Monday, 06 July 2026

 

 

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जगत प्रकाश नड्डा ने सीसीएचएफडब्‍ल्‍यू की 16वीं बैठक में एसएसबीएसके का शुभारंभ किया

जिसका उद्देश्य बाल स्वास्थ्य और बाल्‍यावस्‍था के शुरूआती वर्षों को मजबूत करना है

Jagat Prakash Nadda, JP Nadda, BJP, Bharatiya Janata Party, Prataprao Jadhav, Anupriya Patel, Manik Saha, New Delhi
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नई दिल्ली , 29 Jun 2026

Last updated on: Jun 30, 2026, 12:33 IST

देशभर में नवजात शिशुओं एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) का शुभारंभ किया। यह एकीकृत राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रत्येक जन्म से लेकर 36 माह (3 वर्ष) तक के बच्‍चों की घर पर और समुदाय-आधारित देखभाल की निर्बाध निरंतरता प्रदान करता है।

यह कार्यक्रम "पहले तीन साल सम्पूर्ण देखभाल" की कल्पना को साकार करता है, जिसके तहत घर पर नवजात शिशु की देखभाल (एचबीएनसी) और घर पर छोटे बच्‍चों की देखभाल (एचबीवाईसी) कार्यक्रमों को जोड़कर एक समग्र ढाँचा तैयार किया गया है। यह पहल नवजात शिशु के पहले 28 दिन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जबकि बच्चे के पहले तीन वर्ष मस्तिष्क के सर्वोत्‍तम विकास के लिए महत्‍वपूर्ण हैं।

इस एकीकृत दृष्टिकोण का मुख्य उद्देश्य बच्चों की जीवन रक्षा, पोषण, और शुरुआती विकास पर ध्यान देना है। एसएसबीएसके की एक प्रमुख विशेषता जोखिम-आधारित दृष्टिकोण है, जिसके तहत उन नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की पहचान की जाती है जिन्हें “जोखिम” वाला माना जाता है। इनमें जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म, स्तनपान में देरी, नवजात देखभाल इकाइयों से छुट्टी, कुपोषण, बार-बार बीमारी या विकास संबंधी देरी जैसी स्थितियाँ शामिल हैं।

ऐसे बच्चों को उनके जोखिम स्तर के अनुसार घर के अतिरिक्त भ्रमण के माध्यम से गहन निगरानी और देखभाल प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत: “जोखिम” वाले नवजात शिशुओं को जीवन के पहले 42 दिनों में घर के अधिकतम 9 भ्रमण प्राप्त होंगे। “जोखिम” वाले बच्चों को 36 महीने की आयु तक घर के अधिकतम 8 भ्रमण प्रदान किए जाएंगे।

यह कार्यक्रम मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा), सहायक नर्स मिडवाइव्स (एएनएम), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यू) द्वारा समन्वित गृह-भ्रमण के माध्यम से देखभाल की निरंतरता को और मजबूत करता है। इसके अंतर्गत एएनएम और सीएचओ द्वारा संयुक्त गृह-भ्रमण को शामिल किया गया है, जो ‘जोखिमग्रस्त’ नवजात शिशुओं के लिए तीसरे और सातवें दिन, तथा ‘जोखिमग्रस्त’ बच्चों के लिए तीसरे और छठे माह में किए जाएंगे।

ये समन्वित प्रयास समय पर मूल्यांकन, परामर्श तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए अन्‍य स्‍थान पर भेजने के लिए तैयार किए गए हैं। कमज़ोर बच्चों की शीघ्र पहचान और प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए एसएसबीएसके के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर वेल-बेबी सत्र तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मासिक शिशु शिविर शुरुआत की गई है।

ये मंच समुदाय स्तर पर नियमित स्क्रीनिंग, विकास संबंधी आकलन तथा नवजात एवं छोटे बच्चों के समग्र प्रबंधन को सक्षम बनाएंगे। मातृ एवं शिशु कल्याण के बीच गहरे परस्पर संबंध को स्वीकार करते हुए, एसएसबीएसके के अंतर्गत प्रसव के बाद मातृ मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को सामुदायिक देखभाल का एक अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।

आशा प्रारंभिक स्क्रीनिंग करेंगी और आवश्यकता पड़ने पर आगे के मूल्यांकन एवं सहायता के लिए समय पर अन्‍य स्‍थान पर भेजना सुनिश्चित करेंगी। यह कार्यक्रम बाल्यावस्था के प्रारंभिक विकास के लिए पोषण देखभाल (ईसीडी) को भी मुख्यधारा में शामिल करता है, जिसके अंतर्गत घर के प्रत्‍येक भ्रमण और सामुदायिक संपर्क के दौरान संवेदनशील देखभाल, प्रारंभिक शिक्षण अवसर, आयु-उपयुक्त खेल, बाल सुरक्षा तथा परिवार की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।

कार्यक्रम सेवा वितरण, निगरानी और देखभाल की निरंतरता को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग की परिकल्पना करता है। निर्णय-सहायता प्रणाली (डीएसएस), चाइल्‍ड-वाइज डिजिटल ट्रैकिंग, आवश्‍यकता पड़ने पर सहायता के लिए अन्‍य स्‍थान पर भेजने का तंत्र तथा अलर्ट सिस्टम ‘जोखिम’ वाले नवजात शिशुओं और बच्चों के फॉलो-अप और केस प्रबंधन को सुदृढ़ करेंगे।

ये डिजिटल प्रणालियाँ राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्मों के साथ जोड़ी जाएंगी, जिनमें जननी पोर्टल, यू-विन पोर्टल, एमपीसीडीएसआर पोर्टल, आरबीएसके 2.0 पोर्टल तथा पोषण ट्रैकर शामिल हैं। इनके माध्यम से आभा और बाल-आभा आईडी के जरिए निर्बाध डेटा आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह कार्यक्रम शहरी क्षेत्रों में, विशेषकर झुग्गी बस्तियों, प्रवासी बस्तियों और अन्य वंचित समुदायों में रहने वाले बच्चों के लिए घर पर देखभाल को सुदृढ़ करने हेतु विशेष रणनीतियाँ भी शामिल करता है।

ये दिशानिर्देश डिजिटल युग से उत्पन्न नई चुनौतियों का भी समाधान करते हैं, जिनमें प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान अत्यधिक स्क्रीन उपयोग तथा शारीरिक संपर्क में कमी को मस्तिष्क विकास, भावनात्मक कल्याण और सामाजिक कौशल के लिए संभावित जोखिम के रूप में पहचाना गया है। इसके अनुसार, एसएसबीएसके जीवन के पहले तीन वर्षों में आयु-उपयुक्त खेल, शारीरिक गतिविधि और मानसिक उत्तेजना को बढ़ावा देता है, ताकि बच्चों के संज्ञानात्मक, शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को समग्र रूप से समर्थन मिल सके।

समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) का शुभारंभ सरकार के उस प्रयास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य मातृ, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर श्रृंखला को एक पोषणकारी, समावेशी और डिजिटल रूप से सक्षम दृष्टिकोण के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

 

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