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भविष्य के युद्धों के लिए पहले 'देखने' और 'हमला' करने की क्षमता की जरूरत : वायुसेना प्रमुख

Military, Indian Air Force,  Air Chief Marshal,  V.R. Chaudhari, Chief of Air Staff
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नई दिल्ली , 18 Apr 2023

Last updated on: Apr 18, 2023, 00:00 IST

आईएएफ प्रमुख वीआर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि भविष्य के युद्धों में 'पहले देखने' की क्षमता, उसके बाद 'पहले वार करने' और फिर 'सबसे दूर तक वार करने' की क्षमता की जरूरत होगी। एयर चीफ मार्शल चौधरी ने भारतीय वायु सेना के पहले और एकमात्र मार्शल अर्जन सिंह की याद में द सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज (सीएपीएस) द्वारा आयोजित एयरोस्पेस पावर: पिवोट टू फ्यूचर बैटलस्पेस ऑपरेशंस पर सेमिनार में कहा, फाइटर जेट्स, यूएवी, सेंसर, लंबी दूरी की मिसाइल और मानव-मानव रहित प्लेटफार्मों की टीमिंग भविष्य के युद्धों में वायु शक्ति के परिणाम को परिभाषित करेगी।

भारतीय वायुसेना के अनुसार, संगोष्ठी का उद्देश्य एयरोस्पेस शक्ति की बदलती प्रकृति और भविष्य के युद्धक्षेत्र संचालन में इसकी भूमिका का पता लगाना था। जैसे-जैसे तकनीकी प्रगति युद्ध के परि²श्य को नया रूप दे रही है, सैन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए एयरोस्पेस डोमेन तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है।

आईएएफ ने कहा कि- संगोष्ठी ने अतीत में 'वायु शक्ति संचालन की खासियत' की जांच की और भविष्य के युद्धक्षेत्र संचालन में अविभाज्य इकाई के रूप में बहु-डोमेन संचालन की आवश्यकता को रेखांकित किया। जैसे-जैसे दुनिया तेजी से जटिल और अस्थिर होती जा रही है, सैन्य अभियानों के लिए अधिक एकीकृत और बहु-आयामी ²ष्टिकोण की आवश्यकता होती है जो एयरोस्पेस क्षमताओं के पूर्ण स्पेक्ट्रम का लाभ उठाता है। 

एयरोस्पेस शक्ति भविष्य के संघर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, खुफिया, निगरानी, टोही, कमांड और नियंत्रण और स्ट्राइक क्षमताओं में महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करेगी।सत्रों ने उभरती प्रौद्योगिकियों, रणनीतियों, और इन क्षमताओं को व्यापक सैन्य अभियानों में एकीकृत करने से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों सहित एयरोस्पेस शक्ति की विकसित प्रकृति पर चर्चा की। 

'एयरोस्पेस डोमेन में प्रमुख रुझान और प्रौद्योगिकियां' और एयरोस्पेस पावर के लिए इन प्रवृत्तियों के उनके प्रभाव की भी जांच की गई, साथ ही साथ अंतरिक्ष और साइबर डोमेन का बढ़ता महत्व, मानव रहित हवाई वाहनों का उदय, और एयरोस्पेस संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लनिर्ंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक का बढ़ता उपयोग।

सत्र में एयरोस्पेस शक्ति को भविष्य के युद्धक्षेत्र संचालन में सफलतापूर्वक एकीकृत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिसके लिए उभरते खतरे के माहौल की व्यापक समझ, नवाचार और तकनीकी उन्नति के प्रति प्रतिबद्धता और नई परिचालन अवधारणाओं और सिद्धांत के विकास की आवश्यकता होगी। 

यह सम्मेलन भारतीय वायु सेना के दिवंगत मार्शल अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि है, जो युद्ध में भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने वाले पहले प्रमुख थे, वायु सेना प्रमुख होने के नाते उन्होंने 1965 में आधुनिक युग के पहले संघर्ष में कार्रवाई देखी। जब उन्हें भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब वह मुश्किल से 44 वर्ष के थे, जिसे उन्होंने तड़क-भड़क और जोश के साथ निभाया।

सीएपीएस ने वायु शक्ति के वर्तमान और भावी पीढ़ी के समर्थकों को प्रेरित करने के लिए उनके सम्मान में वार्षिक स्मारक व्याख्यान शुरू करने का निर्णय लिया।

 

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