Wednesday, 22 July 2026

 

 

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तीन दिवसीय राष्ट्रीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का शिवराज सिंह चौहान ने किया शुभारंभ

शिवराज सिंह चौहान ने खेती-किसानी को “विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में ले जाने वाले कई बड़े कृषि सुधारों का रोडमैप रखा सामने

Shivraj Singh Chouhan, Shivraj Chauhan, BJP, Bharatiya Janata Party, Pusa Krishi Vigyan Mela
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5 Dariya News

नई दिल्ली , 25 Feb 2026

Last updated on: Feb 26, 2026, 13:41 IST

दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती-किसानी को “विकसित कृषि–आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में ले जाने वाले कई बड़े कृषि सुधारों का रोडमैप सामने रखा।

उन्होंने साफ संदेश दिया कि अब किसान का पैसा रोककर रखने की पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी, एमएसपी खरीदी से लेकर केसीसी लोन, पेस्टिसाइड लाइसेंस और केवीके की भूमिका तक, हर स्तर पर पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही तय की जाएगी। आज पूसा स्थित आईसीएआर–आईएआरआई परिसर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित पूसा कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पौधारोपण कर किया। 

इस अवसर पर भारत सरकार के कृषि सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एम. एल. जाट और आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मंच पर किसानों को प्रथम पंक्ति में अपने साथ बैठाकर और एक दिव्यांग किसान भाई की व्हील चेयर स्वयं चलाकर उन्हें आगे लाकर चर्चा करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने संदेश दिया कि नीति–निर्माण का केंद्र किसान ही है। कार्यक्रम में सात किसानों को आईएआरआई कृषि अध्येता पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे “किसान प्रथम” की भावना को और बल मिला।

किसान का पैसा रोकने पर चुकाना पड़ेगा 12% ब्याज

कृषि रिफॉर्म्स पर अपनी बात रखते हुए श्री चौहान ने सबसे पहले किसानों के बकाया भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भी एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का पैसा रोकेगी, उसे उस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसान को देर से भुगतान और सरकारी खातों में पैसा “पार्क” रखकर लाभ कमाने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देरी नहीं करेगी और यदि किसी योजना में राज्यों की ओर से भुगतान में विलंब होता है तो भी केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में भेजने के विकल्प पर काम किया जा रहा है। उनका संदेश था कि किसान को केंद्र की ओर से मिलने वाला लाभ समय पर और बिना अड़चन के पहुँचे। 

कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी तकनीकों के लिए दी जा रही सहायता का ज़िक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को 18 से अधिक योजनाओं के तहत संसाधन उपलब्ध करा रही है, लेकिन केवल पैसा भेज देना पर्याप्त नहीं है। 

उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि एक जिले में 700 किसानों की सूची में नाम होने के बावजूद 158 किसानों को मशीनें मिली ही नहीं। उन्होंने कहा कि जब केंद्र पैसा देता है तो यह भी देखना उसकी जिम्मेदारी है कि लाभ असली किसान तक पहुँचा या नहीं, और इसके लिए मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम एक जरूरी रिफॉर्म है।

केवीके बनेगा ज़िले का कृषि रिफॉर्म कमांड सेंटर

कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका पर जोर देते हुए मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि केवीके को जिले की एक सशक्त इकाई के रूप में विकसित किया जाएगा, जो अनुसंधान और एक्सटेंशन के बीच सेतु का काम करे। उन्होंने केवीके को राज्यों के साथ बेहतर तालमेल कर नई किस्में, नई कृषि पद्धतियाँ और सफल मॉडल गाँव–गाँव तक पहुँचाने का दायित्व सौंपा और केवीके की संरचनात्मक मजबूती को भी एक अहम सुधार बताया।

केसीसी पर 4% ब्याज, लेकिन जीरो देरी – बैंक हों जवाबदेह

श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत छोटे किसानों को केसीसी लोन का लाभ मिल रहा है और प्रभावी 4 प्रतिशत ब्याज दर पर सस्ता ऋण उपलब्ध है, लेकिन इसमें भी देरी अस्वीकार्य है। उन्होंने वित्तीय संस्थाओं और बैंकों से अपेक्षा जताई कि किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े ऋण समय पर और बिना अनावश्यक कागजी देरी के जारी किए जाएँ, ताकि किसान साहूकारों पर निर्भर न रहें।

पेस्टिसाइड लाइसेंस में लेटलतीफी खत्म करने पर शिवराज सिंह का ज़ोर

कीटनाशकों की गुणवत्ता और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर बोलते हुए श्री शिवराज सिंह ने माना कि मौजूदा लाइसेंस प्रणाली लंबी और जटिल है, जिसके कारण ईमानदार कंपनियाँ भी अनावश्यक चक्कर काटती हैं और किसान तक अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद पहुँचने में देरी होती है। उन्होंने संकेत दिया कि पेस्टिसाइड लाइसेंस प्रक्रिया को सरल, लेयर कम, समयसीमा तय और पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद जल्दी बाजार में आए और घटिया व नकली उत्पादों पर सख्त रोक लग सके।

एमएसपी खरीद तीन महीने नहीं, एक महीने में हो

एमएसपी पर खरीदी की बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि तीन महीने की मौजूदा समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि किसान के पास फसल उतने लंबे समय तक रोककर रखने की क्षमता नहीं होती। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि अधिकतम एक महीने के भीतर एमएसपी पर खरीद पूरी हो जाए, ताकि किसान को तुरंत उचित दाम मिल सके और बाद में अन्य लोग खरीद कर एमएसपी के नाम पर अनुचित लाभ न उठा सकें।

2 लाख करोड़ की खाद सब्सिडी अब सीधे किसान के खाते में पहुंचे

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार खाद पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दे रही है, ताकि किसान को 2400 रुपये की वास्तविक लागत वाली यूरिया की बोरी सिर्फ लगभग 265–270 रुपये में मिल सके। उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार होना चाहिए कि इतनी बड़ी सब्सिडी यदि सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के रूप में दी जाए तो किसान स्वयं तय कर सकेगा कि कौन–सा उर्वरक कितनी मात्रा में खरीदना है, और यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि सब्सिडी का वास्तविक लाभार्थी वही अन्नदाता हो जो खेत में खाद डाल रहा है।

विकसित कृषि संकल्प अभियान: लैब से खेत तक वैज्ञानिकों की सीधी पहुँच का अप्रैल में फिर चलेगा अभियान

आगे की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों की टीमें गांव–गांव जाकर किसानों को नई शोध उपलब्धियों, रोग–कीट प्रबंधन, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल और एक्सपोर्ट क्वालिटी वैरायटीज़ के बारे में प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से जागरूक करेंगी। 

उन्होंने कहा कि इस अभियान को खरीफ से पहले अप्रैल से समयबद्ध रूप से चलाया जाएगा, जिससे किसान समय रहते वैज्ञानिक सलाह और बेहतर बीज–तकनीक का लाभ उठा सकें। पूसा कृषि विज्ञान मेले को श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों का राष्ट्रीय महाकुंभ बताते हुए कहा कि यह आयोजन केवल प्रदर्शनी भर नहीं, बल्कि देशभर के किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और नीति–निर्माताओं का ऐसा बड़ा संगम है जहाँ प्रयोगशाला की शोध सीधे खेतों तक पहुँचती है और पूरे भारत के लिए विकसित, आधुनिक और आत्मनिर्भर कृषि का रोडमैप तैयार होता है। उन्होंने इस मेले को अगले साल से व्यापक रूप में आयोजित करने के लिए IARI को दिशा-निर्देश दिए।

 

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