उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को बिजली आपूर्ति का नया शेड्यूल लागू किया। इसके तहत जिला मुख्यालय, मंडल मुख्यालय, महानगर व औद्योगिक क्षेत्र को 24 घंटे, तहसील एवं बुंदेलखंड क्षेत्र को 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई है। यहां के गोमतीनगर मंे आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर भवन का लोकार्पण करने के साथ-साथ 200 उपकेंद्रों का उद्घाटन भी किया। इनमें पारेषण क्षेत्र के 220 केवी के 6 उपकेंद्र (कुल लागत 373.34 करोड़ रुपये), 132 केवी के 20 उपकेंद्र (कुल लागत 681.83 करोड़ रुपये) एवं वितरण क्षेत्र के 33/11 केवी के 174 उपकेंद्र (कुल लागत 872.72 करोड़ रुपये) शामिल हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी सरकार ने जनता से तीन साल पहले किए गए वादे को पूरा करके फिर एक बार यह साबित कर दिया है कि समाजवादियों का काम बोलता है। वर्ष 2012 में जब मौजूदा सरकार सत्ता में आई, तब प्रदेश की विद्युत व्यवस्था एकदम जर्जर हो चुकी थी। समाजवादी सरकार ने स्थिति का आकलन करने के साथ-साथ इसे सुधारने की दिशा में निर्णय लेने शुरू किए, जिनका परिणाम आज दिखाई दे रहा है।अखिलेश ने कहा कि सत्ता संभालने के समय प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता जितनी थी, अब दोगुनी की जा चुकी है। यह पहली सरकार है, जिसने स्वयं द्वारा शिलान्यास किए गए बिजलीघर का उद्घाटन अपने ही कार्यकाल में किया है।
अलीगढ़ में स्थापित किए जा रहे सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट के शिलान्यास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे जुड़ी जापान की टीम ने उन्हें नेताजी द्वारा स्थापित कराए गए एक बिजलीघर के शिलान्यास का चित्र दिखाया था। अखिलेश ने कहा कि आज लागू किए गए विद्युत आपूर्ति शेड्यूल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। भविष्य में किसानों की सुविधा के लिए इसे 24 घंटे किए जाने की व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा राज्यमंत्री वसीम अहमद ने कहा, "समाजवादी सरकार ने विद्युत व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए हैं, जिसके चलते आज हम विद्युत आपूर्ति की दिशा में नई ऊंचाइयों को छू पा रहे हैं।" ऊर्जा राज्यमंत्री शैलेंद्र यादव 'ललई' ने कहा कि आज का दिन प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। बिजली आपूर्ति को व्यवस्थित करने की दिशा में जितना कार्य समाजवादी सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों के अंदर किया है, उतना पिछले 40 वर्षो में नहीं हुआ था।मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विद्युत व्यवस्था को सुधारने के लिए व्यापक निर्णय लेकर उन्हें लागू किया गया। वर्ष 2012-13 में ऊर्जा विभाग का बजट लगभग 09 हजार करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर लगभग 51 हजार करोड़ रुपये हो चुका है। ऊर्जा विभाग द्वारा विद्युत आपूर्ति में सुधार के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने लोकल फॉल्ट को तेजी से ठीक करने की जरूरत पर बल दिया। प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में विद्युत आपूर्ति के जो लक्ष्य राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किए गए थे, वे आज पूरे हो रहे हैं।
पिछले साढ़े चार वर्षो में ऊर्जा विभाग ने उत्पादन, पारेषण तथा वितरण को समान एवं प्रभावी रूप से विकसित करने पर जोर दिया। इन तीनों क्षेत्रों में अवस्थापना विकास पर पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर काम हुआ। इसी काम के चलते आज जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील एवं बुंदेलखंड क्षेत्र में 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति संभव हो पा रही है।प्रमुख सचिव ने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के प्रभावी निस्तारण एवं अनुश्रवण के लिए केंद्रीकृत उपभोक्ता सेवा केंद्र एवं ब्लॉक स्तर पर विद्युत सुविधा केंद्रों का शुभारंभ किया गया है। बिजली का बिल जमा करने के लिए आईटी आधारित ऑनलाइन बिलिंग प्रणाली लागू की जा चुकी है, जिससे अब तक 33 लाख उपभोक्ता जोड़े जा चुके हैं।उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तक एक करोड़ उपभोक्ताओं को इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मोबाइल एप के माध्यम से उपभोक्ता का घर पर ही बिजली का बिल सृजित कर वितरण की व्यवस्था और प्रदेश के 40 हजार जनसुविधा केंद्रों के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था की गई है।इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री राजेंद्र चैधरी, बलवंत सिंह रामूवालिया, अरविंद कुमार सिंह गोप, अभिषेक मिश्र, रामगोविंद चैधरी, शारदा प्रताप शुक्ल, डॉ. एस.पी. यादव, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार आलोक रंजन, मुख्यमंत्री के सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा सहित ऊर्जा विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।