Monday, 06 July 2026

 

 

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जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद के 16वें सम्मेलन की अध्यक्षता की

स्वास्थ्य, विकसित भारत 2047 का आधार है, भारत के स्वास्थ्य के क्षेत्र की सफलता की कहानी में राज्य समान भागीदार हैं : जे.पी. नड्डा

Jagat Prakash Nadda, JP Nadda, BJP, Bharatiya Janata Party, Prataprao Jadhav, Anupriya Patel, Manik Saha, New Delhi
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नई दिल्ली , 29 Jun 2026

Last updated on: Jun 30, 2026, 12:27 IST

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में आज केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) का 16वां सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करने, उभरती जन  स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने और देश भर में स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति में सुधार के लिए केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

यह सम्‍मेलन केंद्र और राज्यों के लिए स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी नई चुनौतियों पर चर्चा करने, प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करने और पूरे देश में किफायती, समान और अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने का रोडमैप तैयार करने का एक महत्‍वपूर्ण मंच साबित हुआ। 

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने सम्‍मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, देश ने 2047 तक 'विकसित भारत' बनने का लक्ष्य रखा है, जब देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष होंगे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्वस्थ भारत के बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता और स्वास्थ्य सेवा राष्ट्रीय विकास के सबसे महत्‍वपूर्ण स्तंभों में से एक है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पिछले बारह वर्षों में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने देश के स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण में एक आदर्श बदलाव किया है, जिसमें मुख्य रूप से उपचारात्मक देखभाल से ध्यान हटाकर समग्र, समावेशी और व्यापक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें बीमारी से बचाव, स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, इलाज, दर्द कम करने और मरीज के ठीक होने में मदद करने जैसी सभी तरह की देखभाल शामिल हैं।

श्री नड्डा ने कहा कि लगभग 1.5 बिलियन लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए, सरकार ने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के आधार को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने बताया कि देश भर में लगभग 1.85 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं, जो नागरिकों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्राप्‍त करने का पहला जरिया हैं, जो प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल के बीच एक मज़बूत कड़ी का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि 23 नए एम्स और 157 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के माध्यम से तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे को काफी मजबूत किया गया है, जिससे विशेष रूप से महत्वाकांक्षी और वंचित जिलों को लाभ हो रहा है। श्री नड्डा ने स्वास्थ्य को राज्य का विषय बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रत्‍येक उपलब्धि समान रूप से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है।

जहां केंद्र सरकार नीतिगत मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और वित्तीय मदद प्रदान करती है, वहीं इनका सफल कार्यान्वयन राज्यों की प्रतिबद्धता और उनके सक्रिय प्रयासों पर निर्भर करता है। उन्होंने देश भर में स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बधाई दी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में भारत की प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 2014 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 130 से घटकर 87 हो गई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु दर अनुमान रिपोर्ट 2024 का हवाला देते हुए कहा कि भारत में मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 48 प्रतिशत रही है, उन्होंने भारत जैसे बड़े देश के लिए इसे उल्‍लेखनीय उपलब्धि बताया।

उन्होंने बताया कि 1990 के बाद से भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत की कमी आई है,जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 61 प्रतिशत थी, नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक स्तर पर 54 प्रतिशत की कमी से काफी अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की कुल प्रजनन दर 2.0 तक पहुंच गई है और औसत आयु बढ़कर 70.3 साल हो गई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य में लगातार हो रहे सुधार को दर्शाता है।

श्री नड्डा ने 'मिशन इंद्रधनुष' की उपलब्धियों के बारे में भी बताया, जिसके तहत नियमित टीकाकरण से छूट गए 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया है। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि इस वर्ष 28 फरवरी को शुरू हुए देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 50 लाख से अधिक किशोरियों का टीकाकरण किया जा चुका है और उन्‍होंने इस उपलब्धि को हासिल करने में राज्यों के सक्रिय सहयोग की सराहना की।

श्री नड्डा संक्रामक रोगों की रोकथाम के बारे में बताते हुए कहा कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यू एचओ) की  वैश्विक तपेदिक (टीबी) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 12 प्रतिशत रही है। इसके साथ ही, इलाज का कवरेज 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो 78 प्रतिशत के वैश्विक औसत से काफी अधिक है।

उन्होंने बताया कि भारत ने नवजात शिशुओं में होने वाले टेटनस को खत्म कर दिया है, पोलियो-मुक्त दर्जा हासिल किया है, काला-अजार को समाप्‍त करने की दिशा में काफी प्रगति की है और ट्रेकोमा अब सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय नहीं रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन ज़िलों में कुष्ठ रोग का फैलाव प्रति 10,000 आबादी पर एक मामले से कम है, उनकी संख्या 542 से बढ़कर 654 हो गई है।

इसके अलावा, देश ने मलेरिया के मामलों में 81 प्रतिशत और मलेरिया से होने वाली मौतों में 80 प्रतिशत की कमी हासिल की है, साथ ही लिम्फैटिक फाइलेरियासिस के लिए सार्वजनिक रूप से दवाई देने की ज़रूरत वाली आबादी में 39 प्रतिशत की कमी आई है। निवारक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व पर जोर देते हुए, श्री नड्डा ने बताया कि 2018 से, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने उच्च रक्तचाप और मधुमेह के लिए प्रत्येक में 42 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की है, जिससे 7.3 करोड़ उच्च रक्तचाप और 5 करोड़ मधुमेह के मामलों का निदान हुआ है।

उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग में 35 करोड़ लोगों को मुख कैंसर, 16 करोड़ महिलाओं को स्तन कैंसर और 9 करोड़ महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लिए भी शामिल किया गया है, जिससे शीघ्र निदान और समय पर उपचार संभव हो सके। उन्होंने आगे बताया कि राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के तहत 65,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को प्रमाणित किया गया है, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने औषधि विनियमन और खाद्य सुरक्षा में किए गए प्रमुख सुधारों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने 1,000 से अधिक दवा निर्माण इकाइयों को कवर करते हुए जोखिम-आधारित निरीक्षण को अपनाया है, जबकि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने व्यापार करने में बढ़ाने के लिए कई सुधार पेश किए हैं, जिसमें तत्काल लाइसेंसिंग, सड़क विक्रेताओं के लिए मानित पंजीकरण, लाइसेंसिंग सीमा का संशोधन और स्थायी लाइसेंस वैधता शामिल है, जिससे देश भर में लाखों खाद्य व्यवसाय संचालकों को लाभ हो रहा है।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों की सराहना की और उनसे आग्रह किया कि वे स्वस्थ, मजबूत और अधिक समृद्ध भारत के निर्माण के लिए साझेदारी और प्रतिबद्धता की उसी भावना के साथ काम करना जारी रखें।  उन्‍होंने फिर कहा कि देश के स्वास्थ्य सुधारों की सफलता केंद्र और राज्यों दोनों के सामूहिक प्रयासों पर निर्भर करती है।

इस अवसर पर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश भर में स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक नीतिगत दस्तावेजों और कार्यक्रम पहलों का शुभारंभ किया। शुरू की गई प्रमुख पहलों में राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवाओं (एनएएस), 2026 पर परिचालन दिशानिर्देश शामिल थे, जो एक व्यापक ढांचा है। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आपातकालीन चिकित्सा परिवहन सेवाओं के लिए समान राष्ट्रीय मानक स्थापित किए गए हैं।

दिशानिर्देश एम्बुलेंस बुनियादी ढांचे, स्टाफिंग, उपकरण, कार्रवाई प्रोटोकॉल, डिजिटल एकीकरण और गुणवत्ता आश्वासन तंत्र को मानकीकृत करके अस्‍पताल से पहले आपातकालीन देखभाल की गुणवत्ता, पहुंच और दक्षता को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। श्री नड्डा ने एसयूएमएन रोडमैप 2030 भी जारी किया, जो देश भर में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया एक व्यापक रणनीतिक ढांचा है।

रोडमैप में सेवा गुणवत्ता में सुधार, सम्मानजनक प्रसूति देखभाल सुनिश्चित करने, टाली जाने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को कम करने और मातृ एवं बाल स्वास्थ्य से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति में तेजी लाने के लक्षित उपायों की रूपरेखा दी गई है। सम्मेलन में एक एकीकृत कार्यक्रम - समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) का शुभारंभ भी हुआ।

यह एक ऐसा कार्यक्रम है जो 'होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर' (एचबीएनएस) और 'होम-बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड' (एचबीवाईसी) को मिलाकर देखभाल की एक निरंतर प्रक्रिया तैयार करता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य जन्म से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए समुदाय आधारित स्‍वस्‍थ्‍य देखभाल को मज़बूत करना है। इसके लिए नियमित रूप से घर जाकर जांच करना, बीमारियों की शुरुआती पहचान करना, पोषण और बच्चों के विकास के बारे में सलाह देना और ज़रूरत पड़ने पर समय पर रेफरल की सुविधा देना शामिल है।

सम्मेलन के दौरान शुरू की गई एक और प्रमुख पहल एनीमिया मुक्त भारत अभियान थी, जो एनीमिया को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर खत्म करने की भारत की कोशिशों का अगला चरण है। 'एनीमिया मुक्त भारत' कर्यक्रम की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए, इस नए रूप वाले अभियान का दायरा बढ़ाया गया है।

इसमें सभी लाभार्थियों के लिए सैचुरेशन-बेस्ड स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग, केस-बेस्ड मैनेजमेंट, बेहतर पोषण उपाय और खान-पान में विविधता व व्यवहार में बदलाव लाने वाले कम्युनिकेशन पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है। सम्मेलन का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों, बेहतर सेवा आपूर्ति और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सुधारों के माध्यम से स्वस्थ भारत के विजन को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने के एक नए संकल्प के साथ हुआ।

बैठक के दौरान त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक, केंद्रीय राज्य मंत्री स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और आयुष श्री प्रतापराव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री स्वास्थ्य और परिवार कल्याण श्रीमती अनुप्रिया पटेल, विभिन्न राज्यों के राज्य स्वास्थ्य मंत्री, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास, संसद सदस्य और सीसीएफएचडब्ल्यू के सदस्य श्री राजीव भट्टाचार्य, सचिव (स्वास्थ्य) श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव, एनएचएम की एएस और एमडी श्रीमती आराधना पटनायक और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राज्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।

 

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