अटारी हलके की अनाज मंडियों में गेहूं खरीद व्यवस्था को लेकर गंभीर अव्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। किसानों, आढ़तियों और मजदूरों ने मंडियों में भारी परेशानियों की शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियों और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने मंडियों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला। सांसद औजला ने मंडियों के दौरे के तीसरे दिन गांव बासरके गिल, चिचा भकना, होशियार नगर, राजा ताल, अटारी और मजीठा की मंडियों का निरीक्षण किया।
इस दौरान किसानों, आढ़तियों और मजदूरों ने उन्हें मंडियों में फैली अव्यवस्था, देरी और कथित कटौती को लेकर अपनी समस्याएं बताईं। जानकारी के अनुसार, ट्रांसपोर्ट टेंडर जारी होने के बावजूद समय पर गाड़ियां उपलब्ध नहीं करवाई जा रहीं। मजबूरी में आढ़ती निजी स्तर पर ट्रक और गाड़ियां लगाकर गेहूं की ढुलाई करवा रहे हैं, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल 20 से 25 रुपये तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, पहले से लंबित भुगतान न मिलने के कारण आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मंडी में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों की गेहूं में मनमानी कटौती की जा रही है।
अच्छी गुणवत्ता की फसल में भी 5 से 10 किलो तक कट लगाया जा रहा है। विरोध करने पर ट्रॉली वापस भेजने की धमकी दी जाती है, जिसके चलते किसान और आढ़ती मजबूरी में नुकसान सहने को विवश हैं। मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की हालत भी बेहद खराब बताई गई।
किसानों और मजदूरों के लिए पीने के पानी, शौचालय और ठहरने जैसी जरूरी व्यवस्थाओं का अभाव है। मजदूरों ने बताया कि जो काम 10 दिनों में पूरा होना चाहिए था, वह अब डेढ़ महीने तक खिंच रहा है, जिससे उनकी आमदनी और रोज़गार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
सांसद गुरजीत सिंह औजला ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था की विफलता है, जो अब “कैंसर” का रूप ले चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडरों के नाम पर करोड़ों रुपये की लूट हो रही है और राजनीतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर चुप्पी साधी जा रही है।
औजला ने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की कि अटारी सहित पूरे पंजाब की मंडियों में चल रही कथित लूट और अव्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि किसानों, आढ़तियों और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाना बेहद जरूरी है, ताकि लोगों को राहत मिल सके और मंडियों में भरोसे का माहौल कायम हो।