पंजाब ने राष्ट्रीय एकता परिषद पर सन 1984 के निर्दोष सिक्खों के कत्लेआम के आरोपियों को सजाएं देने में व्यवस्था की असफलता को दुरस्त करने की जरूरत पर बल देते हुये पुन: विश्वास की बहाली के लिए साम्प्रदायिक हिंसा के पश्चात न्याय को यकीनी बनाने की जोरदार वकालत की हे। आज यहां विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में हुई राष्ट्रीय एकता परिषद की 16वीं बैठक में पंजाब सरकार की प्रतिनिधिता करते हुये सूचना एवं लोक सम्पर्क मंत्री स. बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि 1984 के सिक्ख कत्लेआम के आरोपियों को सजा देने में असफलता और उस पश्चात कातिलों को उच्च पदों से नवाज कर किसी भी सुरत में शांति , आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को प्रफुल्लित नही किया जा सकता है। उन्होने कहा कि व्यवस्था की तीस के लम्बे इंतजार के पश्चात पीड़ितों को न्याय देने में असफलता ने ना केवल लोगों के मनों में रोष पैदा किया है बल्कि बेगानगी की भावना को भी बड़ा योगदान डाला है। उन्होने कहा कि ऐसे मुददो को हल करने में राष्ट्रीय एकता परिषद को बेहद गंभीरता दिखानी चाहिए क्योकि यह परिषद अपनी परिभाषा अनुसार अपने लोगों की जज्बाती सांझ को मजबूत करने का सबसे उचित मंच है। राजनीतिक नेताओं की संजीदगी और निरपेक्षता का विश्वास लोगों के मनों में पेैदा करने की जरूरत पर बल देते हुये स. मजीठिया ने मिसाली नेतृत्व एवं प्रभावशाली पुलिस व्यवस्था की स्थापना की भी बात की। उन्होने कहा कि राजनीतिक नेताओं को भी वोट बैक की संकीर्ण राजनीति से उपर उठकर समस्त भाईचारों की प्रतिनिधिता करते हुये नफरत पैदा करने वाली शक्तियों के प्रति सुचेत रहना चाहिए।
मजीठिया ने इस बात पर भी बल दिया कि पंजाब देश के कुछ राज्यों में से एक है जहां 1947 के स्वतंत्रता के पश्चात भोगे संताप के बाद आज तक कभी साम्प्रदायक या जाति आधारित हिंसा नही हुई । उन्होने कहा कि गत दो वर्षो के दौरान देश के लगभग 20 राज्यों में सैंकडों व्यक्ति साम्प्रदायक टकराव की भेंट चढ़े है और हजारों अन्य घायल हुये है पंरतु पंजाब ऐसी किसी एक भी घटना से मुक्त रहा है। उन्होने कहा कि पंजाब में शांति और साम्प्रदायक सदभावना का वातावरण महज एक इतफाक नही है। उन्होने कहा कि दस दिन पूर्व पंजाब पुलिस ने एक सीमापार राज्य के प्रमुख हिन्दु नेताओं को निशाना बनाने की खतरनाक साजिश को बेनकाब किया है जो इस बात की प्रतीक है की हम किस प्रकार राज्य में साम्प्रदायक सांझ को यकीनी बनाने के लिए हमेशा सुचेत रहते हैं।उन्होने कहा कि राजनीतिक नेताओं की संजीदगी, संवेदनशीलता और निरपेक्षता ने लोगों के मनोबल और विश्वास को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है उन्होने कहा कि पंजाब भागयशाली है कि उसको मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल जैसा सूझबान नेता मिला है जिनकी सोच है यदि पंजाब ने आगे बढ़ना है तो समाज के समस्त वर्गो को इकठे होकर चलना पड़ेगा। उन्होने कहा कि बादल साहिब के संगत दर्शन कार्यक्रम अपने आप में उनके लोगों के मनों और हृदयों से सांझ का एक बड़ा जरिया है।
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आकड़ों का विवरण देते हुये स. मजीठिया ने कहा कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में से 1.33 प्रतिशत पंजाब में घटित है। पंजाब की शिअद -भाजपा सरकार की महिलाओं की सुरक्षा के प्रति वचनबद्धता को देाहराते हुये स. मजीठिया ने बताया कि एक विलक्षण 181 पुलिस हैल्पलाईन,जिला स्तर पर सैक्सुअल असालट रिस्पोंस टीमों का गठन 500 महिला पुलिस इंस्पेैक्टरों की चल रही भर्ती प्रक्रिया, गत चार वर्षो के दौरान 3224 महिला सिपाहियों की भर्ती और महिलाओं के खिलाफ तेजी से सुनवाई के लिए बीस फास्ट टै्रक अदालतों का गठन पंजाब सरकार के प्रयास हैं।उन्होने आगे कहा कि पंजाब में देश में सबसे अधिक 32 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जातियों से संबंधित है और एक कल्याण राज्य के संकल्प को प्रतिबद्ध हमारी सरकार ने मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल की दूरदर्शिता स्वरूप आटा-दाल,बुढ़ाप और शगुन स्कीमें जैसी विलक्षण प्राथाएं चलाई गई है इसके अतिरिक्त एस सी/एस टी कानून 1989 तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए 17 विशेष अदालतों का गठन और ए डी जी पी/क्राइम के कार्यालय में एक एस पी और कमजोर वर्ग सैल का गठन हमारी सरकार के ओर प्रयास हैं। उन्होने कहा कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरों के आकड़ों अनुसार देश में अनुसूचित जातियों के विरूद्ध अपराधों के दर्ज मामलों में केवल 0.21 प्रतिशत ही पंजाब में दर्ज हुये है। लोक सम्पर्क मंत्री ने कहा है कि सोशल मीडिया की ही साकारात्मक भूमिका निभाने की बड़ी क्षमता है और सरकार को आम नागरिकों और विशेष तौर पर नवयुवकों को राष्ट्रीय एकता की प्रोत्साहन और नफरत फैलाने वाले प्रचार का मुकाबला करने के लिए इस उभर रहे मीडिया का प्रयोग के लिए उत्साहित करना चाहिए।
देश की स्वतंत्रता के संग्राम में शहीदें अजाम स. भगत सिंह और अन्य पंजाब के जन्में महान देशभक्तों की बेमिसाल कुर्बानियों को याद करते हुये स. मजीठिया ने कहा कि पता नही क्यों हमें भारत में कोई भारतीय नही मिलता?हमें केवल हिंदू या मुस्लमान, सिक्ख या ईसाई,ब्राहाण या दलित,उच्ची या नीची जातियां ही क्यों नजर आती हैं?मजीठिया ने उम्मीद व्यक्त की कि जिस प्रकार दिल्ली में एक नवयुवक लड़की के बलात्कार के पश्चात कत्ल ने समूचे देश का हिलाते हुये कानून बदलने और महिलाओं के लिए बेहतर सुरक्षा वातावरण सजृन के लिए मजबूत किया है उसी प्रकार मुज्जफरनगर की घटना भी भविष्य में देश में साम्प्रदायक सदभावना, शांति और सर्वपक्षीय विकास के लिए मार्ग दर्शक बनेगी।