लाहौल-स्पीति जिला की दुर्गम पिन घाटी में विशेष सहायता शिविर और ट्रैकिंग अभियान के लिए गई थल सेना की पश्चिमी कमान की एक टीम ने पिन पार्वती दर्रे को पार करते हुए शनिवार को कुल्लू जिला की मणिकर्ण घाटी में प्रवेश किया। ब्रिगेडियर राजीव घई के नेतृत्व में इस टीम ने अपने अभियान के दौरान 18 व 19 जून को पिन घाटी के बाशिंदों के लिए विशेष सहायता शिविर भी लगाया। ब्रिगेडियर घई ने बताया कि लगभग 9200 फुट की उंचाई पर स्थित पिन घाटी में लगाए गए इस शिविर के दौरान स्थानीय निवासियों के मैडिकल व डेंटल चैकअप के अलावा उनके पशुओं का भी उपचार किया गया। इसके अलावा स्कूली बच्चों को लेखन सामग्री वितरित की गई तथा सैन्य अधिकारियों ने उनका मार्गदर्शन भी किया। क्षेत्र के लगभग 400 लोगों ने इस विशेष सहायता शिविर का लाभ उठाया।
शिविर के दौरान सैन्य अधिकारियों व जवानों ने स्थानीय युवाओं के साथ क्रिकेट मैच भी खेला। ब्रिगेडियर घई ने बताया कि पिन घाटी की भौगोलिक परिस्थितियां बहुत ही कठिन हैं और यह इलाका साल में लगभग छह महीनों तक बर्फ से ढका रहता है। यहां के बाशिंदों की सुविधा के लिए सेना की पश्चिमी कमान ने विशेष पहल करते हुए सहायता शिविर का आयोजन किया। शिविर के बाद 20 जून को सेना के इस दल ने अपना ट्रैकिंग अभियान शुरू किया और पिन पार्वती दर्रे को पार करते हुए यह दल 25 जून को मणिकर्ण घाटी में पहुंचा। इस दल में ब्रिगेडियर राजीव घई के अलावा कर्नल हिमांशु, अन्य अधिकारी, जेसीओ व जवान भी शामिल हैं।