Wednesday, 22 July 2026

 

 

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सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में टेली-लॉ पहल पर राष्ट्रीय परामर्श को संबोधित किया

सी.पी. राधाकृष्णन ने टेली-लॉ पहल के तहत न्याय तक समावेशी और तकनीक-आधारित पहुंच का आह्वान किया

CP Radhakrishnan, Arjun Ram Meghwal, National Consultation 2026
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Armaan

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 29 Mar 2026

Last updated on: Mar 30, 2026, 09:30 IST

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान डिजाइन करने (दिशा) योजना की टेली-लॉ पहल पर राष्ट्रीय परामर्श 2026 को संबोधित किया और सभी नागरिकों के लिए सुलभ, किफायती और समय पर न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि न्याय तक पहुंच लोकतंत्र का आधार है और राष्ट्रीय परामर्श इस बात को सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि सभी के लिए उपलब्ध अधिकार है। उपराष्ट्रपति ने हाल ही में हुए कानूनी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि नए आपराधिक कानूनों में बदलाव, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और दक्षता में सुधार करके, अधिक नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव किया गया है।

उन्होंने शासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और टेली-मेडिसिन जैसी पहलों का उदाहरण दिया और टेली-लॉ पहल को कानूनी सेवाओं के लोकतंत्रीकरण का एक शक्तिशाली माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि मुकदमे से पहले कानूनी सलाह विवादों को शीघ्र सुलझाने, अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने और अदालतों पर बोझ कम करने में सहायक हो सकती है।

उपराष्ट्रपति ने भाषाई समावेशन के महत्व पर जोर देते हुए भारत के संविधान को कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताया और समझ और भागीदारी को बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषाओं में कानूनी परामर्श प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए समावेशिता, गुणवत्ता, जवाबदेही और उद्देश्यपूर्ण नवाचार पर जोर दिया।

उन्होंने कानूनी सेवाओं को अंतिम छोर विशेष रूप से महिलाओं, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित प्रयासों का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने न्याय तक पहुंच बढ़ाने में जमीनी स्तर पर योगदान देने वाले अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों, सामान्य सेवा केंद्रों, पैनल वकीलों और अन्य हितधारकों की सराहना की।

उन्होंने अधिक उत्तरदायी, समावेशी और न्यायसंगत कानूनी तंत्र के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने हेतु विधि और न्याय मंत्रालय और सहयोगी संगठनों की भी सराहना की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कानूनी जागरूकता, पहुंच और सेवा वितरण को बढ़ाने के उद्देश्य से कई ज्ञान-आधारित उत्पादों और प्रौद्योगिकी-संचालित नवाचारों का अनावरण किया।

उन्होंने "लाभार्थियों की आवाज" पुस्तिका 2025-26 की प्रशंसा की। इसमें उन व्यक्तियों की प्रेरक कहानियों को संकलित किया गया है जिनके जीवन पर टेली-लॉ सेवाओं के माध्यम से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने 'न्याय सेतु' नामक एक एआई-संचालित चैटबॉट भी लॉन्च किया। इसे नागरिकों और कानूनी सेवाओं के बीच एक डिजिटल सेतु के रूप में कार्य करने के लिए विकसित किया गया है।

उपराष्ट्रपति ने न्याय सेतु शुभंकर का भी अनावरण किया। इसे न्याय के एक सहज और सुलभ प्रतीक के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक भागीदारी विशेष रूप से ग्रामीण और डिजिटल रूप से वंचित आबादी को मजबूत करना है। इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली के सहयोग से विकसित कानूनी जागरूकता पर आधारित कॉमिक पुस्तकों की एक श्रृंखला भी लॉन्च की गई। इस अवसर पर विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

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