प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सामाजिक सौहार्द्र व अखंडता के संदेश पर जोर देते हुए संत कबीर और गुरु नानक के उपदेशों का स्मरण किया। 2019 में गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व (जयंती वर्षगांठ) का जिक्र करते हुए मोदी ने उनके अनुयायियों से इस ऐतिहासिक अवसर को मनाए जाने के तरीकों के बारे में सोचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, गुरु नानक देव समाज से जातिगत भेदभाव खत्म करना चाहते थे और पूरी मानव जाति को समान रूप से गले लगाना चाहते थे। वे गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा को भगवान की सेवा बताते थे। मोदी ने कहा, उन्होंने लोगों के कल्याण के लिए कई पहलों की शुरुआत की जैसे कि सामुदायिक रसोई या लंगर, जिसमें किसी भी धर्म, जाति या पंथ का कोई व्यक्ति शामिल हो सकता है और सभी के साथ बैठकर भोजन कर सकता है। 15वीं सदी के संत कबीर को नमन करते हुए मोदी ने कहा कि उनके विचार व आदर्श सामाजिक सौहार्द्र पर जोर देते हैं।
उन्होंने कहा कि कबीर ने काशी (वाराणसी) के बजाय मरने लिए उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे मगहर को चुनकर सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ने की कोशिश की। मोदी ने कहा कि ऐसा माना जाता था कि मगहर में मरने वाला व्यक्ति स्वर्ग नहीं जाएगा, लेकिन काशी में अंतिम सांस लेने वाला निश्चित ही स्वर्ग पहुंचेगा। कबीर ने जानबूझकर मगहर को अपनी मौत के लिए चुनकर इस प्रथा को तोड़ने की कोशिश की। मोदी ने कहा, कबीर ने अपनी रचनाओं में सामाजिक समानता, शांति और भाईचारे पर जोर दिया। ये उनके आदर्श थे और जिन्हें हम उनकी रचनाओं में देखते हैं। वह उस समय की तरह ही आज भी प्रेरणादायक हैं। मोदी ने कहा कि भक्ति आंदोलन के सूफी कवि ने सामजिक सौहार्द्र का उपदेश दिया।