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अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राजभाषा विभाग के 'स्वर्ण जयंती समारोह' को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया

संघर्ष, साधना और संकल्प इन तीनों के आधार पर राजभाषा विभाग ने इन 50 वर्षों की यात्रा तय की है

Amit Shah, Union Home Minister, BJP, Bharatiya Janata Party, Minister of Cooperation, Golden Jubilee Celebration, Rekha Gupta, BJP Delhi, Chief Minister of Delhi, Delhi CM, Sudhanshu Trivedi
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नई दिल्ली , 26 Jun 2025

Last updated on: Jun 27, 2025, 14:50 IST

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राजभाषा विभाग के 'स्वर्ण जयंती समारोह' मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री श्री बंडी संजय कुमार, संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष श्री भर्तृहरि महताब, राज्यसभा सांसद श्री सुधांशु त्रिवदी और राजभाषा विभाग की सचिव श्रीमती अंशुली आर्या सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत की आज़ादी की शताब्दी के समय देश के स्वाभिमान के पुनर्जागरण के सभी प्रयासों में 1975 से 2025 तक की राजभाषा विभाग की 50 साल की इस यात्रा को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग की स्थापना का उद्देश्य था कि देश का शासन नागरिकों की भाषा में चले और प्रशासन में भारतीय भाषाओं का उपयोग कर देश के आत्मसम्मान को जागृत किया जाए। श्री शाह ने कहा कि कोई भी देश अपनी भाषा के बिना अपनी संस्कृति, साहित्य, इतिहास और सामाजिक संस्कार को चिरंजीव नहीं रख सकता। 

अपनी संस्कृति के आधार पर आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए देश का शासन उसकी अपनी भाषाओं में होना चाहिए। इस महान उद्देश्य के साथ राजभाषा विभाग की शुरूआत हुई थी और 50 वर्ष की यह यात्रा आज एक ऐसे मुकाम पर खड़ी है जब हमें इसे आगे ले जाने का प्रयास और पूरा रास्ता तय करना है। 

उन्होंने कहा कि संघर्ष, साधना और संकल्प के आधार पर इस 50 साल की यात्रा को हम सबने मिलकर पूरा किया है। श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा दिए गए पंच प्रण में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति बहुत महत्वपूर्ण प्रण है। 

जब तक व्यक्ति अपनी भाषा पर गौरव नहीं करता, अभिव्यक्ति, सोच, विश्लेषण औऱ निर्णय लेने की क्षमता को अपनी भाषा में नहीं गढ़ता, तब तक हम गुलामी की मानसिकता से मुक्त नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र की आत्मा होती है। 

हमारी जड़ें, परंपराएं, इतिहास, पहचान और जीवन संस्कृति भाषा से कटकर आगे नहीं बढ़ सकते और भाषाओं को जीवंत रखना और समृद्ध करना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि हमें आने वाले दिनों में सभी भारतीय भाषाओं और विशेषकर राजभाषा के लिए ये सभी प्रयास करने चाहिएं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने विगत 11 साल में एक भारत, श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम की शुरूआत की और इसके अंतर्गत काशी-तमिल संगमम, काशी-तेलुगू संगमम, सौराष्ट्र-तमिल संगमम, शाश्वत मिथिला महोत्सव और भाषा संगम ने देश की एकता को मज़बूत करने का एक बहुत अच्छा मंच प्रदान किया है। 

उन्होंने कहा कि आज भाषा संगमम की पहल पर हर स्कूल में छात्रों को बोलचाल के 100 वाक्य  संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं में सिखाने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। श्री शाह ने कहा कि भाषा संगमम द्वारा शुरू की गई यह पहल आने वाले दिनों में भारतीय भाषाओं की संजीवनी बन कर एक वट वृक्ष के रूप में आगे बढ़ेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि राजभाषा विभाग ने हिंदी शब्दसिंधु की रचना की है जो राजभाषा को स्वीकृत, लचीली और संपूर्ण बनाने का एक बहुत बड़ा प्रयास है। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को समृद्ध करने से परहेज़ नही होना चाहिए और आम बोलचाल के शब्द, चाहे किसी भी भाषा के हों, एक बार हिंदी शब्दसिंधु में आ जाते हैं तो आने वाले दिनों में वो शब्द हिंदी के शब्द के रूप में ही प्रतिष्ठित होंगे। 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिंदी शब्दसिंधु आने वाले दिनों में हिंदी को न सिर्फ लचीली और समृद्ध बनाएगा बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं से भी जोड़ेगा। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि इसी वर्ष भारतीय भाषा अनुभाग की भी स्थापना की गई है। 

उन्होंने कहा कि हिंदी किसी भी भारतीय भाषा की विरोधी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की सखी है और हिंदी और भारतीय भाषाएं मिलकर ही हमारे आत्मगौरव के उत्थान के कार्यक्रम को अंतिम लक्ष्य तक ले जा सकती हैं। 

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा अनुभाग हर राज्य को सहायता करेगा कि राज्यों और भारत सरकार का प्रशासन भारतीय भाषाओं के आधार पर ही हो। श्री शाह ने कहा कि हमारे देश में 12 भाषाओं में तकनीकी शिक्षा की शुरूआत हुई है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने हिंदी में मेडिकल शिक्षा की शुरूआत की है, पूरा पाठ्यक्रम बनाया है औऱ आने वाले दिनों में अन्य राज्य भी भी मेडिकल शिक्षा का पूरा पाठ्यक्रम अपनी भाषाओं में तैयार कर बच्चों को सुविधा उपलब्ध कराएंगे। 

उन्होंने कहा कि सभी राज्य इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा अपने राज्य की भाषा में उपलब्ध कराने का प्रबंध करें। श्री अमित शाह ने कहा कि कोई भी राज्य अपनी मातृभाषा की उपेक्षा कर कभी महान नहीं बन सकता और मोदी सरकार ने अपनी भाषाओं को सम्मानित और प्रतिष्ठित करने के लिए अनेक प्रयास किए हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी जी के कार्यकाल में ही मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि आज भारत में संस्कृत, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली के रूप में 11 शास्त्रीय भाषाएं उपलब्ध हैं। 

पूरे विश्व में ऐसा कोई देश नहीं है जिसके पास 11 शास्त्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में संस्कृत के लिए तीन केन्द्रीय विद्यालय स्थापित किए गए और अनुसंधान और अनुवाद के लिए केन्द्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान की स्थापना की गई। श्री शाह ने कहा कि संसदीय राजभाषा समिति ने पिछले 4 वर्षों में 3 खंड प्रकाशित किए हैं। 

उन्होंने कहा कि कोरोना के बावजूद 3 खंड प्रकाशित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 तक कुल 9 खंड प्रकाशित हुए थे और अब 2019 के बाद 3 खंड प्रकाशित हुए हैं जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। कोविड के दौरान केन्द्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान और केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो द्वारा ई-प्रशिक्षण के माध्यम से हिंदी भाषा, हिंदी टंकण, हिंदी आशुलिपि और हिंदी अनुवाद में प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया था जिसे अब नियमित करने का निर्णय लिया गया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी 2020 में नई शिक्षा नीति लाए। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के लिए शिक्षा नीति, आने वाले 50 साल में देश किस रास्ते पर आगे बढ़ेगा, इसकी परिचायक होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कक्षा 5 और कक्षा 8 तक मातृभाषा और स्थानीय भाषा पढ़ाने पर बल दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि हमारी भाषाओं के विकास का समर्थन नीतिगत रूप से किया गया है और 22 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में प्राथमिक कक्षा की 104 पुस्तकें भी शुरू की गई हैं। श्री शाह ने कहा कि भारतीय सांकेतिक भाषा के लिए कक्षा 1 से 12 तक के लिए अनुवादित शिक्षण सामग्री और पुस्तकें उपलब्ध करा दी गई हैं। 

200 से अधिक टीवी चैनल्स 29 भाषाओं में शैक्षिक सामग्री प्रदान करते हैं और दीक्षा प्लेटफॉर्म पर 133 बोलियों में 3 लाख 66 हज़ार से अधिक ई-सामग्री उपलब्ध कराई है जिनमें 7 विदेशी भाषाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की यह पहल राजभाषा और भारतीय भाषाओं को मज़बूत करने में सहायक सिद्ध होगा। 

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में हवलदार पद के लिए परीक्षा अब भारतीय भाषाओं में आयोजित की जाती है और 95 प्रतिशत परीक्षार्थी अपनी मातृभाषा में परीक्षा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि आने वाले दिनों में भारतीय भाषाओं का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।

श्री अमित शाह ने कहा कि राजभाषा विभाग ने तय किया है आने वाले दिनों में हम भारतीय भाषा अनुभाग के माध्यम से भारतीय भाषाओं को किशोरों और युवाओं की भाषा बनाएंगे। उन्होंने कहा कि विगत कुछ दशकों में भाषा को भारत को तोड़ने का ज़रिया बनाया गया था, लेकिन इस प्रयास में सफलता नहीं मिली। 

गृह मंत्री ने कहा कि हमें सुनिश्ति करना होगा कि हमारी भाषाएं भारत को तोड़ने का नहीं बल्कि जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनें। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आज रखी जा रही नींव 2047 में एक विकसित और महान भारत की रचना करेगी। इसके अंतर्गत भारतीय भाषाओं को उन्नत और समृद्ध बनाने के साथ ही इनकी उपयोगिता भी बढ़ाई जाएगी।

 

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