आगामी जनगणना कार्य से संबंधित तैयारियों एवं प्रमुख एजेंडा बिंदुओं की समीक्षा हेतु उपायुक्त, यूटी चंडीगढ़, श्री निशांत कुमार यादव की अध्यक्षता में सभी संबंधित हितधारकों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त ने जनगणना के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह देश की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है, जो साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण एवं योजना निर्माण की आधारशिला है।
जनगणना के आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता का सीधा प्रभाव विभिन्न सरकारी नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं एवं विकासात्मक पहलों के निर्माण पर पड़ता है। बैठक के दौरान फील्ड मशीनरी की तैयारियों, समय-सीमा तथा संचालन रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई, ताकि इस प्रक्रिया का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
डेटा संग्रहण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गणनाकर्ताओं (एन्यूमरेटर) के क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि गणनाकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता का प्रशिक्षण प्रदान किया जाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे डेटा की सटीकता, एकरूपता एवं पूर्णता सुनिश्चित हो सके। इसके लिए सभी परिचालन, तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं को समाहित करते हुए व्यापक एवं संरचित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं।
साथ ही, गणनाकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील बनाने एवं प्रक्रियाओं की उचित समझ प्रदान करने पर भी जोर दिया गया। उपायुक्त ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे 16 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होने वाली स्वयं-गणना (Self-Enumeration) प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। नागरिकों को इस सुविधा का उपयोग कर अपनी जानकारी समय पर एवं सही ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और सुनिश्चित करें कि जनगणना कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर कुशलतापूर्वक एवं पारदर्शिता के साथ संपन्न हो। बैठक का समापन प्रशासन की इस प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि जनगणना कार्य को पूर्णतः सूक्ष्मता एवं पेशेवर तरीके से संपन्न किया जाएगा।