केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने बेहतर हवाई सेवाओं और इसके विकास के लिए विभिन्न् हितधारकों से नए विचार देने की अपील की है। वे आज राजधानी में हवाई अड्डा विपणन्न सम्मेलन का उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत वृद्धि की राह पर है जहां अपार आर्थिक संभावनाएं हैं। हवाई यात्रियों की संख्या में वृद्धि के साथ ही साथ हमें कार्गो यातायात की वृद्धि को भी महत्व देने की जरूरत है। हमें पूर्व के अनुभवों से प्रेरणा लेकर भविष्य की जरूरतों के अनुसार बनाने की आवश्यकता है।सम्मेलन को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि मजबूत मध्यम आय वर्ग के लोगों के कारण भारत में हवाई सेवाओं के लिए भारी संभावना है और इसमें प्रभावी विपणन्न की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन के क्षेत्र में उड्डयन क्षेत्र की महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हवाई संपर्क में और सुधार किया गया है। मंत्री महोदय ने संभी विभागों से अपील की है कि वे मिलकर हवाई सेवा में सुधार लाएं।
इस मौके पर नागरिक उड्डयन के महानिदेशक श्रीमती एम सत्यावंती ने सुरक्षा परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि व्यापार का सृजन केवल उन यात्रियों से होगा जो हवाई अड्डों का प्रयोग करते हैं। उन्होंने हवाई अड्डों के अधिकतम प्रयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया और कहा कि यात्रियों की जरूरतों का ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने हवाई अड्डों पर व्यवस्था संभालने के लिए प्रशिक्षित श्रमशक्ति की जरूरत को रेखांकित किया।भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) के अध्यक्ष श्री आरके श्रीवास्तव ने कहा कि प्रस्तावित वृद्धि के बावजूद हमारे यहां न्यूनतम तीक्ष्ण बाजार की स्थिति बरकरार है। अमेरिका में प्रति व्यक्ति प्रति दौरा 2 की तुलना में हमारे यहां यह केवल 0.4 है। उन्होंने बताया कि भारत में 30 करोड़ लोग मध्य आय वर्ग के लोग हैं जो साल में कम से कम एक बार हवाई यात्रा करते हैं। इससे पता चलता है कि देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि का प्रस्ताव यात्रियों और कार्गो दोनों क्षेत्रों मे स्थायी हवाई यातायात प्रवृत्ति सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि एएआई इस प्रस्तावित वृद्धि को पाने के लिए अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रतियोगी रूप से काम करेगी।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में एएआई ने 33 हवाई अड्डों का विकास पूरा कर लिया है। इनमें 10 हवाई अड्डों की क्षमता 300 लाख की प्रति वर्ष यात्री के परिपूर्णता स्तर को पा लिया है। इनके आगे ओर विकास करने की जरूरत है। इस वक्त 2500 लाख की उपलब्ध टर्मिनल क्षमता के बारे में बाते हुए उन्होंने कहा कि इस समय केवल 1900 लाख का ही प्रयोग हो रहा है। लेकिन मौजूदा वृद्धि की प्रवृत्ति को देखते हुए अगले दस वर्षों में इनकी क्षमता 5720 लाख करने की जरूरत होगी। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि एएआई द्वारा 20 हजार करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। इसमें एरोड्राम स्कीम पर 18000 करोड़, सूचना एवं तकनीक के उन्नयन पर 128 करोड़ और हवाई अड्डे के सिस्टम पर 865 करोड़ खर्च होना है। इसके अलावा हवाई संचालन सेवा पर 550 करोड़ से अधिक और ग्राउंड सुरक्षा और सुरक्षा उपकरणों पर 515 करोड़ खर्च करने की जरूरत है। एएआई ने 11 हवाई अड्डों के विकास के लिए पहले ही पीएमसी को इस काम के लिए शामिल कर लिया है। विकसित होने वाले इन हवाई अड्डों में अगरतला ,गुवाहाटी, श्रीनगर, लखनऊ, पुणे,पटना,त्रिची चेन्नई और लेह को शामिल किया गया है।एक दिन के इस सम्मेलन में क्षेत्रीय और दूर-दराज के हवाई संपर्क वाले इलाकों में हवाई सेवा का विकास, बेहतर सेवा वितरण, उड्डयन को आर्थिक और वातावरण की दृष्टिकोण से स्थायी बनाने, हवाई कार्गो उद्योग को बेहतर करने तथा वाणिज्यिक मानकों में सुधार लाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई जिससे हवाई अड्डे स्वतंत्र रूप से लाभ कमाने वाले इकाइयां बन सकें।