हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है; यह सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है। 6 जुलाई 2026 (सोमवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि दोपहर 1:47 बजे तक है; इसके बाद सप्तमी तिथि लग जाएगी।
इस दिन भगवान शिव की पूजा करना लाभकारी होगा। अगर कोई सोमवार का व्रत है तो उसको "ओम नमः शिवाय" के मंत्र का जाप करना चाहिए। सोमवार को अमृत काल सुबह 7:16 बजे पर शुरू होकर 8:56 बजे तक रहेगा। जबकि सुबह 4:14 बजे से 5:02 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इस दिन सुबह 5:50 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा।
वहीं, रात 10:24 बजे चन्द्रोदय और दोपहर 12:02 बजे चन्द्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 6 जुलाई 2026 को सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे। इस दिन सूर्य आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर इस नक्षत्र में गोचर करेंगे। जबकि चंद्रमा दोपहर 4:07 बजे तक पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। वहीं, 6 जुलाई 2026 (सोमवार) को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा।
पंचांग के अनुसार, इस दिन सौभाग्य योग और प्रीति योग प्रभावी रहेगा। सोमवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है।
वहीं, राहुकाल सुबह 07:13 से 08:57 तक रहेगा, गुलिक काल दोपहर 2:11 बजे से लेकर 3:55 बजे तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 10:50 से 12:31 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है। वहीं, 6 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि और चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा।
6 जुलाई 2026 (सोमवार) को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना आवश्यक भी है, तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए।