मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कहीं ज्यादा पार्टी के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस चुनाव के नतीजों से ही पता चल जाएगा कि मतदाताओं के मानस पर स्टार प्रचारक मोदी कितनी छाप छोड़ पाए और लोकसभा चुनाव में 'मोदी फैक्टर' कितना असरदार होगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार दो चुनाव जीतकर सत्ता में है और तीसरी जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाकर नया इतिहास रचना चाहती है। इन दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों शिवराज सिंह चौहान व डा. रमन सिंह को भाजपा आदर्श मुख्यमंत्री बताती रही है और उसका दावा रहा है कि दोनों ने जनभावनाओं के अनुरूप काम किया है। साथी ही वे दोनों जनता की पहली पसंद भी हैं। एक तरफ जहां दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की छवि व कार्यशैली से भाजपा जीत का भरोसा करती रही है, वहीं प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मोदी की घोषणा का भी पार्टी को लाभ मिलने की उम्मीद है। मोदी ने भी इन दोनों राज्यों में पूरी रुचि लेकर चुनाव प्रचार किया। मोदी के प्रचार अभियान पर नजर दौड़ाएं तो एक बात साफ हो जाती है कि उन्होंने भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं की तुलना में कहीं ज्यादा जनसभाएं की हैं।
मध्य प्रदेश में उनकी 15 और छत्तीसगढ़ में 12 जनसभाएं हुईं। जनसभाओं की यह संख्या भाजपा ही नहीं, कांग्रेस के प्रमुख नेताओं से कहीं ज्यादा है। सूत्रों का कहना है कि मोदी को गुजरात से बाहर निकालकर राष्ट्रीय स्तर का नेता साबित करने का यह पार्टी के लिए सबसे बेहतर अवसर था, जिसका उसने भरपूर लाभ उठाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, चुनाव नतीजे पार्टी को यह भी यह संदेश दे जाएंगे कि मोदी के सामने आने से पार्टी को क्या नफा और क्या नुकसान हुआ है। मोदी के असर को तय करने में इन दो राज्यों के नतीजों की महत्वपूर्ण भूमिका इसलिए भी रहेगी, क्योंकि ये ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा दो कार्यकाल से सत्ता में है। वहीं, राजस्थान व दिल्ली में भाजपा को सफलता मिलने की स्थिति में इसे वर्तमान कांग्रेस सरकारों की 'एंटी- इन्कम्बेंसी' से जोड़कर देखा जा सकता है, मगर ये दोनों राज्य इससे अलग हैं। साथ ही, यहां भाजपा की सीधी टक्कर कांग्रेस से है। वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया का कहना है कि दोनों राज्यों के चुनाव नतीजे मोदी के लिए 'अग्निपरीक्षा' साबित होंगे। मोदी इसमें सफल रहे तो मध्य प्रदेश का रास्ता दिल्ली से जा मिलेगा और असफल रहने पर यह रास्ता यहीं थमने लगेगा। चुनाव नतीजे रविवार को आ जाएंगे। इन नतीजों का उन सभी लोगों को इंतजार है जो 'मोदी के असर' पर नजर गड़ाए हुए हैं, क्योंकि इन नतीजों के आधार पर ही राजनीति का रास्ता आगे बढ़ेगा। यही वजह है कि इन विधानसभा चुनावों को केंद्र की सत्ता के खेल का 'सेमी फाइनल' भी कहा जा रहा है।