मंडी सिस्टम को मजबूत करना और किसानों की आमदन में वृद्धि के लिए विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही मंडियों में फूड की बर्बादी होने से बचाने और उपभोक्ताओं तक बेहतर ढंग से पहुंचाना बहुत जरूरी है, ताकि किसानों को उसका लाभ मिल सके। यह विचार स. हरचंद सिंह बरसट, चेयरमैन नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड्स (कौसांब) और पंजाब मंडी बोर्ड ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए व्यक्त किये।
आज किसान भवन, चंडीगढ़ में विभिन्न मार्केटिंग बोर्डों, अधिकारियों, किसानों और स्टॉक होल्डरों से एग्रीकल्चरल मार्केटिंग पॉलिसी के लिए मांगे गए सुझावों संबंधी अंतिम बैठक आयोजित की गई। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए स. बरसट ने बताया कि कौसांब देश के मार्केटिंग बोर्डों का एक समूह है, जिससे केंद्र सरकार द्वारा एग्रीकल्चरल मार्केटिंग पॉलिसी संबंधी सुझाव मांगे गए थे, जिसके लिये 25 नवंबर 2024 को कौसांब द्वारा एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई, जिसके चेयरमैन श्री आदित्य देवी लाल चौटाला विधायक डबवाली बनाए गए और श्री अशोक दलवाई को वाइस-चेयरमैन बनाया गया।
इसके अतिरिक्त श्री गोकुल पट्नायक आईएएस एवं पूर्व चेयरमैन एपीईडीए, श्री प्रवेश शर्मा आईएएस एवं पूर्व एमडी एसएफएसी, डॉ. सुखपाल सिंह चेयरपर्सन पंजाब स्टेट फार्मर्स एंड फार्म वर्कर्स कमीशन तथा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड्स के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए। डॉ. जे. एस. यादव को सदस्य सचिव बनाया गया।
उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के मार्केटिंग बोर्डों का समूह होने के कारण हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम केंद्र सरकार को ऐसे सुझाव दें, जिससे किसानों, व्यापारियों और आढ़तियों को अधिकतम लाभ मिल सके। इसी उद्देश्य से विभिन्न वर्गों से विचार-विमर्श कर एक ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, जिसके संबंध में आज अंतिम बैठक हुई।
सभी सदस्यों द्वारा दिए गए सुझाव आज एकत्र हो जाएंगे, जिन्हें शीघ्र ही कंपाइल कर लिया जाएगा। स. बरसट ने बताया कि कई बार कृषि जिनसों की मार्केटिंग संबंधी पूरी जानकारी न होने के कारण किसान अपनी फसलें फैंकने को मजबूर हो जाते हैं या उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर यह डाटा एकत्र किया जाए कि किस राज्य में कौन-सा फल या सब्जी कितनी मात्रा में उत्पादित होती है और किस राज्य में उसकी कितनी मांग है।
इस संबंध में केंद्र सरकार बड़े स्तर पर डाटा इक्ट्ठा करे, ताकि फसलों का सही चैनलाइजेशन हो सके। इससे जिस स्थान पर फसल अधिक मात्रा में होती है, वहां बर्बादी होने के बजाय उसे अन्य राज्यों के उपभोक्ताओं तक उचित और वाजिब मूल्य पर पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही एक ऐसा मॉड्यूल तैयार किया जाए, जिससे यह पता चल सके कि किस राज्य में कौन-सा फल या सब्जी किस मूल्य पर बिक रही है।
उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य है कि मंडी सिस्टम को मजबूत किया जाए, न कि उसे तोड़ा जाये। साथ ही एमएसपी को बरकरार रखा जाए। यदि केंद्र सरकार वास्तव में किसानों का भला चाहती है, तो कौसांब द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार कर ऐसी नीति बनाए, जिससे फल, सब्जियों और अन्य कृषि जिनसों की बर्बादी रुके, किसानों को उचित मूल्य मिले और उपभोक्ताओं तक सामान सही तरीके से पहुंचे।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि फल और सब्जी मंडियों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं तक स्वस्थ उत्पाद पहुंच सकें। इस अवसर पर श्री आदित्य देवी लाल चौटाला ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश के प्रत्येक राज्य में एक कॉमन मंडी स्थापित की जानी चाहिए, जहां विभिन्न राज्यों के मार्केटिंग बोर्डों को स्थान दिया जाए।
वहां विभिन्न राज्यों द्वारा नोडल अधिकारी तैनात किए जाएं और उस स्थान पर किसान जाकर अपनी फसल सीधे बेच सकें। फसल बेचने के बाद भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राज्य मार्केटिंग बोर्ड द्वारा पुख्ता व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को बाद में किसी प्रकार की परेशानी न हो। डॉ. जे. एस. यादव, एमडी कौसांब, ने एक्सपर्ट कमेटी को प्राप्त किसान-हितैषी सुझावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और सभी सदस्यों का धन्यवाद किया।