सफीदों रोड़ आर्य समाज में आयोजित यज्ञ व साप्ताहिक सत्संग के उपलक्ष पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्मवीर आर्य ने बताया कि स्वर्ग की कामना करने वाले को यज्ञ करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह धरती ही स्वर्ग या नरक है। सुख विशेष का नाम स्वर्ग और दुख विशेष का नाम नरक बताया। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि हमें पर्यावरण का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि पर्यावरण स्वच्छ होगा तो हम स्वस्थ होंगे। पर्यावरण को स्वच्छ करने में यज्ञ की विशेष भूमिका बताई। उन्होंने बताया कि यज्ञ केवल भारतीय परंपरा नहीं है बल्कि यह विश्व स्तर की परंपरा है जिसे संसार के सभी कोनों में किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यज्ञ केवल अपने लिए नहीं किया जाता है बल्कि प्राणी मात्र के कल्याण के लिए किया जाता है। कार्यक्रम के समापन पर धर्मवीर आर्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक पेड़ -पौधे लगाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी पृथ्वी को हरा -भरा रखने के लिए अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने चाहिए यह भी यज्ञ का ही एक अंग है। जिस प्रकार हवन के माध्यम से हमारा वायुमंडल शुद्ध व स्वच्छ होता है ठीक उसी प्रकार से पेड़ पौधों के माध्यम से न केवल हमें ऑक्सीजन मिलती है बल्कि बहुमूल्य औषधियां, फल-फूल भी मिलते हैं। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण वैदिक रीति रिवाजों अर्थार्थ यज्ञ -हवन का छूटना व पेड़ों की कटाई बताया। आज देश के कई राज्य सूखे की चपेट में हैं यदि हमें इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से छुटकारा चाहिए तो हमें अधिक से अधिक यज्ञ -हवन करने चाहिए व ज्यादा से ज्यादा पेड़ -पौधे लगाने चाहिए जिससे कि हमारी पृथ्वी फिर से प्राणी मात्र के लिए स्वर्ग बन जाए । इस अवसर पर आर्य हरिकेश नैन, प्रदीप सुलचानी, सुनील आर्य, अनिल बडगुज्जर, मास्टर जगदीश, तेजस आर्य, राकेश बेनीवाल ,नवीन चहल ,भगत सिंह, ,दिपक सैनी ,गौरव सैनी ,वीरेंद्र सैनी ,अभिषेक ,सागर सैनी ,कविता आर्या ,सावित्री देवी ,मनीषा आर्या ,सोम किरण आर्या ,श्रुति आर्या ,तानिया सैनी व साक्षी सैनी आदि उपस्थित रहे।