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"राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022" एक ऐतिहासिक सुधार था जिसने भू-स्थानिक डेटा तक पहुंच को सबके लिए सुलभ बनाया और इस क्षेत्र को उदार बनाया : डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भूगणित के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया, कहा- जिओडकॉन-26 भू-स्थानिक विज्ञान में भारत के बढ़ते नेतृत्व को रेखांकित करता है

Dr Jitendra Singh
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नई दिल्ली , 12 Mar 2026

Last updated on: Mar 13, 2026, 13:14 IST

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन के तहत वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है और इस परिवर्तनकारी दशक में भूगणित (Geodesy) जैसे मूलभूत विज्ञानों को रणनीतिक राष्ट्रीय शक्ति के रूप में उभरना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि "राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022" एक ऐतिहासिक सुधार है, जिसने भू-स्थानिक डेटा तक पहुंच को आसान बनाया है और इस क्षेत्र को उदार बनाया है। केंद्रीय मंत्री नई दिल्ली स्थित आईएनएसए में भूगणित पर पहले राष्ट्रीय सम्मेलन ‘जिओडकॉन-26’ (GeodCon-260 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आज भू-स्थानिक क्षेत्र शासन, बुनियादी ढांचे के विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा से निपटने की क्षमता और आर्थिक विकास में एक अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि भू-गणित इस तेजी से बढ़ते भू-स्थानिक इकोसिस्टम की वैज्ञानिक रीढ़ है, जो सटीक स्थिति निर्धारण, सैटेलाइट नेविगेशन, बुनियादी ढांचे की योजना, जलवायु निगरानी और आपदा प्रतिक्रिया को संभव बनाती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 एक ऐतिहासिक सुधार था, जिसने इस क्षेत्र को उदार बनाया, भू-स्थानिक डेटा तक पहुँच को सभी के लिए सुलभ बनाया और नवाचार तथा निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक क्षेत्र अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों के लिए एक सहायक परत बनता जा रहा है, जिससे शासन के साथ-साथ राष्ट्रीय विकास भी मजबूत हो रहा है।

भूगणित के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि जहां मैपिंग विकास की दृश्य परत को दर्शाती है, वहीं भूगणित वह अदृश्य लेकिन आवश्यक वैज्ञानिक आधार है जो इसे संभव बनाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र को अपने जियोडेटिक संदर्भ फ्रेम, गुरुत्वाकर्षण मॉडल और पोजिशनिंग प्रणालियों पर अपनी संप्रभु क्षमता बनाए रखनी चाहिए।

भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली 'नेविक' (NavIC), अंतरिक्ष मिशन और पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रमों जैसी पहलें वैश्विक जियोस्पेशियल इकोसिस्टम में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रणालियों की सफलता और सटीकता, मजबूत जियोडेटिक बुनियादी ढांचे और संदर्भ फ्रेम से गहराई से जुड़ी हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने भारत की जियोस्पेशियल क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों, शिक्षा जगत, उद्योग और युवा शोधकर्ताओं के बीच सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिओडकॉन-26 जैसे मंच इस क्षेत्र में काम कर रहे हितधारकों के बीच बातचीत, नेटवर्किंग और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने देश के जियोस्पेशियल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और भूगणित में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने युवा विद्वानों और शोधकर्ताओं की बड़ी भागीदारी का भी स्वागत किया और कहा कि देश में एक मजबूत और आत्मनिर्भर जियोस्पेशियल इकोसिस्टम बनाने के लिए क्षमता निर्माण और कुशल मानव संसाधन का विकास आवश्यक होगा।

जिओडकॉन-26 के संरक्षक पद्म श्री डॉ. वी. पी. डिमरी ने कहा कि भूगणित लंबे समय से एक बुनियादी विज्ञान रहा है जो जरूरी तो है, लेकिन अक्सर इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। यह देखकर खुशी होती है कि अब इस क्षेत्र को समर्पित एक राष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए इस पर विशेष वैज्ञानिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने लगातार वैज्ञानिक निवेश के महत्व पर जोर दिया और आईआईटी कानपुर में 'नेशनल सेंटर फॉर जियोडेसी' के साथ-साथ छह क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि यह पहल देश में जियोडेटिक विज्ञान, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मजबूत करने का एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रयास है। इस अवसर पर बोलते हुए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में एनजीपी प्रभाग के प्रमुख डॉ. एम. मोहंती ने आगामी भू-स्थानिक मिशन और राष्ट्रीय भू-स्थानिक बुनियादी ढांचे के संदर्भ में भूगणित (Geodesy) के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भूगणित केंद्र ने जीएनएसएस-आधारित संदर्भ फ्रेम विकास, भूपर्पटी विरूपण निगरानी, ​​अंतरिक्ष भूगणित तकनीकों और जिओएआई-आधारित अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को सक्षम बनाया है, साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उन्नत भू-स्थानिक डेटा प्रसंस्करण क्षमताओं को भी सहायता प्रदान की है।

जिओडकॉन-26 वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शैक्षणिक संस्थानों और युवा शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाता है, ताकि वे भूगणित में हुई प्रगति और राष्ट्रीय विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा रणनीतिक क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श कर सकें। उद्घाटन सत्र में जिओडकॉन-26 के अध्यक्ष डॉ. ओंकार दीक्षित और भारत के सर्वेयर जनरल श्री हितेश कुमार एस. मकवाना ने भी संबोधित किया।

 

Tags: Dr Jitendra Singh , Bharatiya Janata Party , BJP , Union Minister of Earth Sciences

 

 

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