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सरकार ओआरओपी लागू नहीं करना चाहती : पूर्व सैनिक

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 28 Aug 2015

Last updated on: Aug 28, 2015, 00:00 IST

एक रैंक एक पेंशन के मुद्दे पर एक और दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद पूर्व सैनिकों ने शुक्रवार को कहा कि राजग सरकार इस योजना के क्रियान्वयन का इरादा नहीं रखती। पूर्व सैनिकों के संयुक्त मंच के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त सतबीर सिंह ने अपने प्रदर्शनकारी साथियों से कहा, "सरकार ओआरओपी का क्रियान्वयन नहीं चाहती है।"उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के कुछ लोग एक रैंक एक पेंशन के मुद्दे को कठिन बना रहे हैं।सिंह ने कहा कि चूंकि सरकार प्रत्येक पांच वर्ष पर पेंशन में वृद्धि करने के अपने रुख से पीछे हटने को राजी नहीं है, लिहाजा वार्ता विफल हो गई है।

सरकार ने प्रारंभ में कहा था कि पेंशन प्रत्येक 10 वर्ष पर बढ़ाया जाएगा और पूर्व सैनिक प्रत्येक दो वर्ष पर ऐसा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। पूर्व सैनिक तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि भी चाहते हैं। सिंह के साथ जब पूर्व सैनिकों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार शाम को मिलने गया, तो वह उनसे नहीं मिले।सिंह ने कहा, "हम सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग के कार्यालय में थे। बार-बार फोन करने के बावजूद हमें बताया गया कि प्रधान सचिव प्रधानमंत्री के साथ व्यस्त हैं।"

उन्होंने कहा, "संयुक्त सचिव के माध्यम से हालांकि एक संदेश भेजा गया कि पेंशन वृद्धि प्रत्येक पांच वर्ष पर होगी। हमने समझौता करने से इंकार कर दिया।"उन्होंने कहा कि एक दिन पहले वार्ता सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही थी और उन्हें कुछ परिणाम की आशा थी। लेकिन सरकार के रुख से पूर्व सैनिकों को निराशा हाथ लगी।सिंह ने कहा, "हम सैनिक हैं, दुकानदार नहीं हैं।" उन्होंने इस गतिरोध के लिए नौकरशाहों को जिम्मेदार ठहराया।उन्होंने यहां प्रदर्शन स्थल पर अपने संबोधन में कहा, "हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि इस अन्याय के खिलाफ है। सरकार में बैठे लोग ओआरओपी के मुद्दे को कठिन बना रहे हैं। ईश्वर उन्हें सदबुद्धि दें।"

उन्होंने कहा, "सरकार का पहला प्रस्ताव ओआरओपी के अनुकूल नहीं था, लिहाजा हमने उसे खारिज कर दिया। दूसरे दिन बातचीत सकारात्मक थी, और हमने सोचा था कि कोई परिणाम निकल सकता है।"सरकार और पूर्व सैनिकों के बीच एक विवाद योजना के क्रियान्वयन की तिथि को लेकर है। पूर्व सैनिक इसका क्रियान्वयन अप्रैल 2014 से चाहते हैं, जबकि सरकार अप्रैल 2015 से चाहती है।यदि योजना अप्रैल 2014 से लागू होती है तो पूर्व सैनिकों को लगभग 12,000 करोड़ रुपये बकाए के रूप में भुगतान करना होगा।

पूर्व सैनिक दो महीने का बकाया छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन सरकार ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन की तिथि सितंबर 2014 रखा जाए। इसे भी खारिज कर दिया गया।सिंह ने कहा, "वे हमें 2011 के स्केल के अनुसार 2015 से ओआरओपी देना चाहते हैं, जो कि संभव नहीं है।"पूर्व सैनिकों ने सातवें वेतन आयोग के तहत पेंशन वृद्धि के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "हम अब कतई समझौता करने को तैयार नहीं हैं। हम अब समझौते के वे प्रस्ताव भी वापस ले रहे हैं, जिन्हें हमने पूर्व में पेश किए थे। आंदोलन जारी रहेगा।"पूर्व सैनिकों के आंदोलन का शुक्रवार 75वां दिन था। छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जबकि चार अस्पताल में भर्ती हैं।

 

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