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पंचायत से संसद तक: नारी नेतृत्व, डिजिटल सुशासन और विकसित भारत का संकल्प : प्रो. एस. पी. सिंह बघेल

Professor SP Singh Baghel, BJP, Bharatiya Janata Party
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चंडीगढ़ , 23 Apr 2026

Last updated on: Apr 24, 2026, 13:08 IST

जब कोई राष्ट्र अपनी जड़ों को सींचता है, तो उसकी शाखाएं आसमान छूती हैं। भारत की वे जड़ें उसकी पंचायतें हैं और उन पंचायतों की आत्मा आज उसकी महिलाएं हैं। 24 अप्रैल 1993 को 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से जब गांवों की सरकार को संवैधानिक मान्यता मिली, तो भारतीय लोकतंत्र ने एक नया अध्याय लिखा। 

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में पंचायती राज को नई ऊर्जा और दिशा मिली है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सत्ता केवल दिल्ली के गलियारों तक सीमित न रहे, बल्कि देश के अंतिम गांव की दहलीज़ तक पहुंचे।

'विकसित भारत 2047' का विजन 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों की मजबूत नींव पर आधारित है, जो देश की लगभग 64 प्रतिशत जनसंख्या की जीवनरेखा हैं।

लोकतंत्र की पाठशाला: नारी नेतृत्व का उदय

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2026 एक विशेष गौरव के साथ मनाया जा रहा है। नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री जी ने पंचायती राज संस्थाओं को देश में महिला नेतृत्व की सबसे बड़ी पाठशाला बताया – यह उस वास्तविकता की स्वीकृति थी जो आज ग्रामीण भारत में प्रतिदिन घटित हो रही है। देशभर में पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल संख्या 32 लाख से अधिक है। 

वर्तमान में उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, 24,41,781 निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 12,14,885 महिलाएँ हैं, जो कुल का लगभग 49.75 प्रतिशत हैं। 21 राज्यों तथा 2 केन्द्र शासित प्रदेशों ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत तक आरक्षण लागू किया है। 

पिछले चार वर्षों में संचयी रूप से 33.50 लाख महिला प्रतिनिधियों को नेतृत्व एवं सुशासन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है – और 2025-26 में ही 9.37 लाख महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 47.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

सशक्त पंचायत नेत्री अभियान और नारी शक्ति वंदन अधिनियम

‘सशक्त पंचायत नेत्री अभियान’ महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों, अधिकारों और नेतृत्व क्षमताओं के प्रति सजग और सक्षम बनाता है। ‘महिला-हितैषी ग्राम पंचायत’ और ‘निर्भय रहो’ जैसी पहलें महिलाओं को जमीनी लोकतंत्र में सुरक्षित और सशक्त भागीदारी के लिए प्रेरित कर रही हैं। 

‘निर्भय रहो’ निर्भया फंड के अंतर्गत संचालित है और यह कानूनी जागरूकता, सामाजिक संवेदनशीलता एवं तकनीकी सशक्तिकरण को एकीकृत करते हुए ग्रामीण शासन में महिलाओं और बालिकाओं के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम – लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करते हुए – भारतीय लोकतंत्र में उनकी भूमिका को स्थायी और सशक्त रूप से स्थापित करता है। पंचायतों की पाठशाला में तैयार महिला नेतृत्व ही विधानसभाओं और संसद में बदलाव की वाहक बनेगी।

सोलहवाँ वित्त आयोग: संसाधनों में अभूतपूर्व वृद्धि

वित्तीय सशक्तिकरण किसी भी संस्था की कार्यक्षमता की आत्मा होती है। 16वें वित्त आयोग ने 2026 से 2031 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4.35 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन किया है – जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 84 प्रतिशत अधिक है। 

वित्त वर्ष 2026-27 में ही 1.40 लाख करोड़ रुपये का अनुदान आवंटित है। यह वित्तीय सुदृढ़ता पंचायतों को केवल खर्च करने की क्षमता नहीं देती, बल्कि उन्हें विकास के एजेंडा को स्वयं निर्धारित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करती है। स्व-स्रोत राजस्व नीति और प्रदर्शन-आधारित अनुदान ने पंचायतों में जवाबदेही और प्रतिस्पर्धा – दोनों को एक साथ प्रोत्साहित किया है।

समावेशी और पारदर्शी शासन

‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मार्गदर्शक मंत्र पंचायती राज मंत्रालय के प्रत्येक कदम का आधार है। ई-ग्राम स्वराज मंच के माध्यम से देशभर की ग्राम पंचायतों ने 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऑनलाइन भुगतान संसाधित किए हैं। सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से एकीकृत यह मंच प्रत्येक लेनदेन को सीधे विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं तक वास्तविक समय में पहुंचाता है। 

2.5 लाख से अधिक पंचायतों और 1.6 करोड़ वेंडर्स का इससे जुड़ना डिजिटल सुशासन की व्यापक स्वीकृति का प्रमाण है। वर्ष 2025-26 में 2.5 लाख से अधिक पंचायतों ने सतत् विकास लक्ष्यों को 9 थीम्स में विभाजित कर अपनी विकास योजनाएँ स्वयं तैयार कीं – ग्रामीण विकास को लक्ष्य-उन्मुख और परिणाम-केंद्रित बनाते हुए।

पेसा रैंकिंग: अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासन की नई पहल

पंचायती राज मंत्रालय ने पहली बार 25 जनवरी 2026 को वर्ष 2024–25 के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) के अंतर्गत राज्यों के प्रदर्शन की राज्यवार रैंकिंग जारी की। इसका उद्देश्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करना तथा अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा आधारित स्वशासन को मजबूत करना है।

इस रैंकिंग में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश फ्रंट रनर श्रेणी में रहे; राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना परफॉर्मर श्रेणी में रखे गए हैं, जबकि आंध्र प्रदेश और गुजरात आकांक्षी श्रेणी में शामिल हैं। यह रैंकिंग दस पेसा राज्यों – आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना – की प्रगति, क्षमता और संभावनाओं को रेखांकित करती है। 

सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप, मंत्रालय पेसा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों के साथ निरंतर समन्वय और सहयोग कर रहा है।

सभासार और एआई-सक्षम शासन: जनभाषा में जनतंत्र की आवाज

पंचायती राज मंत्रालय ने कृत्रिम मेधा को शासन के केंद्र में लाकर एक नई क्रांति का सूत्रपात किया है। 14 अगस्त 2025 को लॉन्च 'सभासार' अब 23 भारतीय भाषाओं में ग्राम सभा की कार्यवाही दर्ज करता है। 1,11,486 ग्राम पंचायतें इसका उपयोग कर चुकी हैं – भाषा अब भागीदारी के मार्ग में बाधा नहीं। 

स्वामित्व योजना: संपत्ति अधिकारों से आर्थिक सशक्तिकरण

स्वामित्व योजना ने ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से 3.30 लाख गांवों में सर्वे पूरा कर 3.13 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार किए हैं। यह ग्रामीण परिवारों को बैंक ऋण और औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ रहा है, संपत्ति को आर्थिक संपदा में बदलने का अवसर दे रहा है, भूमि एवं संपत्ति से जुड़े विवादों को कम कर रहा है, और ग्राम पंचायतों के लिए एक स्थायी तथा पारदर्शी राजस्व स्रोत के रूप में उभर रहा है।

संस्थागत क्षमता निर्माण

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत 2022-23 से अब तक संचयी रूप से 1.62 करोड़ से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है – केवल 2025-26 में 45.24 लाख लोग प्रशिक्षित हुए। आईआईएम और आईआईटी के साथ साझेदारी में नेतृत्व विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 'मेरी पंचायत, मेरा अधिकार' अभियान के तहत 2.15 लाख पंचायतों ने 954 सेवाओं का सिटिजन चार्टर तैयार किया है।

विकसित भारत 2047: गांव से उठेगी नई सुबह

‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं – यह सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय संतुलन और समावेशी प्रगति का व्यापक दृष्टिकोण है। 21 राज्यों में 50 प्रतिशत महिला भागीदारी, 3 लाख करोड़ का डिजिटल लेनदेन, 23 भाषाओं में ग्राम सभा की आवाज, 16वें वित्त आयोग का ऐतिहासिक आवंटन और सशक्त पंचायत नेत्री अभियान – ये सब मिलकर विकसित भारत की नींव की ईंटें हैं। 

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के इस अवसर पर देश की उन 14 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधियों को सादर नमन, जो प्रतिदिन अपने गांव और देश को बेहतर बनाने में जुटी हैं। यही नारी शक्ति है, यही नव भारत की तैयारी है।

 

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