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भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के अलवर में 'बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन' की अध्यक्षता की

बाघों के प्रभावी संरक्षण के लिए नीतिगत निर्णयों की व्यापक समीक्षा और क्षेत्रवार चुनौतियों की पहचान आवश्यक है: श्री भूपेंद्र यादव

Bhupender Yadav, Bhupendra Yadav, BJP, Bharatiya Janata Party, Union Minister for Environment Forest and Climate Change
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अलवर (राजस्थान) , 07 Feb 2026

Last updated on: Feb 07, 2026, 18:32 IST

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की अब तक हुई 28 बैठकों में लिए गए सभी नीतिगत निर्णयों की समीक्षा के लिए सम्‍मेलन बुलाया ताकि उन निर्णयों की पहचान की जा सके जो अप्रचलित हो चुके हैं, जिन्हें लागू नहीं किया जा सका है और जिन्हें पूरी तरह से लागू किया जा चुका है। 

उन्होंने बताया कि इस पहल से बाघ संरक्षण नीति को वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुरूप ढालने और जमीनी स्तर पर संरक्षण उपायों के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। राजस्थान के अलवर में आयोजित 'बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन' के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मंत्री यादव ने कहा कि भारत ने बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह व्यापक नीति समीक्षा का उपयुक्त समय है। 

दो दिवसीय सम्मेलन की दिशा तय करते हुए श्री यादव ने सुझाव दिया कि पिछले पांच दशकों में लिए गए नीतिगत निर्णयों को एक औपचारिक नीतिगत वक्तव्य में संकलित किया जाना चाहिए और इस मुद्दे को एनटीसीए की अगली बैठक के पहले एजेंडा आइटम के रूप में रखा जाना चाहिए। इस सम्मेलन में राजस्थान सरकार के वन मंत्री श्री संजय शर्मा के अलावा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, एनटीसीए के वरिष्ठ अधिकारी, बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और देश भर के बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों ने भाग लिया। 

श्री यादव ने कहा कि बाघों की संख्या का आकलन, बचाव एवं पुनर्वास संबंधी बुनियादी ढांचा, मानव-वन्यजीव संघर्ष, बाघ अभ्यारण्य निधि का उपयोग और बाघ संरक्षण की नींव को मजबूत करने की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श आवश्यक है। सम्मेलन में देश में बाघ संरक्षण की समग्र स्थिति की समीक्षा की जाएगी और प्रमुख नीतिगत, प्रबंधन और परिचालन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

श्री यादव ने बाघों की संख्या में बदलाव सहित क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों की समीक्षा करने और देश के बाघ अभ्यारण्यों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए चार कार्य समूहों के गठन का भी आह्वान किया। इसके अलावा, मंत्री ने प्रतिभागियों से एनटीसीए और भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद जैसे संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने को भी कहा ताकि इन शीर्ष संगठनों से प्राप्त शोध सुझावों को शामिल किया जा सके और बाघ संरक्षण में व्यावहारिक लाभ प्राप्त किए जा सकें।

चीता पुनर्वास कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मंत्री जी ने कहा कि भारत ने सफलतापूर्वक एक ऐसी जंगली प्रजाति का अंतर्राष्ट्रीय स्थानांतरण किया है जो देश में विलुप्त हो चुकी थी, और यह परियोजना अब चीतों की तीसरी भारतीय पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से चीतों का एक नया समूह फरवरी के अंत तक आने की उम्मीद है।

श्री यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना की है, जिसमें अब तक 24 सदस्य देश हैं, जबकि कई अन्य देशों ने पर्यवेक्षक का दर्जा मांगा है। उन्होंने कहा कि यूएनडीपी, आईयूसीएन, एफएओ, सीसीएफ, जीटीएफ और जीएसएलईपी जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने भी आईबीसीए के साथ जुड़ने में रुचि दिखाई है। 

मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में घोषणा की गई है कि पहला वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईबीसीए के माध्यम से तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों - बढ़ती गर्मी, भूमि का मरुस्थलीकरण और जैव विविधता का नुकसान - का समाधान किया जा सकता है। मंत्री जी ने कहा कि बाघों और अन्य वन्यजीवों के निर्धारित क्षेत्रों से बाहर निकलने के कारण मजबूत प्रतिक्रिया प्रणालियों की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। 

उन्होंने कहा कि घायल जानवरों, संघर्ष से संबंधित मामलों, अनाथ शावकों और तनावग्रस्त अन्य जानवरों को समय पर और पेशेवर सहायता की आवश्यकता होती है, इसलिए बाघ अभ्यारण्यों के आसपास बचाव, पुनर्वास और उपचार केंद्रों के लिए एक स्पष्ट और मानकीकृत ढांचा विकसित करना आवश्यक है। इस अवसर पर मंत्री जी ने एनटीसीए की प्रचार पत्रिका - स्ट्राइप्स का विमोचन भी किया और राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएमएनएच) द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के छात्रों को पुरस्कार वितरित किए।

दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में राज्य स्तरीय अधिकारी और क्षेत्रीय प्रबंधक संरक्षण प्राथमिकताओं, कार्यान्वयन की चुनौतियों और उभरती आवश्यकताओं पर एकीकृत रूप से चर्चा करेंगे। चर्चाओं में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनमें अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026 की समीक्षा, संरक्षण और गश्त तंत्र, बाघों की आबादी का सक्रिय प्रबंधन, बचाव और पुनर्वास अवसंरचना, मानव-वन्यजीव अंतर्संबंधों का प्रबंधन, प्रोजेक्ट टाइगर के तहत निधियों का उपयोग और बाघ संरक्षण फाउंडेशन को मजबूत करना शामिल है।

बाघों की मृत्यु से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की जाएगी ताकि वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर ढंग से ढाला जा सके। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नीति, प्रबंधन और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाना, सूचित निर्णय लेने में सहयोग करना, राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान करना और बाघ संरक्षण के राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में समन्वित कार्रवाई करना होगा।

 

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