दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने मंगलवार को राजधानी के पहले समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) पुलिस स्टेशन को मंजूरी देते हुए वर्ष 2027 तक ‘ड्रग-फ्री दिल्ली’ का सामूहिक लक्ष्य निर्धारित किया। एक अधिकारी ने बताया कि उपराज्यपाल ने मंगलवार को 72 करोड़ रुपए कीमत के 1,700 किलोग्राम जब्त मादक पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए दो बड़े फैसलों की घोषणा की।
एलजी संधू ने कहा, "आज सुबह, मैं भी जहांगीरपुरी में जब्त नशीले पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया में शामिल हुआ। यह नशीले पदार्थों और संगठित अपराध के खिलाफ एक कड़ा संदेश है। उपराज्यपाल ने युवाओं से यह भी अपील की कि वे नशे से दूर रहें और एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीएं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "मैं युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे साथियों के दबाव के बजाय अपने जीवन के उद्देश्य को चुनें।
हम यह सुनिश्चित करेंगे कि राष्ट्रीय राजधानी में नशीले पदार्थों के लिए कोई बाजार, कोई पनाहगाह और कोई स्वीकार्यता न हो।" संधू ने कहा कि दिल्ली पुलिस राष्ट्रीय राजधानी में नशीले पदार्थों के पूरे तंत्र को खत्म करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा रही है। उन्होंने एक पोस्ट में कहा, "पीएम मोदी के विजन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प से प्रेरित होकर हमने 2027 तक 'नशामुक्त दिल्ली' का एक साझा लक्ष्य तय किया है।"
एलजी संधू ने कहा, "इस मिशन को मजबूत करने के लिए मुझे दिल्ली के पहले डेडिकेटेड एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) पुलिस स्टेशन को मंजूरी देने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। हमारी रणनीति का मुख्य जोर नशीले पदार्थों के तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने पर है, साथ ही 'नशा नाॅट कूल' जैसी पहलों के जरिए समुदाय में जागरूकता फैलाने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।"
इससे पहले, एलजी ने दिल्ली पुलिस के एक कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जिसमें कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में गिरफ्तार किए गए झपटमारों और चोरों से बरामद किए गए 12,600 से ज्यादा फोन उनके असली मालिकों को लौटाए गए। एलजी ने कहा,"मुझे बताया गया है कि इस साल, दिल्ली पुलिस ने लगभग 16,000 डिवाइस बरामद किए हैं, जिनकी रिकवरी दर 74 प्रतिशत है।
आज, सभी जिलों में एक साथ 12,600 से ज्यादा फोन उनके मालिकों को सौंपे जा रहे हैं। ये आंकड़े, टेक्नोलॉजी की मदद से की जाने वाली पुलिसिंग की ताकत को दिखाते हैं।" 'ऑपरेशन विश्वास' की तारीफ करते हुए एलजी ने नागरिकों से अपील की कि वे अपराध से निपटने में कानून लागू करने वाली एजेंसियों की मदद करें।
दरअसल, 'ऑपरेशन विश्वास' दिल्ली पुलिस की एक ऐसी पहल है जिसका मकसद खोए हुए, चोरी हुए या छीने गए मोबाइल को उनके असली मालिकों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा, "सिर्फ टेक्नोलॉजी से ही ऐसे नतीजे नहीं मिल सकते। हर बरामद फोन के पीछे पुलिसकर्मियों की कड़ी मेहनत होती है। कॉन्स्टेबल सुरागों का पीछा करते हैं, अधिकारी वेरिफिकेशन का तालमेल बैठाते हैं, टेक्निकल टीमें इनपुट का विश्लेषण करती हैं और जिला इकाइयां फोन की लोकेशन ट्रैक करती हैं।