भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCI) के सहयोग से 25 मई 2026 को सीआईआई उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय, सेक्टर 31-ए, चंडीगढ़ में उद्यमी जागरूकता एवं विशेष विक्रेता विकास कार्यक्रम (EA&SVDP) का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य MSME मंत्रालय की विभिन्न पहलों, विशेष रूप से राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (NSSH) योजना, के संबंध में जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम के माध्यम से मौजूदा एवं संभावित उद्यमियों को राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना के प्रति जागरूक बनाते हुए केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों एवं केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) द्वारा सार्वजनिक खरीद नीति के अंतर्गत निर्धारित 4 प्रतिशत खरीद लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान संभावित एवं मौजूदा दोनों प्रकार के उद्यमियों को NSSH योजना तथा MSME मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
संभावित उद्यमियों को अपने उद्यमों को औपचारिक स्वरूप देने के लिए उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण के महत्व से अवगत कराया गया, जबकि मौजूदा उद्यमियों को विक्रेता पंजीकरण प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों, CPSEs द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं, ई-टेंडरिंग प्रक्रिया, ऋण सुविधा विकल्पों तथा व्यापार विस्तार एवं स्थिरता हेतु बैंकों द्वारा उपलब्ध सब्सिडी संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) तथा आसपास के क्षेत्रों से 100 से अधिक मौजूदा एवं संभावित एससी-एसटी उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में श्री दीपक शर्मा (GeM), डॉ. दीपक (BBMB), श्रीमती चारण्या अंबाटी, डीजीएम (पावरग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया), श्री मोहित, प्रोक्योरमेंट मैनेजर (FCI), श्री वीरेंद्र मोंगिया, क्षेत्रीय प्रमुख (एक्ज़िम बैंक, चंडीगढ़), श्री मोहित, सहायक निदेशक (MSME DFO, लुधियाना), श्रीमती अमानत राय (DIC चंडीगढ़), श्री अनिल अरोड़ा (चार्टर्ड अकाउंटेंट, ICAI), श्रीमती अखिला अनिल, डीएम (S&P), IIT रोपड़, श्री विशाल धिमान, एजीएम (SBI चंडीगढ़) तथा श्री राजीव दत्त, एलडीएम (PNB चंडीगढ़) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब, लुधियाना के शाखा प्रभारी श्री सूर्य भूषण ने अपने उद्घाटन संबोधन में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए भारत सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नीति के अंतर्गत एससी/एसटी स्वामित्व वाले एमएसई से 4 प्रतिशत तथा महिला एमएसई से 3 प्रतिशत सार्वजनिक खरीद अनिवार्य की गई है।
इस कार्यक्रम ने मौजूदा एवं संभावित उद्यमियों तथा प्रमुख हितधारकों जैसे CPSEs, MSME, वित्तीय संस्थानों एवं अन्य MSME सहायता एजेंसियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में MSMEs, बैंकों, CPSEs तथा GeM के प्रतिनिधियों द्वारा वित्तीय सहायता, विक्रेता पैनल में शामिल होने की प्रक्रियाओं तथा संबंधित सेवाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई, जिससे MSME पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता मिली।