समेकित बाल संरक्षण योजना के अन्तर्गत बाल-बालिका आश्रमों में रहने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु तैनात कर्मचारियों की कार्यकुशलता को और प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास निदेशालय तथा राष्ट्रीय/बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संयुक्त तत्वाधान में मशोबरा के समीप ‘हिपा’ में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के छः जिलों के लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया।प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए महिला एवं बाल विकास निदेशालय की निदेशक मानसी सहाय ठाकुर ने नई दिल्ली से पधारे अतिथियों को सम्मानित किया तथा सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला चरण गत अप्रैल माह में आयोजित किया गया था और अब यह दूसरा चरण है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे बाल-बालिका आश्रमों में रह रहे बच्चों की समस्याओं को नजदीक से समझें और उनके निदान का प्रयास करें। उन्होंने जानकारी दी कि बाल-बालिका आश्रमों में रह रहे 28 बच्चों जिन्होने जमा दो की परीक्षा पास कर ली हे, के पुर्नवास के लिए विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार के तकनीकी व व्यावसायिक प्रशिक्षण करवाए जा रहे हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग की सह-प्रचार्य डा0 रचना भार्गव ने बच्चों के विकास में आने वाली समस्याओं के बारे जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को नजदीक से समझने की आवश्यकता होती है। बच्चों के विकास के लिए केवल पढ़ाई ही जरूरी नहीं है। वे क्या करना चाहते हैं, उसके अनुरूप ही उन्हें समझाने की भी आवश्यकता होती है।बाल-बालिका आश्रमों में रह रहे बच्चों की काउंसलिंग बारे नई दिल्ली से आमत्रित सदस्यों डा0 निमेश देसाई, डा0 साक्षी चन्द तथा डा0 जहांआरा एम गजेन्द्रागद ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। इन सभी ने बाल मनोविज्ञान विषय पर प्रकाश डाला तथा विचारों का आदान-प्रदान किया। इस विषय पर प्रतिभागियों के साथ उनके श्रेत्रों में हुई विशेष घटनाओं का जिक्र करते हुए ऐसे मामलों से सम्बन्धित पहलुओं पर विस्तारपूर्व चर्चा कर इनके समाधान के लिए सुझाव भी दिए गए।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के सह-प्रचार्य डा0 दीपक कुमार ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग व विशेष रूप से आमन्त्रित सदस्यों ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे सर्वप्रथम अपने दायित्व को समझें। साथ ही साथ अपने व्यवहार में सुधार लाएं व आपस में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखें। प्रतिभागियों को बच्चों की काऊंसलिंग हेतु लघु नाटिका के माध्यम से ज्ञानवर्धक जानकारी दी गई।