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एलपीयू के पूर्व विद्यार्थियों का 'डिजिटल अंतरिक्ष मौसम यंत्र' पीएसएलवी सी-53 द्वारा अंतरिक्ष कक्षा में स्थापित हुआ

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5 Dariya News

जालंधर , 01 Jul 2022

Last updated on: Jul 01, 2022, 00:00 IST

इसरो द्वारा शानदार  उपलब्धि प्राप्त की गयी जब उन्होंने पीएसएलवी सी-53 के द्वारा तीन सिंगापुरी उपग्रहों को अंतरिक्ष  की कक्षाओं में ले जाने के लिए लॉन्च किया |  इसके साथ ही यह लॉन्च वाहन  लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के पूर्व विद्यार्थियों की टीम पर आधारित स्पेस टेक स्टार्टअप "दिगान्तरा" के डिजिटल स्पेस  वेदर  इंस्ट्रूमेंट, जोकि  दुनिया  में सबसे छोटा है, को भी स्थापित  करने  के लिए ले गया था ।

एलपीयू के पूर्व छात्र और "दिगान्तरा" के सीईओ, अनिरुद्ध शर्मा और  सह-संस्थापक व  सीओओ  राहुल  रावत तथा  10 अन्य टीम सदस्यों ने अंतरिक्ष संचालन के लिए  वन स्टॉप सॉल्यूशन बनाया है, जिसने  दुनिया  की  पहली   कमर्शियल अंतरिक्ष-आधारित मौसम प्रणाली, रॉबी (रॉबस्ट इंटीग्रेटिंग प्रोटॉन फ्लुएंस मीटर) लॉन्च की है।

इस महीने की शुरुआत में, "दिगान्तरा" टीम  के सदस्यों से माननीय  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी  के साथ बातचीत भी हुई थी, जहां अनिरुद्ध शर्मा ने पीएम  मोदी  को अपना दृष्टिकोण भी बताया था। इस बातचीत  के बाद, "दिगान्तरा" टीम ने प्रधानमंत्री  जी  के "मन की बात" भाषण में भी अपनी विशेष जगह बनाई जिसमें माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इस अंतरिक्ष तकनीक वाले स्टार्टअप के बारे में भी उल्लेख किया।

यह भारत का पहला कमर्शियल पेलोड है जिसने  पीएसएलवी  के पी एस 4ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया|  दिगंतारा  के पेटेंट किए गए, डिजिटल स्पेस वेदर इंस्ट्रूमेंट में <20mW की बिजली खपत के साथ एक अत्यंत छोटा मार्क है। आकार या एप्लीकेशन के बावजूद ऐसे एकीकरण की सादगी किसी भी उपग्रह को अंतरिक्ष में जाने के लिए आदर्श बनाती है । यह दिगान्तरा  को अंतरिक्ष मौसम  डेटा की मात्रा बढ़ाने  में  सक्षम  करेगा जो वास्तविक समय में उपलब्ध होगा।

इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए टीम दिगान्तरा को बधाई देते हुए, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ अशोक कुमार मित्तल ने कहा, “जब हमारे विद्यार्थी नई ऊंचाइयों को  छूने में सक्षम होते हैं तो हमें बहुत खुशी होती है। मैं इस उपलब्धि के लिए अनिरुद्ध शर्मा और पूरी टीम  को  बधाई  देना चाहता हूं। एलपीयू में हम प्रैक्टिकल लर्निंग पर फोकस करते हैं। 

हाल ही में, हमने अत्याधुनिक उपग्रह ग्राउंड स्टेशन  की  स्थापना  के साथ  अंतरिक्ष  अनुसंधान में महत्वपूर्ण निवेश किया है। हमारे शोधकर्ता भी एलपीयू के उपग्रह  के  प्रक्षेपण की दिशा  में दिन-रात  निरंतर  काम  कर रहे हैं।“अंतरिक्ष मौसम एक जटिल समस्या  है जो उच्च ऊर्जा कणों, प्लाज्मा और सूर्य से उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंगों या पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ ब्रह्मांड से उत्पन्न होती है। 

किसी भी प्रमुख अंतरिक्ष मौसम घटना का अंतरिक्ष और स्थलीय प्रणालियों दोनों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। इस तरह की घटना बिजली ग्रिड को बाधित कर सकती है, एयरलाइन यात्रा को प्रभावित कर सकती है और संचार प्रणाली, स्थिति, नेविगेशन और समय (जीपीएस) सिस्टम को भी बाधित कर सकती है, जिससे विभिन्न संचार और नेविगेशन क्षमताओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है। 

अनुमानों के अनुसार, एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मौसम घटना के परिणामस्वरूप 3.4 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। इसलिए, यह जरूरी है कि हमारे पास इस तरह की घटना का अनुमान लगाने और निगरानी करने की क्षमता हो |अनिरुद्ध ने सांझा किया : "हम बहुत उत्साहित हैं क्योंकि लॉन्च सफलतापूर्वक हो गया है। हम भारत सरकार और इसरो के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं जिन्होंने हमारे एक युवा स्पेस टेक स्टार्टअप को जीवन में अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर दिया है। 

हमें विश्वास है कि हमारा उपकरण उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करेगा और उम्मीद है कि आने वाले अंतरिक्ष मिशनों में हम अपने अंतरिक्ष संबंधी नवाचारों के साथ फिर से अपनी छाप छोड़ेंगे।'वर्ष 2021 में, कलारी कैपिटल ने भी 2.5 मिलियन अमरीकी डालर के सीड फंडिंग के साथ दिगान्तरा का समर्थन किया था । राशि का उपयोग करते हुए, स्टार्टअप ने एक वर्ष से भी कम समय में  अंतरिक्ष में अपने हार्डवेयर बुनियादी ढांचे का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन प्रस्तुत कर अपनी क्षमताओं को मजबूत किया।

 

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