इरोम शर्मिला राज्य के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह की तरफ से कांग्रेस में शामिल होने के आए प्रस्ताव को ठुकरा चुकी हैं। दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के 13 दिनों के अनशन और उस दौरान देशव्यापी आंदोलन से वह बेहद प्रभावित हुई थीं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे अन्ना ने हालांकि अपने सहयोगी अरविंद केजरीवाल से तब दूरी बना ली जब उन्होंने भ्रष्टाचार के लिए कांग्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी जिम्मेदार ठहराया और दोनों पार्टियों को 'एक जैसी' बताने लगे।इरोम शर्मिला ने केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) को समर्थन देने के संकेत दिए हैं। इंफाल स्थित ह्युमन राइट्स एलर्ट को हालांकि केंद्र में आने वाली नई सरकार पर भरोसा नहीं है। इसके प्रबंध निदेशक बबलू लोइटांगबम ने आईएएनएस से कहा, "हमें नहीं लगता कि मोदी सरकार एएफएसपीए को हटाएगी, क्योंकि इसने मणिपुर में चुनाव प्रचार के दौरान कभी भी इस विवादित अधिनियम को हटाने की बात नहीं की।"