हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि यह मेला किसान की मेहनत का सम्मान है और हरियाणा की कृषि शक्ति का उत्सव है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बन रहा है। इस यात्रा की सबसे बड़ी ताकत हमारे गांव, किसान और कृषि हैं।
किसान की मेहनत का पूरा मूल्य तभी मिलेगा जब वह बाजार की ताकत भी बने। इसी सोच से देशभर में फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का नेटवर्क बन रहा है। इसे मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी प्रदेश में पूरजोर बढ़ावा दे रहे हैं। छोटे किसानों के जुड़ने से लागत घटती है और आय बढ़ती है। मंत्री आज कुरुक्षेत्र के लाडवा के उप उष्णकटिबंधीय फल केंद्र में तीन दिवसीय 8वें मैंगो मेले के समापन अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इससे पहले कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा ने उप केंद्र की नर्सरी का निरीक्षण किया और पौधे तैयार करने की विधि की जानकारी ली। उप केंद्र परिसर में पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की। इसके साथ ही अलग अलग राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉलस का अवलोकन किया और आम की विभिन्न किस्मों में गहरी रुचि दिखाई।
कैबिनेट मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि मैंगो मेले में 200 से अधिक आम की किस्में प्रदर्शित की गई है जो हमारे किसानों के अनुभव, नवाचार और परिश्रम का परिणाम हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाना है तो खेती को भी भविष्य के अनुरूप ढालना होगा। दुनिया आज एआई की चर्चा कर रही है, इसका सबसे बड़ा लाभ हमारे किसान को मिलेगा।
मिट्टी में तत्व की कमी, सिंचाई का समय, लाभकारी फसल, रोग का संकेत, मंडी की मांग, यह पहले से पता चले तो समय बचेगा, लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि आज ड्रोन खेत सर्वेक्षण कर रहे हैं, एआई मिट्टी की सेहत जांच रहा है, मौसम की जानकारी मोबाइल तक पहुंच रही है। एआई आधारित डिजिटल अकाउंटिंग से किसान अपने मोबाइल पर ही खर्च-आमदनी का पूरा हिसाब रख सकता है।
यही स्मार्ट खेती का भविष्य है। तकनीक रास्ता दिखा सकती है, परंतु खेती की आत्मा किसान का अनुभव ही है। इसलिए परंपरा और तकनीक, दोनों साथ चलेंगे। मंत्री ने कहा कि भूमि जोत छोटी होती जा रही है, इसलिए सरकार किसानों को बागवानी फसले लगाने के लिए प्रेरित कर रही है। नया आम बाग लगाने पर 42 हजार रुपये प्रति एकड़ सब्सिडी दी जाती है।
साथ ही आम की फसल को भावांतर भरपाई योजना में भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। वर्ष 2022 में शुरू हुई प्राकृतिक खेती योजना धरती की सेहत बचाने, लागत घटाने और भविष्य सुरक्षित करने का संकल्प है। लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ भूमि पंजीकृत करवाई है, 24 हजार किसान 44 हजार एकड़ से अधिक पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
वर्ष 2025-26 में 20 हजार 727 एकड़ में प्राकृतिक खेती हुई और इस वर्ष प्राकृतिक खेती के लिए 30 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती में देसी गाय का विशेष महत्व है। वर्ष 2025 से देसी गाय आधारित जीवामृत-घनजीवामृत के लिए सब्सिडी बढ़ाकर 30 हजार रुपये की गई है।
इसके साथ साथ प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए चार ड्रम खरीदने हेतु प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये की सहायता भी दी जा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के एडीसी महेंद्र सिंह, बागवानी विभाग के महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सैनी, बागवानी विभाग के मिशन डायरेक्टर डा. मनोज कुमार, चेयरमैन डा. गणेश दत्त व अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।