न्यूटन के तीसरे नियम में संशोधन नाम का शोधपत्र इडियन साइंस कांगे्रस 2018 में फिजिकल साइसिंज की प्रोसीडिग्ज में छपा है। यहां पर स्पष्ट दर्शाया है कि तीसरे नियम में संशोधन कैसे और क्यों होना चाहिए ? शर्मा ने अपनी छुटी और खर्च पर मणिपुर यूनिवार्सिटी में रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया। उन्होने वैज्ञानिकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर कनाडा के General Science Journal में छपावाये ताकि सभी उन्हें पढ़ सकें। यह अन्य वैबसाईटों पर भी उपलब्ध हैं । इसी शोध पत्र को अजय शर्मा ने 31 मार्च 2018 को राष्ट्रीय स्तर की कान्फरैस में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में भी प्रस्तुत किया है। यहां पर भी उनका शोघ पत्र क्रम संख्या ओ.पी. 24 पर प्रकाशित हुआ है।शर्मा ने कहा कि तीसरे नियम कों विश्वव्यापी माना जाता है। पर असंख्य उदाहरणों में इसे चैक ही नहीं किया गया है। बच्चों को पढ़ाया जाता है इन्हें सही मानों और पढ़ों। शर्मा ने कहा कि यदि इसे चैक किया जाए तो नियम की खामियां अपने आप जग जाहिर हो जाएगी। इस तरह क्रिया और प्रतिक्रिया सभी अवस्थाओं में बराबर नहीं होते।शोध के मुताबिक न्यूटन के नियम का सबसे कमजोर पहलू यह है कि नियम वस्तु के आकार और विशेषताओं ( कठोरता, लचीलापन, रबड की गेंद या स्टील की ) की अनदेखी करता हे। इसे आसानी से परखा जा सकता है।100 ग्राम रबड़ की वस्तु गोल, अर्ध-गोलाकार, त्रिभुज, शंकु, टेढ़ी, मेढ़ी भी हो सकती है न्यूटन के मुताबिक सभी आकार की वस्तुओं के लिए प्रतिक्रिया समान होनी चाहिए। इस भवष्यिवाणी को किसी लैबोटरी में परखा ही नहीं गया है। शर्मा के अनुसार वस्तु का आकार और विशेषताएं महत्वपूर्ण है। इसी लिए 22 वर्ष पहले नियम का उनहोने रिसर्च जरनल में संशोधन किया गया है।
केन्द्रीय विज्ञान और टैक्नोलाजी मंत्री डा हर्ष वर्घन ने उनकी दो पुस्तके नैशनल अकादमी आफॅ साइसिज इंडिया को 2015 में, लगभग, तीन वर्ष पहले मूल्याकंन के लिए भेजी थी। अभी तक दोनों पुस्तकों ‘ बियोड न्यूटन एड आर्किमिडीज’ और ‘ बियोड आइस्टीन एडं E =mc2 पर रिपोर्ट का इन्तजार है। इनके न्यूटन के तीसरे नियम को भारत सरकार की वैज्ञानिक संस्थाए छानबीन के बाद पुनः कर चुकी है।अजय शर्मा ने माननीय मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और शिक्षा मंत्री श्री सुरेश भारद्वाज से प्रार्थना की है िक वे इस मुद्दे को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उठाये ताकि आगे कार्रवाई हो सके।अजय शर्मा ने कहा कि वे न्यूटन के सर्वव्यापी नियम में सिद्धांत रूप् से गल्ती दर्शा चुके हैं। अंतिम मान्यता के लिए सिर्फ कुछ प्रयोगों की आवश्यकता है।सरकार के सहयोग से वे कुछ महीनों में इसे दर्शा सकते है। सबसे बड़ी बात यह कि यह संशोधन पूरी तरह भारत भूमि से होगा। इससे भारत को विश्व गुरू बन जायेगा। क्योंकि भारत में किया शोध विश्व के सभी स्कूलों तक पहुंचेगा।शर्मा ने न्यूटन की पुस्तक प्रिसीपिया (1686) को दर्शाते हुए कहा कि उन्होंने पृश्ट 20 पर नियम के दो उदाहरण दिये हैं। जब हम अगुली से पत्थर केा धकेलते है तो पत्थर आगे नहीं हिलता है। न्यूटन के मुताबिक अगुली द्वारा लगाया गया बल क्रिया और पत्थर द्वारा अंगुली पर लगाया गया बल प्रतिक्रिया कहलाता है। पत्थर अपनी जगह से नहीं हिलता है। इस तरह न्यूटन ने का है कि क्रिया प्रतिक्रिया के बराबर होती हैं। पर जब कोई बच्चा पत्थर को धकेलता है तो वह आगे चला जाता है। इस के बारे में न्यूटन ने कुछ नहीं कहा। इस तरह न्यूटन का तर्क आधा अधूरा है