वाणिज्य विभाग संबंधी राज्यसभा की स्थायी संसदीय समिति के अध्यक्ष एवं वर्तमान राज्यसभा सदस्य शान्ता कुमार ने प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह से औषधि-उद्योग में ब्राऊन फील्ड माध्यम से हाल ही में स्वीकृत विदेशी निवेश प्रस्तावों पर अतिशीघ्र प्रतिबन्ध लगाने का अनुरोध किया है। उन्होने कहा है कि सरकार द्वारा इन प्रस्तावों की स्वीकृति से विश्व में गुणात्मक जेनरिक दवाईयों के उत्पादन में अपनी पहचान बनाने वाले भारतीय दवाई उद्योग को गहरा धक्का पहुंचा है। प्रधानमंत्री को आज प्रेषित पत्र में शान्ता कुमार ने कहा है कि वाणिज्य विभाग संबंधी राज्यसभा की स्थायी संसदीय समिति ने गत 13 अगस्त को संसद में 'औषधि क्षेत्र में विदेशी निवेश पर 110 वां प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। समिति ने फार्मा उद्योग में ब्राऊन फील्ड माध्यम से विदेशी निवेश पर स्पष्ट अकुंश लगाने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट प्रस्तुत करने के तीन दिन बाद ही प्रधानमंत्री ने एक बैठक में करोड़ो रूपये की लागत बाले ब्राऊन फील्ड विदेशी निवेशों को हरी झंडी दे दी।
शान्ता कुमार ने कहा कि भारत विश्व के 200 देशों को लगभग 45,000 करोड रूपये की दवाईयां निर्यात करता है और 'विश्व की फार्मेसी के रूप में वि यात है। उन्होंने कहा कि 'यूनीसेफ जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्था भी 60 प्रतिशत जेनरिक दवाईयों का आयत भारतीय बाजार से करती है। उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय दवाई कंपनियों द्वारा निर्मित 61 ब्रांडिड दवाईयों के पेटेंट अगले वर्ष समाप्त हो रहे हैं। यह विदेशी कंपनियां भारतीय दवाई कंपनियों का अधिग्रहण कर भारत के दवाई बाजार पर एकाधिकार स्थापित करना चाहती है ताकि भारतीय दवाई उद्योग जिसके पास जेनरिक दवाईयों बनाने के लिए संपूर्ण आधारभूत ढाचा उपलब्ध है, पेटेंट समाप्ति से उत्पन्न स्थिति से पूर्ण लाभ से वंचित रह सके।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार का उदाहरण देते हुए शान्ता कुमार ने कहा कि विदेशी कंपनी बायर द्वारा कैंसर की एक दवाई 2,80,000 रूपये में बेची जाती थी, जिसे हैदराबाद की एक कंपनी ने कंपलसरी लाईसैंसिंग के प्रावधानों के तहत 8,800 रूपये में बनाया हैं उन्होने कहा कि लूट की यह खुली छूट सरकार की अदूरदर्शिता का परिणाम हैं उन्होने कहा कि ऐसी बहुत सारी जीवन रक्षक दवाईयों है जो भारी कीमतों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बेची जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार से कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि होगी तथा गरीबों को कम कीमत पर दवाई नहीं मिलेगी।शान्ता कुमार ने कहा कि समिति को ग्रीन फील्ड के माध्यम से विदेशी निवेश पर कोई आपति नहीं है। उन्होने प्रधानमंत्री को समिति की रिपोर्ट भी प्रेषित की है।