Wednesday, 22 July 2026

 

 

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सी.आर. पाटिल ने गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र बोर्ड के उच्चाधिकार प्राप्त समीक्षा बोर्ड की 14वीं बैठक की अध्यक्षता की

राज्यों में सतत जल शासन और सुधार पहलों को मजबूत करने के लिए राज्य जल सुधार ढांचे की शुरुआत

CR Paatil, Chandrakant Raghunath Paatil, BJP, Bharatiya Janata Party, Sarbananda Sonowal, Guwahati, High Powered Review Board, HPRB
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Armaan

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गुवाहाटी , 19 May 2026

Last updated on: May 19, 2026, 18:13 IST

ब्रह्मपुत्र बोर्ड के उच्चाधिकार प्राप्त समीक्षा बोर्ड की 14वीं बैठक 19 मई, 2026 को गुवाहाटी में जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, अन्य मंत्रियों, भारत सरकार और उत्तर पूर्वी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और हितधारकों ने नदी बेसिन प्रबंधन पहलों की प्रगति की समीक्षा करने और ब्रह्मपुत्र बोर्ड के भविष्य की रूपरेखा के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए बैठक में भाग लिया।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने इस अवसर पर, राज्य जल सुधार ढांचे की भी शुरुआत की। यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जल शासन सुधारों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहल है। जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बैठक में कहा कि जल सुरक्षा भारत के विकास पथ का केंद्रबिंदु है और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक प्रमुख स्तंभ है।

उन्होंने कहा कि सतत जल प्रबंधन के लिए न केवल बुनियादी ढांचा बल्कि सुदृढ़ शासन प्रणाली, ठोस नीतियां, मजबूत संस्थाएं, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी भी आवश्यक है। एचपीआरबी की बैठक में ब्रह्मपुत्र बोर्ड द्वारा नदी बेसिन प्रबंधन, मास्टरप्लान तैयार करने और अद्यतन करने, बाढ़ और कटाव प्रबंधन, जलसंभर पुनर्जीवन, डिजिटल परिवर्तन, क्षमता निर्माण और संस्थागत सुधारों के क्षेत्रों में की गई प्रगति की समीक्षा की गई।

एचपीआरबी ने पिछले दो वर्षों में एकीकृत नदी बेसिन योजना को मजबूत करने और पूर्वोत्तर क्षेत्र और पश्चिम बंगाल में तकनीकी सहायता गतिविधियों का विस्तार करने में बोर्ड की महत्वपूर्ण प्रगति की सराहना की। बैठक के दौरान, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, लिडार और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके नदी बेसिन मास्टरप्लान तैयार करने और अद्यतन करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

बोर्ड ने बताया कि ब्रह्मपुत्र और बराक बेसिनों को कवर करने वाले मास्टरप्लान तैयार करने और उनका अद्यतन करने के लिए कुल 76 नदी बेसिन और उप-बेसिनों की पहचान की गई है। एचपीआरबी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न राज्यों में बाढ़ प्रबंधन, कटाव रोधी कार्यों, जल निकासी विकास, जलस्रोत प्रबंधन और जल संरक्षण पहलों से संबंधित चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं की भी समीक्षा की।

संबंधित राज्य सरकारों के समन्वय से असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड और त्रिपुरा में किए जा रहे प्रमुख कार्यों पर भी चर्चा की गई। बैठक में ब्रह्मपुत्र बोर्ड को एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित और ज्ञान-आधारित नदी बेसिन संगठन (आरबीओ) में रूपांतरित करने पर विचार-विमर्श किया गया। इस संबंध में, संगठनात्मक पुनर्गठन, विशेष तकनीकी इकाइयों को सुदृढ़ करने, डिजिटल शासन संबंधी पहलों और दक्षता, पारदर्शिता और समन्वय में सुधार के लिए संस्थागत सुधारों पर नीतिगत और रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

एचपीआरबी ने उत्तर पूर्वी जल विज्ञान एवं संबद्ध अनुसंधान संस्थान (एनईएचएआरआई) के प्रस्तावित पुनरुद्धार योजना की भी समीक्षा की, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में अनुसंधान, जल विज्ञान संबंधी अध्ययन, तकनीकी परामर्श और क्षमता निर्माण गतिविधियों को सुदृढ़ करना है। गुवाहाटी के बसिष्ठ स्थित ब्रह्मपुत्र बोर्ड कार्यालय परिसर के भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक संस्थागत परिसर में पुनर्विकास करने के संबंध में भी चर्चा हुई।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत, उत्तर पूर्वी भारत की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों पर आधारित निम्नलिखित पुस्तकों और वृत्तचित्रों का आधिकारिक रूप से विमोचन किया गया :

पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियां – संसाधन पुस्तिका

पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियां – चित्र पुस्तिका

धान-सह-मत्स्य पालन (अरुणाचल प्रदेश) – वृत्तचित्र

· डोंग प्रणाली (असम) – वृत्तचित्र

· बांस से ड्रिप सिंचाई (मेघालय) – वृत्तचित्र

. वर्षाजल संचयन (मिजोरम) – वृत्तचित्र

एचपीआरबी ने क्षेत्र की स्वदेशी और टिकाऊ जल प्रबंधन प्रणालियों के दस्तावेजीकरण में ब्रह्मपुत्र बोर्ड के प्रयासों की सराहना की और आधुनिक नदी बेसिन प्रबंधन दृष्टिकोणों के साथ पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया।

राज्य जल सुधार ढांचे (एसडब्ल्यूआरएफ) के बारे में

कार्यक्रम के दौरान राज्य जल सुधार ढांचे की शुरुआत की गई। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा विकसित इस सुधार-उन्मुख शासन ढांचे का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रगतिशील जल क्षेत्र सुधारों को प्रोत्साहित करना और उन्हें मानक रूप में स्थापित करना है। सहकारी संघवाद की भावना को समाहित करते हुए, इस ढांचे को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार किया गया है, जिसमें जल को एक साझा राष्ट्रीय संसाधन के रूप में मान्यता दी गई है, जिसके लिए केंद्र और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सामूहिक स्वामित्व, सहयोगात्मक शासन और संयुक्त जवाबदेही की आवश्यकता है।

इस रूपरेखा में नीति एवं विनियमन, परियोजना निगरानी, ​​डिजिटलीकरण तथा अनुसंधान एवं विकास, अवसंरचना और सामुदायिक सहभागिता सहित पांच आयामों में 75 संकेतक शामिल हैं। इन आयामों में एक पारदर्शी, साक्ष्य-आधारित बेंचमार्किंग प्रणाली स्थापित करके, एसडब्ल्यूआरएफ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम विधियों से सीखने, अपने समकक्षों के मुकाबले अपने प्रदर्शन का आकलन करने और जल प्रशासन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाकर प्रतिस्पर्धी संघवाद की शक्ति का लाभ उठाता है।

राज्यों के बीच इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से सुधारों में तेजी आने, नवाचार को बढ़ावा मिलने और देश भर में जल प्रबंधन के समग्र स्तर में सुधार की उम्मीद है। इस रूपरेखा का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भूजल विनियमन, बाढ़क्षेत्र जोनिंग, अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, बांध सुरक्षा, सहभागी सिंचाई प्रबंधन, नदी बेसिन योजना, डेटा एकीकरण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मापनीय और सत्यापन योग्य सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसका लक्ष्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नीतिगत कमियों की पहचान करने, मापनीय सुधार करने और विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के अनुरूप लचीली, जवाबदेह और जल-सुरक्षित शासन प्रणाली के निर्माण के लिए सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में सहायता करना है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 31 दिसंबर, 2026 तक राज्य जल सुधार ढांचे के तहत प्रमुख सुधार करने और 31 जनवरी, 2027 तक संकेतकों पर प्रतिक्रिया देने की अग्रिम अवधि मिलती है।

अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करने, सतत नदी बेसिन प्रबंधन और उत्तर पूर्वी क्षेत्र तथा पश्चिम बंगाल के लिए दीर्घकालिक जल संसाधन योजना के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ इस बैठक का समापन हुआ।

 

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