देशवासियों से 'अच्छे दिन आएंगे' का वादा कर आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पूर्ण बहुमत दिलाने में कामयाब रहे नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को देश का 14वां प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। शपथ ग्रहण की तारीख 26 मई को तय की गई है, जिस दिन वे शाम छह बजे पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। यह जानकारी राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में दी गई है। बयान के मुताबिक, "मोदी के भाजपा संसदीय दल का नेता चुने जाने और भाजपा को लोकसभा में पूर्ण बहुमत होने की वजह से राष्ट्रपति ने उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री नियुक्त किया है और उनसे मंत्रिमंडल के सदस्यों के नाम पेश करने का अनुरोध किया है।"राजग के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने गया था, जिसके बाद एसपीजी सुरक्षा घेरे में मोदी मुखर्जी से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे।
राष्ट्रपति से 15 मिनट की मुलाकात के बाद मोदी ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा, "राष्ट्रपति ने मुझे नियुक्ति का पत्र सौंपा है, शपथ ग्रहण समारोह यहां 26 मई की शाम छह बजे होगा।"
राष्ट्रपति से मिलने गए राजग के प्रतिनिधिमंडल में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और नितिन गडकरी, अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के एन.चंद्रबाबू नायडू, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता राम विलास पासवान और नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) प्रमुख निफियु रियो शामिल थे।सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन के अग्र प्रांगण में होने की संभावना है और भाजपा ने इसके लिए 2500 से अधिक अतिथियों की सूची तैयार की है। अग्र प्रांगण में शपथ लेने वाले मोदी तीसरे प्रधानमंत्री होंगे।
आशा और जिम्मेदारी की शुरुआत : मोदी
मोदी ने पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि जिम्मेदारी और आशा के एक नए युग की शुरुआत हो गई है। उन्होंने कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से हुआ उनका उदय भारतीय लोकतंत्र की महानता का सम्मान है।
मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों और संविधान लिखने वाले नेताओं को याद किया।
मोदी ने कहा कि उन्होंने कभी निराश महसूस नहीं किया। उन्होंने कहा, "सिर्फ आशावादी लोग दूसरे को प्रोत्साहित कर सकते हैं। हमें निराशावाद को छोड़ना होगा।"
खुद को अनुशासित जवान करार देते उन्होंने गरीबों के लिए काम करने का संकल्प लिया। मोदी ने कहा कि वह अपने सरकार का रिपोर्ट कार्ड अब से पांच साल बाद 2019 में पेश करेंगे।
उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी से ऊपर न समझा जाए और पार्टी की शानदार जीत का श्रेय संगठनात्मक शक्ति को दिया।
मोदी उस वक्त भावुक हो गए, जब उन्होंने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की बात का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने (मोदी) चुनाव में पार्टी का नेतृत्व कर कृपा की है।
मोदी ने कहा, "कृपया कर कृपा शब्द का इस्तेमाल न करें। एक बेटा अपनी मां पर कृपा नहीं करता है। बेटा समर्पण के साथ काम करता है। मैं भारत की तरह भाजपा को अपनी मां मानता हूं।"
उन्होंने कहा, "पार्टी ने मुझे सेवा करने का अवसर देकर मुझ पर कृपा की है।"
मोदी ने कहा कि पहली बार ऐसा हो रहा है जब भारत की आजादी के बाद जन्मे इंसान के नेतृत्व में सरकार का गठन होगा।
मोदी ने कहा, "हमें देश के लिए मरने का मौका नहीं मिला, लेकिन लोगों ने हमें देश के लिए जीने का अवसर दिया है। हर सेंकेंड और शरीर का हर हिस्सा देश की सेवा में इस्तेमाल होना चाहिए।"
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसे ऐतिहासिक घटना करार देते हुए कहा कि भारतीय राजनीति का ऐसा युग शुरू हुआ है जिस पर भाजपा का प्रभुत्व है और दूसरी सभी पार्टियां 'अन्य' बन गई हैं।
उन्होंने कहा, "यह एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक पल है। हालांकि, 1977 में जनता पार्टी को बहुमत मिला था और कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई थी, लेकिन वह विभिन्न पार्टियों का समूह थी। भाजपा पहली पार्टी है जिसने यह कमाल अकेले अपने दम पर कर दिखाया है।"
राजनाथ ने कहा कि वह बेहद खुश और रोमांचित हैं और इस दिन को पार्टी के विचारक दीनदयाल उपाध्याय के मजबूत, आत्मनिर्भर और स्वतंत्र भारत के सपने के पूरा होने का दिन करार दिया।
गौरतलब है कि हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 545 सदस्यीय लोकसभा में 282 सीटें हासिल हुई, जो पूर्ण बहुमत पाने वाली पहली गैर कांग्रेसी पार्टी बन गई है। कांग्रेस को चुनाव में सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा है और इसके सांसदों की संख्या सिमट कर 44 हो गई है।