शिरोमणी अकाली दल ने आज कहा है कि आम आदमी पार्टी सरकार ने आम आदमी पर 12,500 करोड़ रूपये के नए करों का बोझ डाला है , जबकि उसने पिछले ढ़ाई सालों में लिए गए एक लाख करोड़ रूपये के अभूतपूर्व कर्ज को उचित ठहराने के लिए कोई नई बुनियादी ढ़ांचा परियोजना यां सामाजिक भलाई योजना शुरू नही की है। उन्होने केंद्र से आप सरकार द्वारा लिए गए खर्च को कैसे खर्च किया जा रहा, इसकी जांच करने की मांग की है।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता सरदार परमबंस सिंह रोमाणा ने कहा कि देश भर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को देश भर में प्रोजेक्ट करने में घोर वित्तीय कुप्रबंधन पर खर्च किया जा रहा है और भारी विज्ञापन खर्च और अन्य राज्यों में प्रचार के लिए हेलीकाप्टर और विमान किराए पर लेने पर खर्च किया गया पैसा ही राज्य की बदहाली के लिए जिम्मेदार है। उन्होने कहा कि पंजाब दिवालिया हो गया और राज्य 46.81 फीसदी के साथ जीएसडीपी अनुपात में दूसरे स्थान पर है।
यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए सरदार रोमाणा ने कहा कि आप सरकार ने समाज के हर वर्ग पर टैक्स लगाया है, चाहे वह पेट्रोल और डीजल पर तीन बार वैट बढ़ाना(600करोड़ रूपये), बिजली सब्सिडी हटाना(1800 करोड़ रूपये), बिजली की दर बढ़ाना(7,800 करोड़ रूपये), कलेक्टर रेट बढ़ाना(2,000 करोड़ रूपये),बस किराया बढ़ाना(150 करोड़ रूपये), मोटर वाहन कर दोगुना करना(100 करोड़ रूपये), पुराने वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाना(100 करोड़ रूपये) और यहां तक कि लोन पर टैक्स लगाना(1500 करोड़ रूपये) भी शामिल है।
वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा कि सुविधा केंद्रों में सेवा शुल्क बढ़ाने और ड्राइविंग लाइसेंस तथा हथियार लाइसेंस के लिए लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी के रूप में इन भारी करों और शुल्कों को लागू करने के बावजूद सरकार के पास कोई उपलब्धि नही है। उन्होने कहा,‘‘ मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान को चुनौती देता हूं कि वे अपनी सरकार द्वारा शुरू की गई एक भी बुनियादी ढ़ांचा परियोजना बताएं यां आप सरकार द्वारा सभी सामाजिक भलाई योजनाओं को बंद करने पर बहस करें। मैं इस मुददे के साथ-साथ राज्य के सामने मौजूद गंभीर वित्तीय संकट पर किसी भी स्तर पर बहस करने के लिए तैयार हूं।’’
सरदार रोमाणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्होने राज्य की आर्थिक स्थिति के बारे में कभी बात क्यों नही की और बताया कि पंजाब का राजस्व घाटा क्यों बढ़ रहा है और कर्मचारियों को समय पर वेतन क्यों नही मिल रहा है। उन्होने कहा कि जब 2007 में अकाली दल सरकार ने बागडोर संभाली थी , तब कर्ज और जीएसडीपी का अनुपात 40.15 फीसदी था जो 2017 में घटकर 33 फीसदी रह गया।
उन्होने कहा,‘‘ तब से राज्य की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है और कांग्रेस ने 2022 में जीएसडीपी अनुपात को 45 फीसदी तब बढ़ा दिया और अब यह 46.81 फीसदी हो गया है। उन्होने कहा कि उन्होने कहा कि सालाना राजकोषीय घाटा बढ़कर 34हजार करोड़ रूपये होने से शासन खुद सवालों के घेरे में है।सरदार रोमाणा ने कहा कि इसी तरह अकाली दल के कार्यकाल के दौरान औसत उधार 8400 करोड़ रूपये सालाना थी और कांग्रेस कार्यकाल के दौरान यह बढ़कर 18,235 करोड़ रूपये प्रति वर्ष हो गया और अब यह उधार बढ़कर 35,000 करोड़ रूपये सालाना हो गया है।
सरदार रोमाणा ने कहा कि अकाली दल ने स्कूल, कालेज, ग्रामीण सड़कें , राजमार्ग और हवाई अडडों के निर्माण के अलावा मंडियों और सिचांई सुविधाओं को बढ़ाया था, जबकि आप सरकार ने इसके विपरीत कुल उधार का केवल सात फीसदी ही पूंजीगत व्यय पर खर्च कर रही है। उन्होने कहा कि कैग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सैस और शुल्क के रूप में इकटठे किए गए 736 करोड़ रूपये सरकारी खातों में जमा नही किए गए हैं, इसकी गहन जांच की जानी चाहिए।