Wednesday, 22 July 2026

 

 

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राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के सियोल में अपने समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता की

दोनों मंत्रियों ने मजबूत रक्षा सम्बंधों और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपने संकल्प को दोहराया

Rajnath Singh, Union Defence Minister, Defence Minister of India, BJP, Bharatiya Janata Party, Ahn Gyu Back, Seoul
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सियोल , 20 May 2026

Last updated on: May 21, 2026, 12:27 IST

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री श्री आन ग्यू-बैक ने 20 मई, 2026 को सियोल में व्यापक द्विपक्षीय चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग के संपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करने के साथ-साथ उद्योग, उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों, सैन्य आदान-प्रदान, रसद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

दोनों पक्षों ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और दक्षिण कोरिया के क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टिकोण के बीच बढ़ते तालमेल को स्वीकार किया और एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने के साझा उद्देश्यों के अनुरूप रक्षा सम्बंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। द्विपक्षीय साझेदारी के बढ़ते दायरे और गहराई को दर्शाने वाले रक्षा सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

रक्षा साइबर क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने; भारत के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय और कोरिया के राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच प्रशिक्षण; और संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा सहयोग पर समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। इससे आपसी साझेदारी और अधिक मजबूत तथा बहुआयामी बन गई है। रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन मंत्री श्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की।

इसमें दोनों नेताओं ने संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात के लिए रास्ते बनाने हेतु सहयोगात्मक प्रयासों का लाभ उठाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के नवाचार इको-सिस्टम को समन्वित करने के लिए भारत-कोरिया रक्षा नवाचार त्वरक पारिस्थितिकी तंत्र की क्षमता को उजागर करने हेतु एक रोडमैप पर चर्चा की गई।

बाद में, श्री राजनाथ सिंह ने भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधि एक साथ आए। इस संवाद से रक्षा विनिर्माण, सह-विकास, सह-उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी में नए अवसरों की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण मंच तैयार हुआ।

व्यापार जगत के अग्रणियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक इको-सिस्टम और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देने की पहलों के तहत उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कोरियाई रक्षा कंपनियों को भारतीय उद्योग के साथ जुड़ाव मजबूत करने और दीर्घकालिक पारस्परिक लाभकारी सहयोग में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत पहल में संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कोरियाई और भारतीय कंपनियों के उत्साह की सराहना की। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “वाणिज्यिक क्षेत्र में भारत-कोरिया औद्योगिक सहयोग की सफलता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक भरोसेमंद साझेदारी की अपार संभावनाओं को दर्शाती है।  अब समय आ गया है कि इस सफल मॉडल को रक्षा क्षेत्र में भी विस्तारित किया जाए, जहां प्रौद्योगिकी, नवाचार, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक विश्वास तेजी से परस्पर जुड़ते जा रहे हैं।

कोरिया की तकनीकी उत्कृष्टता, भारत के विशाल आकार, प्रतिभा, विनिर्माण इको-सिस्टम और नवाचार क्षमताओं के साथ मिलकर सहयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है। हमारे दोनों देश मिलकर भविष्य के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और रक्षा प्रणालियों का विकास और उत्पादन कर सकते हैं। तकनीकी रूप से सक्षम देशों के बीच भरोसेमंद साझेदारी का रणनीतिक महत्व अत्यंत अधिक है।

बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और कोरिया एक साथ काम करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम हैं।” रक्षा मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि रक्षा विनिर्माण अब केवल पारंपरिक प्लेटफार्मों और उपकरणों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि आधुनिक रक्षा प्रणालियां उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर प्रौद्योगिकियों, सेंसर, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकियों, उन्नत सामग्रियों और अंतरिक्ष-आधारित क्षमताओं द्वारा संचालित हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा का भविष्य तेजी से नवाचार करने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में भारत और दक्षिण कोरिया के पास सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि भारत में स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई), निजी उद्योग, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थान और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से युक्त एक जीवंत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है।

उन्होंने कहा, “युवा भारतीय उद्यमी मानवरहित प्रणालियों, एआई-सक्षम प्लेटफार्म, साइबर सुरक्षा, उन्नत संचार और रक्षा सॉफ्टवेयर प्रणालियों सहित उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में लगातार योगदान दे रहे हैं। भारत-कोरिया रक्षा सहयोग का भविष्य नवाचार-आधारित सहयोग में निहित है।” इस कार्यक्रम के दौरान, एल एंड टी, भारत और हनवा कंपनी लिमिटेड के बीच दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

यह भारत-कोरिया रक्षा नवाचार और प्रौद्योगिकी साझेदारी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। इन समझौतों से दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने और प्रौद्योगिकी सहयोग तथा क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलने की आशा है। दक्षिण कोरिया में भारतीय प्रवासियों से बातचीत करते हुए रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुई अभूतपूर्व प्रगति के कारण भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में आए उछाल पर बल दिया।

उन्होंने कहा, “12-13 साल पहले भारत की छवि मज़बूत राष्ट्र की नहीं थी, लेकिन आज पिछले एक दशक में देश में हुए परिवर्तन के कारण दुनिया हमारी बातों को ध्यान से सुनती है। हम अब एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहे हैं जो दुनिया को समाधान प्रदान करती है। चाहे आंतरिक सुरक्षा हो या बाह्य सुरक्षा, हमारी नीति में मौलिक परिवर्तन आया है; यह दृढ़, साहसी, सुसंगत और निर्णायक बन गई है।”

श्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के एक मजबूत, आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र में परिवर्तन का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, “यह ऑपरेशन इस बात का सबूत है कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में, हम ' पहले प्रयोग न करें' की नीति का दृढ़ता से पालन करते हैं।

हालांकि, कई बार लोग हमारे संयम और शांति के प्रति प्रतिबद्धता को कमजोरी समझ लेते हैं। भारत अपनी 'पहले प्रयोग न करें' नीति के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए भी, किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा। यही है नया भारत।” रक्षा मंत्री ने रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और लगभग 40,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के अब तक के उच्चतम आंकड़े निरंतर प्रयासों का परिणाम हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा निर्यात अगले एक-दो वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये का हो जाएगा और रक्षा उत्पादन अगले कुछ महीनों में बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। रक्षा मंत्री ने अपने दो देशों के दौरे के अंतिम चरण, दक्षिण कोरिया की यात्रा की शुरुआत सियोल में कोरियाई युद्ध कब्रिस्तान में पुष्पांजलि अर्पित करके की।

उन्होंने कोरियाई युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दक्षिण कोरिया के लोगों के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त की और कहा कि उनका साहस, समर्पण और देशभक्ति की भावना प्रेरणा का एक शाश्वत स्रोत बनी रहेगी।

 

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