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भारत ने तीसरे क्वांटम कॉन्क्लेव की मेजबानी की

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 5G और उससे आगे के लिए क्वांटम सुरक्षा मानकों का अनावरण किया

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 25 Apr 2025

Last updated on: Apr 26, 2025, 13:14 IST

दूरसंचार विभाग (डीओटी) की तकनीकी शाखा दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टीईसी) ने टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डॉट) के सहयोग से आज नई दिल्ली में तीसरे अंतरराष्ट्रीय क्वांटम संचार सम्मेलन (इंटरनेशनल क्वांटम कम्युनिकेशन कॉन्क्लेव) की मेजबानी की। 

इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में मानकीकरण, अनुसंधान और सुरक्षित डिजिटल परिवर्तन पर विशेष जोर के साथ, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने क्वांटम संचार के भविष्य पर विचार-विमर्श किया। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया; संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। 

इस अवसर पर मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद; डीसीसी के अध्यक्ष एवं सचिव (दूरसंचार) डॉ. नीरज मित्तल और वरिष्ठ डीडीजी एवं टीईसी प्रमुख श्रीमती तृप्ति सक्सेना भी उपस्थित थे। यह सम्मेलन खास तौर पर 2023 में ₹6003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के मद्देनजर, क्वांटम संचार प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत द्वारा उठाए गए कदमों के एक हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। 

यह मिशन, प्रधानमंत्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार सलाहकार परिषद के तहत एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शिक्षा, उद्योग और स्टार्ट-अप में एक जीवंत और अभिनव पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देते हुए क्वांटम प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन देना है।

इस आयोजन के एक भाग के रूप में, क्वांटम सुरक्षित प्रौद्योगिकियों को लागू किए जाने को समर्थन और बढ़ावा देने के लिए तीन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का अनावरण किया गया, जिनमें क्वांटम रैंडम नंबर जेनरेटर (क्यूआरएनजी) के लिए सामान्य आवश्यकताओं पर मानक, पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) में माइग्रेशन पर एक तकनीकी रिपोर्ट और पीक्यूसी का उपयोग करके क्वांटम सिक्योर 5जी /बियॉन्ड 5जी कोर पर एक तकनीकी रिपोर्ट शामिल हैं।

क्यूआरएनजी पर मानक (स्टैंडर्ड ऑन क्वांटम) एक ढांचा प्रदान करते हैं जिनका उपयोग संगठनों द्वारा क्वांटम रैंडम नंबर जेनरेटर के मूल्यांकन के लिए किया जा सकता है। पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) में माइग्रेशन पर तकनीकी रिपोर्ट का उद्देश्य संगठनों को डेटा और एप्लिकेशन सहित उनके महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे की पहचान करने और क्वांटम सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी में एक सहज संक्रमण के उद्देश्य से तैयार होने के लिए संवेदनशील बनाना है। 

पीक्यूसी का उपयोग करके क्वांटम सिक्योर 5जी/बियॉन्ड 5जी कोर पर तकनीकी रिपोर्ट क्वांटम कंप्यूटर के उद्भव से विकसित 5जी कोर के भीतर वर्तमान क्रिप्टोग्राफिक प्रोटोकॉल की कमजोरियों पर गहराई से विचार करती है और 5जी कोर आर्किटेक्चर के भीतर प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करती है जहां क्वांटम सुरक्षा प्राप्त करने के लिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) को लागू किया जा सकता है।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उद्घाटन भाषण देते हुए संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने क्वांटम तकनीक के क्रांतिकारी प्रभाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा,"क्वांटम कंप्यूटिंग सिर्फ एक और कदम नहीं है, यह एक बड़ी छलांग है जो नवाचार को परिभाषित करेगी, वैज्ञानिक खोज को गति देगी और मानवीय समस्याओं के कई समाधान सामने लाएगी जिन्हें अब तक हमेशा से ही असंभव माना जाता रहा है।" 

श्री सिंधिया ने कहा कि अब भविष्य सिर्फ डिजिटल नहीं है, अब भविष्य क्वांटम है। क्वांटम कंप्यूटिंग के प्रभाव न केवल वैज्ञानिक खोज को, बल्कि हमारे जीवन को भी प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, "आइए साहस, प्रतिभा और उद्देश्य की स्पष्ट भावना के साथ क्वांटम युग में कदम रखें।"

केंद्रीय मंत्री सिंधिया के नेतृत्व में सम्मेलन के प्रतिभागियों ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन रखा। उन्होंने आतंकवादी हमले की निंदा की और इसे “अमानवीय तत्वों द्वारा किया गया कायरतापूर्ण, जघन्य हमला बताया, जिसमें निर्दोष लोगों की जान चली गई।” 

उन्होंने कहा, “मेरा दिल उन सभी के लिए दुखी है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है और हम में से हर कोई अपने दिल की गहराई से, हर एक परिवार के सदस्य के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।” संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के परिवर्तनकारी नेतृत्व में भारत क्वांटम प्रौद्योगिकी परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के माध्यम से हम क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग और क्वांटम सामग्रियों में बड़े स्तर पर निवेश कर रहे हैं। हमारा जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम, हमारे विश्व स्तरीय शोध संस्थान और हमारे उद्योग के अग्रणी पहले से ही तैनाती के लिए तैयार स्वदेशी क्वांटम समाधान प्रदान कर रहे हैं।" 

केंद्रीय मंत्री ने सभी शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और दूरदर्शी उद्यमियों से अपनी जिज्ञासा को बढ़ाने, ज्ञान बढ़ाने और पारंपरिक विचारों को चुनौती देने का आह्वान किया। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि यह सम्मेलन वर्ष 2025 में हो रहा है जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा क्वांटम वर्ष घोषित किया गया है। 

प्रो. सूद ने पिछले 100 वर्षों में क्वांटम प्रौद्योगिकियों के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा, "आज हम प्रौद्योगिकी के नवीनतम क्षेत्र क्वांटम यांत्रिकी की दूसरी क्रांति में हैं जहां अब हमारे पास क्वांटम प्रणालियों को नियंत्रित करने के लिए उपकरण हैं।" डीसीसी के अध्यक्ष और सचिव (दूरसंचार) डॉ. नीरज मित्तल ने उम्मीद जताते हुए कहा, " विशेष रूप से एक अंतःविषय क्षेत्र होने के कारण यह क्वांटम सम्मेलन हमें सीमाओं को फिर से परिभाषित करने, सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगी और सिफारिशें देगा। 

इससे सरकार उन पर ध्यान दे सकेगी और तदनुसार अपनी नीतियों को अनुकूलित किया जा सकेगा।" इस सम्मेलन का उद्देश्य क्वांटम-सुरक्षित प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान एवं विकास, मानकीकरण और परीक्षण के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करना और हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना था।

तकनीकी सत्रों में सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय, क्यूकेडी टेक्निकल मार्केटिंग, जापान में सीनियर मैनेजर डॉ. आनंदरमन शंकरन, आईबीएम क्वांटम सेफ, यूएसए के डॉ. रे हरिशंकर, ग्लासगो विश्वविद्यालय, यूके के सीनियर लेक्चरर (इलेक्ट्रॉनिक और नैनोस्केल इंजीनियरिंग) डॉ. कावेह डेलफनाजारी, मेसर्स एरिक्सन, स्वीडन के श्री रोवन होगमैन (एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डायरेक्टर), रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु की डॉ. उर्बसी सिन्हा, आईआईटी मद्रास के प्रो अनिल प्रभाकर सहित भारत और विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों और संगठनों द्वारा विचारोत्तेजक वार्ता हुईं और प्रस्तुतियां दी गईं।

सम्मेलन में अनुसंधान एवं विकास संस्थानों (सी-डॉट, सीआर राव एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिक्स, स्टेटिस्टिक्स एंड कंप्यूटर साइंस) और उद्योगों/स्टार्ट-अप्स (क्यूएनयू लैब्स, क्यूपीआईएआई, क्यूटेस लैब्स और न्यू एज इंस्ट्रूमेंट्स एंड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड) की प्रदर्शनी भी शामिल थी। 

इनके माध्यम से भारत में क्वांटम संचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों में हो रही अत्याधुनिक प्रगति की झलक पेश की गई। इस सम्मेलन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानक संगठनों में योगदान को बढ़ावा देना था। इसके अतिरिक्त, इसके माध्यम से मौजूदा मानकीकरण से जुड़ी कमियों की पहचान करने और क्वांटम संचार प्रौद्योगिकियों में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) निर्माण में योगदान को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान किया गया।

इसके बारे में:

दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टीईसी), दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन दूरसंचार और संबंधित आईसीटी उत्पादों के लिए मानक निर्धारण संगठन है। यह दूरसंचार/आईसीटी क्षेत्र के लिए मानकों, विनिर्देशों, परीक्षण प्रक्रियाओं, सेवा विनिर्देशों और तकनीकी विनियमों के निर्माण के लिए जिम्मेदार है। 

टीईसी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्वांटम प्रौद्योगिकी पर मानकीकरण गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है और आईटीयू, आईईईई आदि में भाग लेता है और योगदान देता है। टीईसी ने "क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम " और "क्वांटम-सेफ एंड क्लासिकल क्रिप्टोग्राफिक सिस्टम" पर मानक जारी किए हैं। 

टीईसी ने क्वांटम प्रौद्योगिकी पर मानकों के विकास के उद्देश्य से एक केंद्रित और समन्वित दृष्टिकोण रखने के लिए शिक्षाविदों, उद्योग/स्टार्टअप, आरएंडडी संगठनों, सेवा प्रदाताओं, सरकारी संगठनों आदि के सदस्यों के साथ "क्वांटम प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय कार्य समूह" (एनडब्ल्यूजी-क्यूटी) का भी गठन किया है।

 

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