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पटना , 26 Dec 2012
Last updated on: Dec 26, 2012, 00:00 IST
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के 58वें राष्ट्रीय अधिवेषन का उद्घाटन आज जय प्रभा ब्लड बैंक के मैदान में भारत सरकार के विदेष मंत्रालय के पूर्व सचिव मा. जे.सी. शर्मा ने माँ सरस्वती एवं स्वामी विवेकानन्द के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया । स्वागत अध्यक्ष बाबू नवल किषोर ने स्वागत भाषण में देष भर से आये प्रतिनिधियों एवं अतिथियों का स्वागत किया । उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. पी. मुरली मनोहर ने बताया कि अभाविप देष ही नहीं विष्व का अनूठा छात्र संगठन है । इस अधिवेषन में अंडमान निकोवार से लेकर लेह-लद्दाख तथा जम्मू कष्मीर से कन्या कुमारी तक सम्पूर्ण भारत के कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं । विद्यार्थी परिषद् छात्रों में पढ़ाई के साथ देषभक्ति की भावना जागृत करने का काम करती है । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मा0 जे. सी. शर्मा जी ने बताया किसी भी देष की स्थिति उसकी षिक्षा व्यवस्था से आंकी जाती है । भारत ज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है । लेकिन इस ज्ञान शक्ति का मुख्य केन्द्र विन्दु बिहार रहा है । भारत तब तक सम्पन्न व उन्नत था जब तक भारत में ज्ञान सर्वोपरि था । हमने ज्ञान के क्षेत्र में अपना स्थान खोया है । खोये स्थान को प्राप्त करने के लिए भारत को पूनर्जीवित होकर ज्ञान के क्षेत्र में मजबूत होना पड़ेगा । बख्तियार खिलजी ने जब से नालंदा विष्वविद्यालय में आग लगाई उसके बाद से ही ज्ञान शक्ति का हªास हुआ है । हम विष्व की सबसे बड़ी ज्ञान शक्ति थे, हमें आत्मविमोचन की आवष्यकता है । भारत को विष्व गुरू बनाने के लिए षिक्षा क्षेत्र को उन्नत बनाना होगा । इसी बिहार के नालंदा में 44 देषों के छात्र अध्ययन करते थे । आज भी भारतीय विष्वविद्यालयों में लगभग 30 हजार विदेषी छात्र अध्ययनरत हैं । उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के जन्म के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं । यह अत्यन्त प्रसन्नता का विषय है, स्वामी जी रूढ़ीवाद के विरोधी थे, उन्होंने सबसे ऊपर ज्ञान को रखा । आज विद्यार्थी परिषद् अन्य छात्र संगठनों से अलग ज्ञान, शील, एकता के भाव को लेकर चल रहा है । परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उमेष दत्त जी ने मुख्य अतिथि जे.सी. शर्मा जी को अधिवेषन की स्मृति सदैव बनाये रखने के लिए स्मृति चिन्ह भेंट किया । आभार ज्ञापन स्वागत समिति के महामंत्री डा. संजीव चौरसिया एवं संचालन राजेष सिन्हा ने किया ।इस अवसर पर अधिवेषन संयोजक डा. नरेन्द्र कुमार सिंह, प्रदेष अध्यक्ष डा. कामाख्या प्रसाद, प्रदेष मंत्री प्रवीण कुमार सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह मा. दत्तात्रेय होसबले, बिहार के उपमुख्यमंत्री मा. सुषील कुमार मोदी सहित पटना नगर के गणमान्य नागरिक एवं देष भर से आये हुए प्रतिनिधि उपस्थित रहे । इससे पूर्व आज प्रातः से प्रांतषः बैठकें सम्पन्न हुई तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महामंत्री द्वारा ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ । ध्वजारोहण के पष्चात् वन्देमातरम् गीत हुआ । राष्ट्रीय महामंत्री उमेष दत्त ने महामंत्री प्रतिवेदन में विद्यार्थी परिषद की देष भर में हुई आन्दोलनात्मक, रचनात्मक गतिविधियों का विस्तारपूर्वक लेखा-जोखा प्रतिनिधियों के समक्ष रखा । उन्होंने छात्र संघ चुनाव में देष भर में विजयी हुए विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया जिन्होंने शैक्षिक परिसरों में अभाविप की पताका फहरायी है । देर शाम ‘आज का छात्र व हमारा कार्य’ विषय पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा. मिलिन्द मराठे का भाषण प्रतिनिधियों के प्रबोधन हेतु हुआ । अंतिम सत्र में ‘देष की शैक्षणिक परिस्थिति’ एवं ‘भ्रष्ट केन्द्र सरकार दिषाहीनता एवं अराजकता की राह पर’ दो प्रस्ताव प्रतिनिधियों के समक्ष चर्चा हेतु रखे गये । षिक्षा का प्रस्ताव राष्ट्रीय महामंत्री उमेष दत्त एवं दूसरा प्रस्ताव राष्ट्रीय मंत्री विनय विद्रे ने रखा । इस अधिवेषन में मित्र राष्ट्र नेपाल के प्राज्ञिक विद्यार्थी परिषद् के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं । वहीं पूर्वोत्तर में अंतर्राज्यीय छात्र जीवन दर्षन के तहत् आये छात्र-छात्रायें भी अधिवेषन में अपनी सक्रिय सहभागिता दिखा रहे हैं ।