पंजाब के किसानों को उनकी जमीन की व्यापारिक प्रयोग में पेश मुश्किलों के हल के लिए पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने केंद्रीय वातावरण मंत्रालय के मंत्री श्री प्रकाश जावेडकर से मुलाकात करके 'पंजाब लैंड प्रीजर्वेशन एक्ट तहत ली हुई अनावश्यक रोकों को हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो भूमि खेती योग्य है उसपर किसान खेती कर रहें हैं। उस भूमि को केंद्र सरकार द्वारा 'पंजाब लैंड प्रीजर्वेशन एक्ट तहत लगाई हुई रोकों को हटाया जाये।आज यहां राज्य के उच्च अधिकारियों सहित केंद्रीय मंत्री जावेडकर से मुलाकात के दौरान स. बादल ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों संबंधी सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई रोक नही लगाई गई है परंतु केंद्र सरकार द्वारा लगाई हुई रोक के कारण पंजाब सरकार ऐसे क्षेत्रों की संपूर्ण योजनाबंदी एवं विकास करने से असक्षम है। इसपर केंद्रीय मंत्री ने स. बादल को भरोसा दिलाया कि इस संपूर्ण मसले का एक महीने के भीतर हल कर दिया जायेगा। उन्होंने साथ ही विभागीय अधिकारियों को इस संबंधी प्रस्ताव तुरंत पेश करने के आदेश दिए।
बादल ने साथ ही कहा कि चंडीगढ़ में सुखना झील के समीप क्षेत्र को (इकॉलौजीकल सैंसटिव एरिया) प्राकृतिक तौर पर संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर अधिसूचित किया जाये क्योंकि पंजाब सरकार द्वारा पहले ही 13 जंगली जीव रखों (वाइलड लाइफ सैंचूरी) के इर्द-गिर्द क्षेत्रों को (इको सैंसटिव जोन) प्राकृतिक तौर पर संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर नोटीफाई करने संबंधी प्रस्ताव केंद्रीय वातावरण मंत्रालय को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय हाई पावर्ड कमेटी द्वारा की सिफारिशों के अनुकूल है जिस तहत इको सैंसटिव जोन के 100 मीटर घेरे को सुरक्षित क्षेत्र घोषित की सिफारिश की जाती है। स. बादल ने साथ ही कहा कि कांसल गांव को ईको सैंसटिव जोन के तहत अन्य रोकों के बोझ अधीन ना लाया जाये और इस संबंधी पंजाब सरकार द्वारा केंद्रीय शासित प्रदेश चंडीगढ़ एवं हरियाणा से मुद्दा पहले ही विचार किया जा चुका है।
वन क्षेत्र एक्ट, 2006 तहत अनुसूचित कबीलों के अधिकारों की रक्षा के लिए लगाई हुई तहत किसी भी कार्य के लिए मंजूरी प्रमाण-पत्र संबंधित उपायुक्तों से लेने की मद हटाने का मुद्दा उठाते हुये स. बादल ने कहा कि केंद्रीय जनगणना अनुसार पंजाब में अनुसूचित कबीलों की कोई जनसंख्या नही है जिससे ऐसे रोकों को हटाया जाना उचित होगा। इस संबंधी कंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार एक सार्वजनिक सूचना जारी करके अपने स्तर पर इस मसले का हल कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस संबंधी केंद्रीय वातावरण मंत्रालय द्वारा आवश्यक कार्रवाई तुरंत कर दी जायेगी।उत्तरीय राज्यों में एग्रो फॉरेस्ट्री को और विकसित करने के लिए स. बादल ने केंद्रीय मंत्री को सुझाव दिया कि स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट लुधियाना को फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट, देहरादून के उपकेंद्र के तौर पर विकसित किया जाये जिससे उत्तरीय राज्यों को बड़ा लाभ मिल सकेगा। श्री जावेडकर ने कहा कि वह इस प्रस्ताव को शेष संबंधित विभागों से विचार कर शीध्र ही फैसला करेंगे।बैठक के दौरान मुख्य तौर पर संसद सदस्य प्रेम सिंह चंदूमाजरा, वन विभाग के प्रधान सचिव विश्वजीत खन्ना, स्थानीय आयुक्त राहुल भंडारी, मुख्य वनपाल कुलदीप कुमार उपस्थित थे।